फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Farmers expressed their anger at the negotiation of negotiations

वार्ता बेनतीजा रहने पर किसानों ने प्रदर्शन कर जताया रोष

Sat, 09 Jan 2021 01:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jan 2021 01:29 AM IST
विज्ञापन
Farmers expressed their anger at the negotiation of negotiations
कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन करते एआईकेकेएमएस से से जुड़े किसान-मजदूर। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। शुक्रवार को भी किसानों और केंद्र सरकार के बीच हुई बातचीत असफल होने के बाद किसानों ने टीकरी बॉर्डर पर आक्रोश व्यक्त किया। बातचीत के परिणाम शून्य होने की खबर मिलते ही युवा किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि सरकार जितनी मर्जी परीक्षा ले लेती रहे, लेकिन हम आंदोलन को धीमा नहीं करेंगे और तेज करते जाएंगे। 9 जनवरी को चौ. छोटूराम की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया जाएगा। 13 जनवरी को लोहड़ी की अग्नि में तीनों कृषि बिलों की प्रतियां जलाएंगे। इनेलो नेता अभय चौटाला अपने सैकड़ों समर्थक किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के काफिले में टीकरी बॉर्डर पहुंचे और किसान आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
विज्ञापन

शुक्रवार की वार्ता सकारात्मक नहीं रहने पर बॉर्डर पर युवा किसानों जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने तीनों कानून वापस लो-वापस लो, किसान एकता जिंदाबाद के नारों के अलावा प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी सुरिंदर सिंह ने कहा कि बार-बार बातचीत में भी सरकार के नहीं मानने का मतलब यह नहीं है कि हम हिम्मत हारकर चले जाएंगे। हम जीतने के लिए आए हैं और जीतकर जाएंगे। किसान नेता बलबीर सिंह ने कहा कि 9 तारीख को चौ. छोटूराम की पुण्यतिथि से प्रेरणा लेकर प्रदेश के अधिकाधिक किसान इस आंदोलन से जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार एक के बाद एक लगातार बातचीत के बहाने मामले को लंबा खींचने की कोशिश कर रही है। लेकिन सरकार की इस नीति से हमारा हौसला कम नहीं होगा।
विज्ञापन

इंडियन नेशनल लोकदल के प्रधान महासचिव एवं विधायक अभय सिंह चौटाला भी अपने समर्थक सैकड़ों किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्रालियों के काफिले में टीकरी बॉर्डर पहुुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। पत्रकार वार्ता में उन्होंने सरकार से तीनों कृषि कानूनों को जल्द वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने 26 जनवरी ये कानून वापस नहीं लिए वे विधानसभा की सदस्यता छोड़ किसान आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। प्रदेश भर में लोगों को इन काले कृषि कानूनों और सरकार की जनविरोधी नीतियों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगे। गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ माह से किसान अपनी मांगों को लेकर इस भयंकर ठंड और बारिश के मौसम में डटे हुए हैं। लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। इन कृषि कानूनों को बनाने से पहले किसी भी किसान संगठन से राय नहीं ली गई और न ही किसी किसान संगठन ने ऐसे बिलों को लाने की मांग की थी। इस अवसर पर इनेलो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रकाश भारती, प्रदेश अध्यक्ष नफे सिंह राठी समेत पार्टी के सभी पदाधिकारी, पूर्व विधायक, किसान सेल के नेता और जिला अध्यक्ष मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन से जुड़े किसानों और मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस मौके उन्होंने किसान विरोधी काले कानून रद्द करो, किसान एकता जिंदाबाद, किसान मजदूर का भाईचारा जिंदाबाद, मोदी सरकार मुर्दाबाद और इंकलाब जिंदाबाद आदि नारे लगाए। धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते हुए जयकरण मांडोठी ने कहा कि केंद्र सरकार अडानी-अंबानी के इशारे पर ये काले कानून लाई है, और उनके एक वफादार नौकर की तरह काम कर रही है। मोदी सरकार पर कॉरपोरेट जगत का दबाव है। ये कानून किसानों के साथ-साथ तमाम मेहनतकश जनता को बर्बाद कर देंगे। हम तब तक सड़कों पर बैठे रहेंगे, आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक ये कानून सरकार रद्द नहीं करती। आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed