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बुराई पर अच्छाई की हुई विजय

Wed, 12 Oct 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर Updated Wed, 12 Oct 2016 12:06 AM IST
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 Dushehra festival, Dushehra festival in Jhajjar
दशहरा - फोटो : bureau

बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का त्योहार जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व शिक्षा मंत्री और स्थानीय विधायक गीता भुक्कल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।

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हजारों की संख्या में पहुंचें लोगों ने राम-रावण युद्ध का मंचन देखा और प्रभु श्रीराम चंद्र के जयकारे लगाएं। शहर के अलावा दुजाना, बेरी, जहाजगढ़ सहित अन्य गांवों में भी विजयादशमी पर्व की धूम रही और रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया।
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इस दौरान सांसद हुड्डा और पूर्व शिक्षा मंत्री भुक्कल ने राजनीतिक बात करने पर परहेज किया और आम जन को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। इससे पूर्व दिल्ली गेट स्थित प्राचीन रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन किया गया। पहले कुंभकर्ण फिर मेघनाद के वध का मंचन हुआ। बाद में रावण वध के बाद पूरे शहर में विजयी जुलूस निकाला गया। इस दौरान हजारों की संख्या में पहुंचे ग्रामीण आंचल के लोगों के अलावा शहर के गणमान्य व्यक्ति और आम जन भी मौजूद रहे।
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बेरी में भी रही विजयादशमी की धूम
धर्म नगरी बेरी मे दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बेरी कस्बे में दशहरे के उपलक्ष्य में शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें शंकर भगवान राम-लक्ष्मण की झांकियां शामिल रहीं। शोभायात्रा में तीन हनुमान विशेष आकर्षण के केंद्र रहेेेेे। वह शोभायात्रा पंजाबियों वाले मंदिर से शुरू होकर स्वराज गंज, सुनारों वाली गली, मेन बाजार होते हुए बेरी के हाई स्कूल के मैदान में पहुंची और यहीं रावण का दहन किया गया।

मुकुटधारी हनुमान रहे आकर्षण का केंद्र
इस दौरान मुकुटधारी हनुमान आकर्षण का केंद्र रहे। विजयादशमी से चालीस दिन पहले तीन हनुमान भक्त उपवास रखते हैं। वह विजयादशमी के दिन विशेष मुकुट धारण करते है। वर्षों पुरानी चली आ रही परंपरा के अनुसार विजयादशमी के दिन हनुमान का रूप धारण करने के लिए भक्त को कड़ी तपस्या से गुजरना पड़ता है।


बता दें कि विजयादशमी के दिन भक्त को हनुमान का रूप धारण करने के लिए 40 दिन तक व्रत करना, नंगे पैर रहना, मंदिर में जमीन पर सोना पड़ता है और ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है। मान्यता है कि जिस भक्त पर बजरंग बली की कृपा हो, वही भक्त हनुमान का रूप धारण कर सकता है। इन व्रतों के दौरान भक्तों को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है।

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