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Farmer Protest: बहादुरगढ़ की फैक्टरियों में 600 करोड़ का माल अटका, जगाधरी का प्लाईवुड उद्योग भी प्रभावित
Thu, 15 Feb 2024 11:06 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बहादुरगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, बहादुरगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 15 Feb 2024 11:06 AM IST
सार
बहादुरगढ़ की फैक्टरियों में 600 करोड़ का माल अटका हुआ है। किसान आंदोलन के कारण रास्ते बंद होने से समय पर सप्लाई नहीं हो रही है। नए ऑर्डर मिलने भी बंद हो गए हैं। ऑर्डर भी निरस्त हो रहे हैं। माल से भरी गाड़ियां फैक्टरियों में खड़ी हैं। उद्यमी का कहना है कि रास्ते नहीं खुले तो उद्योग चौपट हो जाएंगे।
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माल से भरी गाड़ी और गोदाम में पड़ी तैयार प्लाईवुड।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किसान आंदोलन के चलते बॉर्डर सील कर रास्ते बंद कर दिए गए हैं। इस कारण क्षेत्र की सात हजार छोटी बड़ी फैक्टरी में तैयार माल की डिलीवरी रुक गई है। फैक्टरी में माल लोड करके रखा गया है, लेकिन गाड़ियां दिल्ली की तरफ नहीं जा पा रही हैं। दो दिन में फैक्टरी में 600 करोड़ का माल पड़ा है।
माल की डिलिवरी समय पर न होने से ऑर्डर निरस्त हो रहे हैं। आगे भी माल के नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे। उद्यमियों का कहना है कि यदि रास्ते जल्द नहीं खुले तो यहां के उद्योग चौपट हो जाएंगे। बहादुरगढ़ में एक नहीं बल्कि कई औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र पार्ट-ए व बी सेक्टर-9 मोड़ से टीकरी बॉर्डर के बीच हैं।
एचएसआईआईडीसी सेक्टर-16, 17, पुराना औद्योगिक क्षेत्र, रोहद नगर औद्योगिक क्षेत्र, निजामपुर रोड, झज्जर रोड समेत अन्य स्थानों पर सात हजार फैक्टरी हैं। दिल्ली सीमा सील होने के बाद रास्ते बंद हैं और फैक्टरी में तैयार माल पड़ा है, लेकिन उसे भेजा नहीं जा रहा है। फैक्टरी में गाड़ी में माल लोड होकर खड़ी की गई हैं। दिल्ली, जयपुर आदि कई स्थानों पर माल जाना है।
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बहादुरगढ़ में फैक्टरी चलाने वाले 90 प्रतिशत लोग दिल्ली से आवागमन करते हैं। अब बॉर्डर सील होने के बाद बहादुरगढ़ आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है। अब मेट्रो से आ जा रहे हैं, लेकिन मेट्रो में भीड़ बढ़ गई है। सुबह और शाम के समय भीड़ कहीं ज्यादा रहती है। इसके कारण या तो जल्दी बहादुरगढ़ से जाना पड़ता है या फिर देर रात को यहां से निकलते हैं।
-सुभाष जग्गा, प्रधान, बीसीसीआई
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माल की डिलिवरी समय पर न होने से ऑर्डर निरस्त हो रहे हैं। आगे भी माल के नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे। उद्यमियों का कहना है कि यदि रास्ते जल्द नहीं खुले तो यहां के उद्योग चौपट हो जाएंगे। बहादुरगढ़ में एक नहीं बल्कि कई औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र पार्ट-ए व बी सेक्टर-9 मोड़ से टीकरी बॉर्डर के बीच हैं।
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एचएसआईआईडीसी सेक्टर-16, 17, पुराना औद्योगिक क्षेत्र, रोहद नगर औद्योगिक क्षेत्र, निजामपुर रोड, झज्जर रोड समेत अन्य स्थानों पर सात हजार फैक्टरी हैं। दिल्ली सीमा सील होने के बाद रास्ते बंद हैं और फैक्टरी में तैयार माल पड़ा है, लेकिन उसे भेजा नहीं जा रहा है। फैक्टरी में गाड़ी में माल लोड होकर खड़ी की गई हैं। दिल्ली, जयपुर आदि कई स्थानों पर माल जाना है।
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बहादुरगढ़ में फैक्टरी चलाने वाले 90 प्रतिशत लोग दिल्ली से आवागमन करते हैं। अब बॉर्डर सील होने के बाद बहादुरगढ़ आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है। अब मेट्रो से आ जा रहे हैं, लेकिन मेट्रो में भीड़ बढ़ गई है। सुबह और शाम के समय भीड़ कहीं ज्यादा रहती है। इसके कारण या तो जल्दी बहादुरगढ़ से जाना पड़ता है या फिर देर रात को यहां से निकलते हैं।
-सुभाष जग्गा, प्रधान, बीसीसीआई
बहादुरगढ़ से अलग-अलग प्रदेशों के अलावा दिल्ली में भेजे जाने वाले माल के ऑर्डर मिलने कैंसल हो गए हैं। अब जयपुर में स्थित फुटवियर इंडस्ट्री की तरफ व्यापारी माल के लिए ऑर्डर कर रहे हैं। यदि दिल्ली सीमाएं जल्द नहीं खुलती हैं तो बहादुरगढ़ इंडस्ट्री को कई सौ करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। सरकार को जल्द किसानों के मुद्दे का हल निकालना चाहिए।-नरिंदर छिकारा, उप प्रधान, बीसीसीआई
