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चैनत के पानी आंदोलन को दबाने की बजाय स्थायी समाधान करे सरकार : एआईकेकेएमएस
Sun, 28 Jun 2026 04:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 28 Jun 2026 04:24 AM IST
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बहादुरगढ़। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (एआईकेकेएमएस) ने हांसी जिले के चैनत और आसपास के गांवों में पेयजल समस्या को लेकर चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से साफ पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है।
संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी और प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल ने कहा कि पिछले करीब डेढ़ महीने से चैनत और आसपास के गांवों के लोग साफ पेयजल की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं लेकिन सरकार अभी तक इस समस्या का न्यायसंगत समाधान नहीं कर पाई है।
आरोप है कि समस्या के समाधान के बजाय सरकार आंदोलन को विफल करने के प्रयासों में अधिक रुचि दिखा रही है। जिला प्रशासन की मौजूदगी में रातों-रात पानी की सप्लाई लाइन में टी लगना, बुजुर्गों का आमरण अनशन समाप्त होना और उसके अगले ही दिन सरकार का यू-टर्न लेते हुए पुलिस के जरिए टी को उखड़वाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
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उनका कहना है कि मुख्यमंत्री से वार्ता के बावजूद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकलना दुर्भाग्यपूर्ण है। हरियाणा के अनेक गांव आज भी साफ पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। पिछले 11 वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार यदि लोगों की इस मूलभूत आवश्यकता को भी पूरा नहीं कर पा रही है तो उसके विकास के दावों की वास्तविकता सामने आ जाती है।
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संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी और प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल ने कहा कि पिछले करीब डेढ़ महीने से चैनत और आसपास के गांवों के लोग साफ पेयजल की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं लेकिन सरकार अभी तक इस समस्या का न्यायसंगत समाधान नहीं कर पाई है।
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आरोप है कि समस्या के समाधान के बजाय सरकार आंदोलन को विफल करने के प्रयासों में अधिक रुचि दिखा रही है। जिला प्रशासन की मौजूदगी में रातों-रात पानी की सप्लाई लाइन में टी लगना, बुजुर्गों का आमरण अनशन समाप्त होना और उसके अगले ही दिन सरकार का यू-टर्न लेते हुए पुलिस के जरिए टी को उखड़वाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
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उनका कहना है कि मुख्यमंत्री से वार्ता के बावजूद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकलना दुर्भाग्यपूर्ण है। हरियाणा के अनेक गांव आज भी साफ पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। पिछले 11 वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार यदि लोगों की इस मूलभूत आवश्यकता को भी पूरा नहीं कर पा रही है तो उसके विकास के दावों की वास्तविकता सामने आ जाती है।