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Jhajjar-Bahadurgarh News: गाड़ी, बाइक नही साइकिल है पर्यावरण प्रेमी पवन और सुरेंद्र की सवारी
Mon, 03 Jun 2024 04:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 03 Jun 2024 04:28 AM IST
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02jjrp12 पवन ।
झज्जर। आजकल चकाचौंध की जिंदगी में जहां एक-दूसरे को दिखावे के चलते लोग महंगी गाड़ियों को खरीदकर उसमें यात्रा करना पसंद करते हैं, लेकिन शहर के दो पर्यावरण प्रेमी तो है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए महंगी गाड़ियों में घूमने की बजाय साइकिल की सवारी करते हैं। शहर के सभी काम साइकिल पर जाकर पूरा करते हैं।
ये दो शख्श हैं छावनी मोहल्ला निवासी पीजीटी हिंदी शिक्षक पवन और निजी प्ले स्कूल संचालक सुरेंद्र सैनी। पवन और सुरेंद्र सैनी पिछले कई सालों से मोटरसाइकिल या कार का प्रयोग नहीं करते बल्कि अपनी साइकिल उठाकर उसी से शहर के काम पूरा करते हैं। गुरुग्राम के बसई के सरकारी स्कूल में पीजीटी हिंदी शिक्षक पवन कुमार पिछले 12 साल से साइकिल पर ही अपने घर का काम करते हैं। चाहे सब्जी मंडी से सब्जी लानी हो या बाजार से सामान। घर का कोई भी काम हो, वह अपनी साइकिल लेकर ही जाते हैं। इसके अलावा सुबह की सैर भी साइकिल से करते हैं। पवन कुमार ने बताया कि साइकिल से पर्यावरण का संरक्षण होता है। इससे प्राकृतिक संसाधन बचते हैं और पर्यावरण भी दूषित होने से बचत है। साथ ही हमारा शरीर भी पूरी तरह से स्वस्थ रहता है। जिस सरकारी स्कूल में वह पढ़ाने जाते हैं, वहां पर 65 शिक्षक है। उनके अलावा एक अन्य शिक्षक को छोड़कर सभी अपनी गाड़ियों में आते हैं। स्कूल में गाड़ियों की भरमार हो जाती है। वह उन्हें भी समझाते हैं कि वह सार्वजनिक परिवहन के साधनों का प्रयोग करे।
कॉलेज टाइम से साइकिल पर कर रहे घर के काम
प्ले स्कूल संचालक सुरेंद्र सैनी लगभग लगभग 20 साल से साइकिल पर ही अपने घर के काम करते हैं। वह पर्यावरण प्रेमी है। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, इसलिए वह जब भी घर के काम होते हैं तो साइकिल से ही करते हैं। यही नहीं स्कूल में आने वाले बच्चों को भी पर्यावरण के बारे में सचेत किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना चाहिए। साइकिल चलाने से शरीर भी स्वस्थ रहता है। वह खुद सुबह के समय साइकिल पर ही सैर करते हैं, जिससे शरीर स्वस्थ्य रहता है।
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ये दो शख्श हैं छावनी मोहल्ला निवासी पीजीटी हिंदी शिक्षक पवन और निजी प्ले स्कूल संचालक सुरेंद्र सैनी। पवन और सुरेंद्र सैनी पिछले कई सालों से मोटरसाइकिल या कार का प्रयोग नहीं करते बल्कि अपनी साइकिल उठाकर उसी से शहर के काम पूरा करते हैं। गुरुग्राम के बसई के सरकारी स्कूल में पीजीटी हिंदी शिक्षक पवन कुमार पिछले 12 साल से साइकिल पर ही अपने घर का काम करते हैं। चाहे सब्जी मंडी से सब्जी लानी हो या बाजार से सामान। घर का कोई भी काम हो, वह अपनी साइकिल लेकर ही जाते हैं। इसके अलावा सुबह की सैर भी साइकिल से करते हैं। पवन कुमार ने बताया कि साइकिल से पर्यावरण का संरक्षण होता है। इससे प्राकृतिक संसाधन बचते हैं और पर्यावरण भी दूषित होने से बचत है। साथ ही हमारा शरीर भी पूरी तरह से स्वस्थ रहता है। जिस सरकारी स्कूल में वह पढ़ाने जाते हैं, वहां पर 65 शिक्षक है। उनके अलावा एक अन्य शिक्षक को छोड़कर सभी अपनी गाड़ियों में आते हैं। स्कूल में गाड़ियों की भरमार हो जाती है। वह उन्हें भी समझाते हैं कि वह सार्वजनिक परिवहन के साधनों का प्रयोग करे।
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कॉलेज टाइम से साइकिल पर कर रहे घर के काम
प्ले स्कूल संचालक सुरेंद्र सैनी लगभग लगभग 20 साल से साइकिल पर ही अपने घर के काम करते हैं। वह पर्यावरण प्रेमी है। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, इसलिए वह जब भी घर के काम होते हैं तो साइकिल से ही करते हैं। यही नहीं स्कूल में आने वाले बच्चों को भी पर्यावरण के बारे में सचेत किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना चाहिए। साइकिल चलाने से शरीर भी स्वस्थ रहता है। वह खुद सुबह के समय साइकिल पर ही सैर करते हैं, जिससे शरीर स्वस्थ्य रहता है।

02jjrp12 पवन ।
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