किसान आंदोलन से प्लाईवुड का 300 करोड़ का माल अटका
किसान आंदोलन के कारण दिल्ली की सभी सीमाएं सील हैं। इस दौरान दिल्ली जाने वाले ट्रक, ट्राले, सहित अन्य माल वाहक वाहन बीच में फंस गए हैं। इसका असर जिले के प्लाईवुड उद्योग पर भी पड़ रहा है। दिल्ली के रास्ते बंद होने से कई प्रदेशों के ऑर्डर पर तैयार किए माल की सप्लाई नहीं हो पा रही है। करीब चार दिन से करोड़ों का माल या तो गोदामों व ट्रांसपोर्ट या फिर रास्ते में फंसी गाड़ियों में पड़ा है।
किसान आंदोलन के कारण दिल्ली की सभी सीमाएं सील हैं। इस दौरान दिल्ली जाने वाले ट्रक, ट्राले, सहित अन्य माल वाहक वाहन बीच में फंस गए हैं। इसका असर जिले के प्लाईवुड उद्योग पर भी पड़ रहा है। दिल्ली के रास्ते बंद होने से कई प्रदेशों के ऑर्डर पर तैयार किए माल की सप्लाई नहीं हो पा रही है। करीब चार दिन से करोड़ों का माल या तो गोदामों व ट्रांसपोर्ट या फिर रास्ते में फंसी गाड़ियों में पड़ा है।
प्लाईवुड उद्यमी सतीश, रोशन ने बताया कि दिल्ली सहित जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, कोटा, राजसमंद, बाड़मेर, भरतपुर, अलवर, अजमेर, अहमदाबाद, सूरत, बडोदरा, अमरेली, भावनगर, जामनगर, राजकोट, मुंबई, नागपुर, नासिक, पुणे, पणजी सहित अन्य राज्यों के कई जिलों का माल अभी तक नहीं पहुंच पाया है। इसके अलावा पंजाब, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश सहित हरियाणा के पानीपत, सोनीपत, रोहतक, जींद, भिवानी सहित अन्य जिलों में भी सप्लाई बाधित हो गई है। माल ट्रांसपोर्ट पर बुक होने के बाद भी आपूर्ति नहीं होने और कुछ माल रास्ते में फंसा होने से उद्यमियों व कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में प्लाईवुड का बड़ा कारोबार है। यहां पर करीब 400 से ज्यादा छोटी बड़ी ईकाइयां हैं। यहां तैयार प्लाईवुड की काफी मांग है और गुणवत्ता अच्छी होने के चलते इसकी पूरे देश में आपूर्ति की जाती है। आवाजाही ठप होने से ईकाइयों में तैयार 80 प्रतिशत यही पड़ा है। चार दिन से माल तैयार है, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस दौरान जिले के 200 से ज्यादा ट्रकों का माल अधर में लटका हुआ है। चार दिन में प्लाईवुड उद्योग का करीब 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। वहीं सप्लाई न होने के कारण ईकाइयों में उत्पादन भी कम कर दिया गया है।
कई राज्यों का माल अटका
हरियाणाा प्लाईवुड मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी ने बताया कि दिल्ली बंद होने से कारोबार पर काफी असर पड़ा है। देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाने वाला माल दिल्ली के रास्ते ही जाता है। दिल्ली के रास्ते मध्यप्रदेश, गुजराज, मुंबई, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित माल भेजा जाता है। परंतु अब सीमाएं सील होने के कारण सप्लाई ठप है। तैयार माल फैक्टिरियों, गोदामों व ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। जबकि कुछ माल रास्ते में फंसा पड़ा है। जिसे मजबूर इधर उधर से निकलवाना पड़ रहा है। जिससे उद्यमियों को काफी नुकसान हो रहा है। पहले ट्रक चालकों की हड़ताल के कारण उद्यमियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था, वहीं अब इस आंदोलन से फैक्टरी संचालकों को नुकसान हो रहा है। इससे करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
हरियाणाा प्लाईवुड मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी ने बताया कि दिल्ली बंद होने से कारोबार पर काफी असर पड़ा है। देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाने वाला माल दिल्ली के रास्ते ही जाता है। दिल्ली के रास्ते मध्यप्रदेश, गुजराज, मुंबई, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित माल भेजा जाता है। परंतु अब सीमाएं सील होने के कारण सप्लाई ठप है। तैयार माल फैक्टिरियों, गोदामों व ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। जबकि कुछ माल रास्ते में फंसा पड़ा है। जिसे मजबूर इधर उधर से निकलवाना पड़ रहा है। जिससे उद्यमियों को काफी नुकसान हो रहा है। पहले ट्रक चालकों की हड़ताल के कारण उद्यमियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था, वहीं अब इस आंदोलन से फैक्टरी संचालकों को नुकसान हो रहा है। इससे करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।