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फिर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे स्वर्णकार
jhajjar
Updated Mon, 28 Mar 2016 02:03 AM IST
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हवन करते स्वर्णकार
- फोटो : beuro
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आम बजट में सोने व हीरे के जेवरातों पर एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगाए जाने के विरोध में स्वर्णकारों की हड़ताल जारी है। 26वें दिन से बहादुरगढ़ में स्वर्णकारों व कारीगरों ने फिर से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी। रविवार को संघ से जुड़े पांच स्वर्णकार भूख हड़ताल पर बैठे।
धरना स्थल पर स्वर्णकारों ने रोष स्वरूप वित्त मंत्री की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ भी किया। सोमवार को शहर के विभिन्न स्थानों पर फिर से विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। चार सप्ताह से स्वर्णकार अपनी मांगों को के लिए धरना देकर आवाज उठा रहे हैं। वे विधायक व अधिकारियों के माध्यम से वित्तमंत्री के नाम को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ है।
ऐसे में उनकी हड़ताल अब लंबी चलने के आसार पूरी तरह से बन गए हैं। स्वर्णकार महाबीर वर्मा और जय भगवान वर्मा का कहना है कि भाजपा सरकार तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रही है।
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आभूषणों के व्यापार से जुड़े लोगों को बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री को इस मामले में पुनर्विचार करना चाहिए ताकि वे अपनी रोजी-रोटी सही से चला सकें। उन्होंने कहा कि यदि एक्साइज ड्यूटी नहीं हटाई गई तो वे भूखे मर जाएंगे। सरकार की अनदेखी से स्वर्णकारों में रोष है। ऐसे में सभी एकजुट हो गए हैं और उनकी हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार की ओर से निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
ये बैठे भूख हड़ताल पर
स्वर्णकारों ने फिर से क्रमिक भूख हड़ताल आंदोलन शुरू किया है। रविवार को पांच सदस्य जिनमें अरविंद, अनिल, कैलाश वर्मा, गोविंद व सलाउद्दीन भूख हड़ताल पर बैठे। संघ से जुड़े सदस्यों जोनी वर्मा, रविकांत, ओमप्रकाश, रिंकू, राज वर्मा, बजरंग, बिट्टू, संजय व सुनील के अलावा कई अन्य ने कहा कि पिछले 26 दिन से उनक ा कार्य ठप पड़ा है। ऐसे में उन्हें परिवार का गुजारा चलाना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके हितों का ध्यान रखते हुए सरकार को जल्द से जल्द एक्साइज ड्यूटी वापस लेनी चाहिए।
अब तक हो चुका करोड़ों का नुकसान
प्रधान महाबीर वर्मा ने बताया कि बहादुरगढ़ से जेवरातों से अनुमानत रोजाना 50 लाख रुपये का व्यवसाय रोजाना होता था। लेकिन दो मार्च से लगातार अभी तक हड़ताल पर रहने से यहां से 13 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
यही नहीं इसमें से सरकार के राजस्व को भी लगभग 78 लाख का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि नुकसान का आंकड़ा अभी क0ाफी बढ़ सकता है क्योंकि सरकार मनमानी कर रही है ऐसे में जब तक निर्णय वापस नहीं लिया जाता तब तक वे भी हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगे।
आर्टिफिशयल ज्वैलरी की बढ़ी डिमांड
सोने-हीरे के जेवरातों पर एक्साइज ड्यूटी लगाने के चलते चार सप्ताह से बंद पड़ी स्वर्णकारों की दुकानों से आम खरीददारों को दिक्कतें हो रही है। जिन लोगों को किसी न किसी कार्य के लिए नए आभूषण की जरूरत महसूस हो रही है उन्हें इधर-उधर दौडना पड़ रहा है लेकिन उसके बाद भी उनका कार्य नहीं हो रहा। ऐसे में काफी लोग अभी आर्टिफिशयल ज्वैलरी को खरीदने लगे हैं।
इनके सहारे से ही वे अपना काम चला रहे हैं। स्वर्णकारों की दुकानें बंद होने से आर्टिफिशयल ज्वैलरी बेचने वालों की भी बल्ले-बल्ले हो रही है। आकर्षक लुक की वैरायटी वाले सामान को वे मनमाने रेट पर इन्हें बेच रहे हैं।
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धरना स्थल पर स्वर्णकारों ने रोष स्वरूप वित्त मंत्री की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ भी किया। सोमवार को शहर के विभिन्न स्थानों पर फिर से विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। चार सप्ताह से स्वर्णकार अपनी मांगों को के लिए धरना देकर आवाज उठा रहे हैं। वे विधायक व अधिकारियों के माध्यम से वित्तमंत्री के नाम को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ है।
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ऐसे में उनकी हड़ताल अब लंबी चलने के आसार पूरी तरह से बन गए हैं। स्वर्णकार महाबीर वर्मा और जय भगवान वर्मा का कहना है कि भाजपा सरकार तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रही है।
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आभूषणों के व्यापार से जुड़े लोगों को बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री को इस मामले में पुनर्विचार करना चाहिए ताकि वे अपनी रोजी-रोटी सही से चला सकें। उन्होंने कहा कि यदि एक्साइज ड्यूटी नहीं हटाई गई तो वे भूखे मर जाएंगे। सरकार की अनदेखी से स्वर्णकारों में रोष है। ऐसे में सभी एकजुट हो गए हैं और उनकी हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार की ओर से निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
ये बैठे भूख हड़ताल पर
स्वर्णकारों ने फिर से क्रमिक भूख हड़ताल आंदोलन शुरू किया है। रविवार को पांच सदस्य जिनमें अरविंद, अनिल, कैलाश वर्मा, गोविंद व सलाउद्दीन भूख हड़ताल पर बैठे। संघ से जुड़े सदस्यों जोनी वर्मा, रविकांत, ओमप्रकाश, रिंकू, राज वर्मा, बजरंग, बिट्टू, संजय व सुनील के अलावा कई अन्य ने कहा कि पिछले 26 दिन से उनक ा कार्य ठप पड़ा है। ऐसे में उन्हें परिवार का गुजारा चलाना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके हितों का ध्यान रखते हुए सरकार को जल्द से जल्द एक्साइज ड्यूटी वापस लेनी चाहिए।
अब तक हो चुका करोड़ों का नुकसान
प्रधान महाबीर वर्मा ने बताया कि बहादुरगढ़ से जेवरातों से अनुमानत रोजाना 50 लाख रुपये का व्यवसाय रोजाना होता था। लेकिन दो मार्च से लगातार अभी तक हड़ताल पर रहने से यहां से 13 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
यही नहीं इसमें से सरकार के राजस्व को भी लगभग 78 लाख का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि नुकसान का आंकड़ा अभी क0ाफी बढ़ सकता है क्योंकि सरकार मनमानी कर रही है ऐसे में जब तक निर्णय वापस नहीं लिया जाता तब तक वे भी हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगे।
आर्टिफिशयल ज्वैलरी की बढ़ी डिमांड
सोने-हीरे के जेवरातों पर एक्साइज ड्यूटी लगाने के चलते चार सप्ताह से बंद पड़ी स्वर्णकारों की दुकानों से आम खरीददारों को दिक्कतें हो रही है। जिन लोगों को किसी न किसी कार्य के लिए नए आभूषण की जरूरत महसूस हो रही है उन्हें इधर-उधर दौडना पड़ रहा है लेकिन उसके बाद भी उनका कार्य नहीं हो रहा। ऐसे में काफी लोग अभी आर्टिफिशयल ज्वैलरी को खरीदने लगे हैं।
इनके सहारे से ही वे अपना काम चला रहे हैं। स्वर्णकारों की दुकानें बंद होने से आर्टिफिशयल ज्वैलरी बेचने वालों की भी बल्ले-बल्ले हो रही है। आकर्षक लुक की वैरायटी वाले सामान को वे मनमाने रेट पर इन्हें बेच रहे हैं।