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गत्ता फैक्टरी, गोशाला व डेयरियों में पराली सप्लाई कर रहे किसान

Mon, 04 Nov 2019 01:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 04 Nov 2019 01:03 AM IST
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धान कटाई व कढ़ाई के बाद बची हुई पराली को किसान अब आग के हवाले करने से बच रहे हैं। फिलहाल झज्जर जिले में पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि पर्यावरण विभाग की ओर से सेटेलाइट के माध्यम से भी नजर रखी जाती है। पर्यावरण को लेकर जिले के किसान भी जागरूक होने लगे हैं और पराली को जलाने के बजाय उसका प्रयोग पशुओं के चारे के अलावा अन्य उपयोग में भी लेने लगे हैं। साथ ही गत्ता फैक्टरी में भी सप्लाई करते हैं। लेकिन क्षेत्र में इसके बावजूद भी स्मॉग छाया हुआ है।
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जिला में निकलती है 10 लाख क्विंटल से अधिक पराली
कृषि विभाग के आंकड़ों को देखा जाए तो झज्जर जिले में करीब 43 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की फसल बोई गई थी। विभाग के अनुसार 1 एकड़ भूमि में करीब 10 क्विंटल पराली निकलती है। इसके हिसाब से जिले में करीब 10 लाख क्विंटल से अधिक पराली धान की फसल से निकलती है। धान की फसल से निकलने वाली पराली से पशुचारे के अलावा खाद बनाने के लिए भी उसका प्रयोग किया जा रहा है। वहीं दिल्ली के आसपास लगते किसान पराली का पशु चारा बनाने के अलावा उसे एकत्रित कर फैक्ट्रियों में भी सामान की पैकिंग के लिए बेचते हैं।
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धान की पराली से किसान खाद बना सकते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है और उसमें यूरिया नाइट्रोजन, फास्फोरस आदि की मात्रा बनी रहती है। इसलिए किसानों से अपील है कि वे पराली को न जलाएं और वातावरण को स्वच्छ बनाएं।
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डॉ. जगजीत सिंह सांगवान, एसडीओ, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।
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