फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Entrepreneurs preparing to shift industries to Rajasthan

Jhajjar-Bahadurgarh News: उद्योगों को राजस्थान शिफ्ट करने की तैयारी में उद्यमी

Sun, 18 Feb 2024 10:00 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 18 Feb 2024 10:00 PM IST
विज्ञापन
Entrepreneurs preparing to shift industries to Rajasthan
बहादुरगढ़ में स्थित औद्योगिक इकाई।
बहादुरगढ़। किसान आंदोलन के चलते वर्ष 2020 में 378 दिन तक टीकरी बॉर्डर सील रहा। उद्योगों को काफी नुकसान हुआ। अब फिर से बॉर्डर सील है। बार बार बॉर्डर सील होने और रास्ते बंद होने का असर बहादुरगढ़ के उद्योगों पर हो रहा है। इससे उद्यमी परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि आए दिन यही हाल रहा तो उन्हें अपने उद्योग राजस्थान में शिफ्ट करने पड़ेंगे। इसके लिए कई उद्यमी विचार करने लगे हैं।
विज्ञापन

छह दिनों से सील टीकरी और झाड़ौदा बॉर्डर का असर बहादुरगढ़ में प्रापर्टी बाजार और उद्योगपतियों पर साफ दिखाई देने लगा है। दिल्ली के सबसे नजदीक बसा बहादुरगढ़ औद्योगिक हब है, लेकिन अब लगातार किसान आंदोलन की वजह से उद्योगपतियों का मन यहां से उठ रहा है। बहादुरगढ़ उद्योगपतियों का कहना है कि वे दिल्ली से बहादुरगढ़ आते-जाते हैं और यहां से दिल्ली की तरफ माल भेजा और मंगवाया जाता है। अब पांच दिनों से दिल्ली बॉर्डर पूरी तरह सील होने से काम धंधे पर प्रभाव पड़ रहा है। यही वजह है कि अब यहां उद्योगपति अपने रोजगार को राजस्थान की तरफ ले जाने का मन बना रहे हैं।
विज्ञापन

नवंबर 2020 में शुरू किसान आंदोलन के दौरान टीकरी बॉर्डर पूरे 378 दिनों तक बंद रहा था। लोगों ने जैसे-तैसे यह समय बिताया, लेकिन अब फिर से किसान आंदोलन के चलते उद्योग प्रभावित होने का डर सताने लगा है। उद्यमियों का कहना है कि बॉर्डर सील होने से तैयार माल की आपूर्ति नहीं जा पा रही है। माल फैक्टरी में पड़ा है। ऑर्डर निरस्त हो रहे हैं नए भी नहीं मिल रहे। अब यदि किसान टीकरी बॉर्डर पर आकर बैठते हैं और यह आंदोलन लंबा चलता है तो इसके बाद बहादुरगढ़ की अधिकतर फैक्ट्रियों पर ताला लगने के आसार बन जाएंगे। उद्योगपतियों ने भी सरकार, प्रशासन और किसानों से आह्वान किया कि यह आंदोलन न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन



आंदोलन का खामियाजा उठाते हैं उद्योगपति

हर दूसरे वर्ष कोई न कोई आंदोलन होता है और इसका खामियाजा उद्योगपतियों को उठाना पड़ता है। राजस्थान के नीमराणा और भिवाड़ी में उद्योगपति जाने का मन बना रहे हैं। अब छह दिनों से टीकरी, झाड़ौदा के अलावा सभी बॉर्डर पूरी तरह सील हैं। अब दिल्ली में वाहन लेकर जाना बेहद मुश्किल है। बॉर्डर सील होने के कारण कई दिनों से माल भी नहीं आ-जा पा रहा है। इसकी वजह से उद्योगपतियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

-सुभाष जग्गा, अध्यक्ष, बीसीसीआई

रोड को वन-वे चालू करने की मांग
बहादुरगढ़ में छह दिनों से सील बॉर्डरों से वन-वे चालू करने की मांग है। यदि यह हो जाता है तो बहादुरगढ़ से दिल्ली आवागमन करने के साथ-साथ माल की ढुलाई करने में भी आसानी होगी, अन्यथा फैक्ट्रियों में माल प्रोडक्शन बंद हो गई है, क्योंकि माल न जाने के कारण गोदाम फुल हो गए हैं। यदि इसी तरह दिल्ली बॉर्डर बंद रहे तो आने वाले दिनों में श्रमिकों को वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं होंगे। बहादुरगढ़ में अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्र में 7 लाख श्रमिक कार्य करते हैं।


-पवन जैन, उद्योगपति

बहादुरगढ़ प्रापर्टी भी प्रभावित
किसान आंदोलन का असर अब बहादुरगढ़ में प्राॅपर्टी बाजार पर भी दिख रहा है। दिल्ली सीमाएं सील होने के बाद मामूली असर है। रिहायशी क्षेत्रों के मुकाबले औद्योगिक क्षेत्रों में काम धंध के लिए खरीदारी कम हो रही है। व्यापारी अब बहादुरगढ़ में उद्योग धंधे चलाने के लिए जमीन न लेने का मन बना रहे हैं।

-बलराज बल्ली, प्रधान, बहादुरगढ़ प्रापर्टी डीलर एसोसिएशन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed