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सीएमओ दफ्तर में भरा पानी, कामकाज प्रभावित
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:37 PM IST
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बरसात का पानी
- फोटो : bureau
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दूसरों को नसीहतें देने वाला स्वास्थ्य विभाग खुद ही नहीं सतर्क है। बारिश के एक दिन बाद भी स्थानीय नागरिक अस्पताल में पानी भरा हुआ है। जिससे कई बीमारियां पांव पसार सकती हैं। इस कदर हाल रहे तो बीमार ठीक होने के बजाए और भी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। मरीजों के साथ आए तीमारदारों ने कहा कि अस्पताल प्रश्ाासन इसकी निकासी जल्द हीं करवाए नहीं तो हम भी बीमार हो जाएंगे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हमने इस मामले में अधिकारियों को सूचित कर दिया है, जल्द ही समाधान करवाएंगे।
बता दें कि नागरिक अस्पताल परिसर के अंदर एक फीट तक पानी भरा हुआ है। सीएमओ कार्यालय सहित अन्य कमरों में पानी ही पानी है। जिसके चलते पूरे दिन कामकाज प्रभावित रहा। वहीं सीएमओ कार्यालय के कर्मचारी अपनी सीटों पर नहीं बैठ सके। कर्मचारियों को अस्पताल के नए भवन में बैठना पड़ा। कर्मचारियों ने बताया कि हमारे कमरों की छतें भी टपक रही हैं। कहीं कंप्यूटर खराब न हो जाएं, इसलिए कर्मचारियों को कंप्यूटरों पर पॉलीथिन व कपड़ा ढांप कर काम चलाना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं अस्पताल परिसर में आने वाले सभी रास्तों पर भी एक से डेढ़ फीट तक पानी भरा हुआ है। जिसके चलते मरीजों व उनके तीमारदारों को काफी परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को भी पानी के अंदर से जाना पड़ रहा है। पानी निकासी की व्यवस्था न होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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करोड़ों की लागत से बने झज्जर के नागरिक अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है। कभी डॉक्टरों की कमी, कभी दवाईयों की कमी और कभी अन्य घोटालों की वजह से सुर्खियों में रहने वाला झज्जर का अस्पताल फिर सुर्खियों में है। मानसून की पहली झमाझम बरसात में ही पूरे अस्पताल परिसर ने तालाब का रूप धारण कर लिया है। हालात इतने खराब है कि सीएमओ कार्यालय में और अन्य कमरों में भी पानी ही पानी है। जिसके चलते शुक्रवार को कोई भी कार्य नहीं हो सका। जिसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सीएमओ कार्यालय में अपने किसी कार्य के लिए आए कृष्ण कुमार, अमित का कहना था कि सीएमओ कार्यालय में अपने किसी कार्य के लिए आए थे। लेकिन यहां आकर देखा तो पूरे सीएमओ कार्यालय मं ही पानी भरा हुआ है। जिसके चलते कोई कर्मचारी अपनी सीट पर भी नहीं बैठा है। जिसके चलते समय भी खराब हुआ और आने-जाने का किराया भी लगा है। वहीं सुनीता, शीला ने बताया कि उनका कोई रिश्तेदार बीमार है। उसका हालचाल जानने के लिए आएं हैं। लेकिन यहां तो बहुत बुरा हाल है। पानी के बीच में से ही गुजरना पड़ रहा है। जिसके चलते काफी परेशानी
हुई है।
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बता दें कि नागरिक अस्पताल परिसर के अंदर एक फीट तक पानी भरा हुआ है। सीएमओ कार्यालय सहित अन्य कमरों में पानी ही पानी है। जिसके चलते पूरे दिन कामकाज प्रभावित रहा। वहीं सीएमओ कार्यालय के कर्मचारी अपनी सीटों पर नहीं बैठ सके। कर्मचारियों को अस्पताल के नए भवन में बैठना पड़ा। कर्मचारियों ने बताया कि हमारे कमरों की छतें भी टपक रही हैं। कहीं कंप्यूटर खराब न हो जाएं, इसलिए कर्मचारियों को कंप्यूटरों पर पॉलीथिन व कपड़ा ढांप कर काम चलाना पड़ रहा है।
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इतना ही नहीं अस्पताल परिसर में आने वाले सभी रास्तों पर भी एक से डेढ़ फीट तक पानी भरा हुआ है। जिसके चलते मरीजों व उनके तीमारदारों को काफी परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को भी पानी के अंदर से जाना पड़ रहा है। पानी निकासी की व्यवस्था न होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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करोड़ों की लागत से बने झज्जर के नागरिक अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है। कभी डॉक्टरों की कमी, कभी दवाईयों की कमी और कभी अन्य घोटालों की वजह से सुर्खियों में रहने वाला झज्जर का अस्पताल फिर सुर्खियों में है। मानसून की पहली झमाझम बरसात में ही पूरे अस्पताल परिसर ने तालाब का रूप धारण कर लिया है। हालात इतने खराब है कि सीएमओ कार्यालय में और अन्य कमरों में भी पानी ही पानी है। जिसके चलते शुक्रवार को कोई भी कार्य नहीं हो सका। जिसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सीएमओ कार्यालय में अपने किसी कार्य के लिए आए कृष्ण कुमार, अमित का कहना था कि सीएमओ कार्यालय में अपने किसी कार्य के लिए आए थे। लेकिन यहां आकर देखा तो पूरे सीएमओ कार्यालय मं ही पानी भरा हुआ है। जिसके चलते कोई कर्मचारी अपनी सीट पर भी नहीं बैठा है। जिसके चलते समय भी खराब हुआ और आने-जाने का किराया भी लगा है। वहीं सुनीता, शीला ने बताया कि उनका कोई रिश्तेदार बीमार है। उसका हालचाल जानने के लिए आएं हैं। लेकिन यहां तो बहुत बुरा हाल है। पानी के बीच में से ही गुजरना पड़ रहा है। जिसके चलते काफी परेशानी
हुई है।