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Jhajjar: मदाना खुर्द में किसान नहीं जलाते पराली, बेचकर कमा रहे मुनाफा

Sat, 26 Oct 2024 11:40 PM IST
भूपेंद्र सिंह रवि हसिजा, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
रवि हसिजा, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sat, 26 Oct 2024 11:40 PM IST
सार

गांव के किसान कटाई के बाद कुछ अवशेष पशुचारे के लिए रखने के बाद बाकी को बेच देते हैं।

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Jhajjar: Farmers do not burn stubble in Madana Khurd, are earning profits by selling it
धान की कटाई करते। - फोटो : संवाद

विस्तार

किसान पराली जला रहे हैं। इससे भी प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश की हवा धीरे-धीरे जहरीली होती जा रही है। जो किसान पराली जला रहे हैं उन्हें एक बार मदाना खुर्द गांव आना चाहिए और यहां के किसानों से पराली प्रबंधन सीखना चाहिए। इस गांव के किसान पराली नहीं जलाते, बल्कि उसे बेचकर मुनाफा कमाते हैं।

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जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर मदाना खुर्द गांव पराली नहीं जलाने को लेकर चर्चा में रहता है। यहां के किसान धान की कटाई के बाद बचने वाले अवशेष को पहले पशुचारे के लिए निकालते हैं और बाकी बचे अवशेष को बेच डालते हैं, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर प्रति एकड़ दो से ढाई हजार रुपये और बाहरी मंडियों में चार से पांच रुपये का रेट मिल जाता है। पिछले तीन साल से गांव के किसानों को अपनी पराली बेचने के लिए गांव से बाहर भी नहीं जाना पड़ता, क्योंकि कुछ ग्रामीणों ने गांव में ही मशीन उपलब्ध करवा दी है।
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जिस भी किसान को पराली निकलवानी होती है तो मशीन खेत में भिजवा दी जाती है और किसान से दो से ढाई हजार रुपये प्रति एकड़ मिल जाते हैं। इसके बाद पराली खरीदने वाले उसे गाड़ियों में भरकर दिल्ली, राजस्थान की मंडियों में बेच देते हैं। गांव के किसान खुद भी मानते हैं कि पराली जलाने से जमीन की उर्वरक क्षमता खराब होती है, इसलिए पिछले 8-10 साल में नाममात्र की पराली जलाने की घटनाएं गांव में हुई हैं। 
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तीन साल से बेच रहे हैं पराली
हम पराली नहीं जलाते। उसे पशुचारे के रूप में प्रयोग करते हैं और बची हुई पराली को बेचा जाता है। इससे 1500 से दो हजार रुपये प्रति एकड़ में पराली बिक जाती है। पिछले तीन साल से पराली बेच रहे हैं। किसानों को पराली नहीं जलानी चाहिए। -सतीश कुमार, किसान
 

खेत से ही बिक जाती है पराली
हर साल आठ एकड़ में धान की फसल बोते हैं। इसमें एक एकड़ पशुचारे के रूप में अवशेष का प्रयोग करते हैं और बाकी को बेच देते हैं। खेत में आकर ही लोग पराली खरीदकर ले जाते हैं। इससे किसानों को बाहर बेचने भी नहीं जाना पड़ता। -आनंद कुमार, किसान


पराली बनी कमाई का जरिया
पांच एकड़ में धान लगाया हुआ है। इसमें से आधा एकड़ की पराली को पशुचारे के रूप में प्रयोग किया है और बाकी को बेच देंगे। ढाई से तीन हजार रुपये प्रति एकड़ तक पराली बिक जाती है। हमारे गांव ही नहीं आसपास के गांव में भी पराली नहीं जलाई जाती। छोटे किसान पराली को जलाने की जगह पशुचारे के रूप में प्रयोग करते हैं। पिछले 8-10 साल से पराली बेचकर मुनाफा वसूल करते हैं। -रामबीर, किसान
 

पराली प्रबंधन के लिए गांव ने खरीदी मशीन
पहले गांव के किसान को बाहर पराली बेचने जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही मशीन लाई गई है। खेत में जाकर पराली काटकर उसे दूसरी मंडियों में जाकर बेचा जाता है। यहां के किसान पराली नहीं जलाते। -राजेश, किसान 

पराली भरती है पशुओं का पेट
पिछले कई साल से मैं पराली नहीं जलाता बल्कि, पशुचारे के बाद उसका प्रयोग बेचने के लिए किया जाता है। हर साल लगभग दो एकड़ की पराली बेची जाती है। प्रति एकड़ ढाई से तीन हजार रुपये मिलता है। -फूल कुमार, किसान

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