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बहादुरगढ़ हादसा: पांच महीने पहले फैक्ट्री में काम करने आया था मोनू, जूते से घरवालों ने पहचाना

Sun, 01 Mar 2020 01:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बहादुरगढ़ (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Sun, 01 Mar 2020 01:21 AM IST
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factory boiler blast case of Bahadurgarh in Haryana
Bahadurgarh - फोटो : अमर उजाला

एमआईई में हुए हादसे में जान गंवाने वाले एक श्रमिक की पहचान 22 वर्षीय मोनू उर्फ सूरज के रूप में हुई है। मोनू के शरीर का काफी हिस्सा झुलसा हुआ था। हुलिए और जूते देखकर बड़े भाई ने शव की शनाख्त की। शहर थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिया है।

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मोनू मूलत: गांव दिकोली, जिला गोंडा (यूपी) का निवासी था। चार भाई-बहनों (दो भाई-दो बहन) में दूसरे नंबर का था। पिता मंगल सिंह और बड़ा भाई सोनू भी एमआईई स्थित फैक्टरियों में काम करते हैं। दसवीं कक्षा तक पढ़ाई कर चुके मोनू ने कंप्यूटर का कोर्स किया था। अभी पांच महीने पहले ही उसने 1816 प्लॉट में चलने वाली केमिकल फैक्ट्री में नौकरी शुरू की।
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इसी फैक्ट्री के ठीक सामने मोनू की मां की चाय की दुकान है। लंच के समय अकसर दोनों भाई अपनी मां की दुकान में खाना खाने आते थे। शुक्रवार को भी दोपहर को दुकान में आए। खाना खाने के बाद कुछ देर इन्होंने बातचीत की। इसके बाद अपनी अपनी फैक्टरियों में चले गए। कुछ देर ही हुई थी कि हादसा हो गया।

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ऐसे हुई पहचान

हादसे की सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे। कभी अस्पताल तो कभी फैक्टरी के आसपास, कई जगह मोनू को तलाशा गया लेकिन नहीं मिला। देर रात को एक शव नागरिक अस्पताल में पहुंचा था। इसी सूचना पर वे शनिवार की सुबह फिर से अस्पताल में गए। शव का काफी हिस्सा झुलसा हुआ था। जो हिस्सा मलबे तले दबा वो जलने से बच गया।

 

चेहरे की बनावट व जूतों से शव की शनाख्त हो सकी। मोनू की मौत पर बड़े भाई का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं पिता मंगल भी अपने आंसू नहीं रोक पाया। दोपहर बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिया। बहादुरगढ़ के श्मशान घाट में शव का दाह संस्कार किया गया।


बेहद हंसमुख था मोनू
परिजनों के मुताबिक, मोनू बेहद हंसमुख स्वभाव का था। उसके एक हाथ में थोड़ी दिक्कत थी। डॉक्टरों ने कहा था कि जब काम करेगा तो धीरे धीरे हाथ ठीक हो जाएगा। इसीलिए उसने नौकरी शुरू की थी। अपनी ड्यूटी के प्रति निष्ठावान था। हमेशा समय पर फैक्टरी जाता था। यार-दोस्तों के साथ घूमने का शोक था और अकसर कांवड़ भी लाता था।


सालभर बाद करनी थी शादी
दरअसल, मृतक मोनू के पिता मंगल सिंह करीब 20 साल पहले रोजगार के सिलसिले में बहादुरगढ़ आए थे। कुछ समय तक जटवाड़े में रहे फिर एमआईई स्थित एक फैक्टरी में रहने लगे। अभी कुछ वर्षों पहले ही छोटूराम नगर में खुद का मकान लिया था। सोनू के मुताबिक, मोनू अब काम करने लगा था। इसलिए उसकी शादी के लिए रिश्ता देखना शुरू कर दिया था। सालभर में विवाह करने की योजना थी।

 

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