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Jhajjar-Bahadurgarh News: 1992 के आंदोलन में बेरी के 2 रामभक्त सुरक्षा चक्र तोड़कर पहुंचे थे अयोध्या

Wed, 10 Jan 2024 01:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Wed, 10 Jan 2024 01:44 AM IST
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During the 1992 movement, two Ram devotees of Beri broke the security circle and reached Ayodhya.
बेरी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकरवर्ष 1990-92 में हुए आंदोलन में बेरी के रामभक्तों ने भी बढ़चढ़कर भाग लिया था, लेकिन सभी राम भक्त अयोध्या नहीं पहुंच पाए थे। जिनको बीच रास्ते में रोक लिया गया था। कानपुर जेल में गिरफ्तारी कर 14 दिन के लिए रखा गया था। कार सेवा करने के लिए 19 भक्तों का जत्था रवाना हुआ था, लेकिन धर्मनगरी बेरी के दो रामभक्त बाघपुर निवासी राजेंद्र शर्मा व बेरी निवासी अशोक पटवारी सुरक्षा चक्र तोड़कर वहां पहुंचे थे।
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जब राम मंदिर बनने का फैसला आया था तो बेरी से आंदोलन में शामिल हुए रामभक्तों ने खुशी मनाई थी। 31 साल बाद अब अयोध्या में राम मंदिर बना है तो राम भक्तों की खुशी का ठिकाना नहीं है। आंदोलन में पूर्व पार्षद नेतराम आहुजा, संदीप गुढ़ा, पीतांबर शर्मा सहित कई रामभक्तों का अहम रोल था। गांव बाघपुर निवासी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि 1992 के आंदोलन में बेरी से 19 रामभक्त कार सेवा करने के लिए अयोध्या रवाना हुए थे, लेकिन अयोध्या में केवल 2 लोग ही पहुंचे थे। आंदोलन के बाद अपने गांव सकुशल पहुंचे तो लोगों ने रामभक्तों को फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया था। आज जब 31 साल बाद राम मंदिर बनकर तैयार है। 22 जनवरी को होने वाली मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर हर घर में दिवाली की तरह दीपक जलाएं जाएंगे। विश्व हिन्दू परिषद मठ मंदिर के प्रदेश संयोजक पीतांबर शर्मा का कहना है कि 1990 के आंदोलन में रोहतक जिला था और रोहतक जिले से अलग-अलग जत्थों में राम भक्त अयोध्या के लिए निकले थे। लेकिन बीच रास्ते में कानपुर में राम भक्तों को रोक लिया गया था। कानपुर में 14 दिन की जेल काटी थी। 1992 के आंदोलन में हम लोग दिल्ली के अशोक रोड विरोध प्रदर्शन करने गए थे। उस समय आंसू गैस के गोले छोड़े गऐ थे और लाठीचार्ज किया गया, जिसमें वे घायल हो गए थे। बाद में गिरफ्तारी दी गई।
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11 दिन सरयू नदी में किया स्नान

बेरी निवासी अशोक पटवारी व गांव बाघपुर निवासी राजेंद्र शर्मा ने बतााया 1992 के आंदोलन में 26 नवंबर 1992 को दोनों घर से निकले थे और रोहतक में जत्थे के साथ रवाना हुए। रोहतक से ट्रेन में अयोध्या पहुंचे और 11 दिनों तक अयोध्या में रुके थे। अयोध्या रुकने के बाद हर रोज सरयू नदी में स्नान करते थे। 7 दिसंबर को वापिस अयोध्या से अपने गांव के लिए चले थे।
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22 जनवरी दिवाली की तरह उत्सव मनाएंगे
1992 के आंदोलन में अयोध्या पहुंचे बेरी निवासी अशोक पटवारी का कहना है कि अयोध्या जाने के लिए बढ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। 11 दिनों तक वहीं रुके थे और सुबह-शाम सरयू नदी में स्नान करते थे। जब अयोध्या से वापिस अपने गांव पहुंचे तो रामभक्तों ने स्वागत भी किया था। अब 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में दिवाली मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि आंदोलन के समय में पुलिस ने अयोध्या जाने के लिए लोगों को रोकना शुरू कर दिया था और इसके बीच भी राम भक्त कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर अयोध्या में पहुंचे थे।
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