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प्रतिबंध के बावजूद लिखी जा रही बाहर की दवाई, भटक रहे मरीज

Tue, 03 Aug 2021 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 03 Aug 2021 12:27 AM IST
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despite the ban, patients wandering outside medicine being written
सामान्य अस्पताल में दवाई लेने के लिए खड़े लोग। संवाद - फोटो : Jhjhar
झज्जर। सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों को बाहर की दवाई न लिखने के सरकार की ओर से निर्देश होने के बावजूद मरीजों के कार्ड पर बाहर की दवाइयां लिखी जा रही हैं। मरीजों को कैमिस्ट की दुकानों से प्रिंट रेट के हिसाब से ही दवाएं बेची जा रही हैं। मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है।
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इस संबंध में सामान्य अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों व उनके परिजनों से बात की गई तो किसी ने कहा कि सारी दवाई अस्पताल में मिल रही है तो किसी ने कहा कि चिकित्सक ने जो दवा लिखी है, वह बाहर मेडिकल स्टोर पर ही मिलेगी। जबकि अस्पताल प्रबंधक का दावा है कि अस्पताल में हर प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं। मरीजों को तीन से चार दिन तक की दवाई दी जा रही हैं। सामान्य अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 800 से एक हजार मरीज आते हैं।
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प्रतिक्रिया
अस्पताल में न समय पर सीट पर चिकित्सक बैठे मिलते और न मरीजों को दवाएं उपलब्ध हो रही। चिकित्सक मरीजों के कार्ड पर चार प्रकार की दवाइयां लिखते हैं। उनमें एक या दो दवाइयां ही अस्पताल से मिलती हैं, बाकी दवा बाहर मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ती हैं।
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- रामेश्वर
अस्पताल में चिकित्सक ने जो दवाई लिखी हैं, उनमें से दो-तीन दवा अंदर मिली हैं। बाकि दवा बाहर से ही खरीदनी पड़ेंगी। अब ये कितने रुपये की आएंगी, इसका पता नहीं।
- भवानी
डॉक्टर तो कार्ड पर दवाई लिख देते हैं, लेकिन अस्पताल से पूरी दवा नहीं मिलती। कभी दर्द की दवाई नहीं मिलती तो कभी दर्द पर लगाने की ट्यूब नहीं दी जाती है। बार-बार चक्कर काटते रहते हैं।
- रेखा
ओपीडी में चिकित्सक से जांच करवाने और डिस्पेंसरी में दवा लेने के लिए काफी देर तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। उसके बाद भी सरकारी अस्पताल में पूरी दवा नहीं मिल पाती।

- सुमन
वर्जन
अस्पताल में लगभग हर बीमारी की दवाइयां आ चुकी है। मरीजों को अस्पताल में ही दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही है। हर माह दवाइयों की सप्लाई नियमित रूप से आ रही हैं।
- डॉ. संजय सचदेवा, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।
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