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16 में से 8 एंबुलेंस इमरजेंसी ड्यूटी पर हादसा हुआ तो नहीं मिलेगी सहायता
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Tue, 28 Feb 2017 12:25 AM IST
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जाट आंदोलन के चलते जिला प्रशासन ने 8 एंबुलेंस को इमरजेंसी ड्यूटी पर लगाया है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि 16 एंबुलेंस वाले विभाग के पास बड़ा हादसे होने की स्थिति में सहायता के लिए क्या विकल्प मौजूद है। अमर उजाला ने पड़ताल की तो सामने आया कि कुछ पीएचसी और सीएचसी सेंटर तो ऐसे हैं जहां पर इमरजेंसी के दौरान सहायता के लिए एक भी एंबुलेंस मौजूद नहीं है। ऐसे में विभाग के द्वारा किस प्रकार से इतना बड़ा रिस्क उठाया जा रहा है, यह समझ से बाहर है। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि जिला मुख्यालय पर केवल एक एंबुलेंस से काम चलाया जा रहा है, वहीं ज्यादा इमरजेंसी होने पर प्रशासन द्वारा ली गई एंबुलेंस को ही बुलाया जाता है।
कैदियों की वैन भिड़ी तो करना पड़ा था एंबुलेंस का इंतजार
कुछ दिन पहले दुलीना जेल से दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में पेशी पर ले जा रही वैन को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। घटना में दो कैदी और 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। एक पुलिस के जवान को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया था तो मौके पर एंबुलेंस नहीं मिली। रेफर किए गए पुलिस के जवान को करीब एक घंटे तक वहीं रखा गया, इसके बाद पुलिस लाइन से एंबुलेंस बुलाकर रवाना किया गया था। वहीं गुड़गांव रोड पर हुए बस एक्सीडेंट में भी सवारियों को एंबुलेंस की सहायता नहीं मिल पाई थी। रोडवेज बस में ही घायलों को सामान्य अस्पताल तक लाया गया था। इससे साफ दिख रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किस प्रकार से लोगों की जान पर रिस्क लिया जा रहा है।
इन अस्पतालों में एंबुलेंस
विभाग के अनुसार झज्जर के नागरिक अस्पताल में 4, बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में 2, बेेरी के नागरिक अस्पताल में 1, डीघल सीएचसी में 1, बादली सीएचसी में 1, ढाकला सीएचसी में 1, दूबलधन सीएचसी में 1, माछरौली सीएचसी में 1, मातनहेल में 1, जमालपुर सीएचसी में 1, जहांगीर पुर सीएचसी में 1, छारा सीएचसी में 1 एंबुलेंस हैं।
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इमरजेंसी ड्यूटी पर कहां कितनी एंबुलेंस तैनात
झज्जर- 3
बहादुगरढ़ 2
बेरी 2
साल्हावास 1
जिले भर में सीएचसी और उनके अंडर आने वाली पीएचसी
सीएचसी बादली- पीएचसी बाढ़सा, पीएचसी, जहांगीरपुर, पीएचसी, छुड़ानी।
सीएचसी ढाकला- पीएचसी पाटोदा, पीएचसी माछरौली, पीएचसी तुंबाहेडी, पीएचसी सिलानी।
सीएचसी डीघल- पीएचसी दुजाना, पीएचसी भंभेवा, पीएचसी खरहर।
सीएचसी छारा- पीएचसी खोरड़ा, पीएचसी जसौरखेड़ी, पीएचसी मांडोठी, पीएचसी नूनामाजरा।
सीएचसी दूबलधन- पीएचसी जहाजगढ़, पीएचसी छुछकवास, पीएचसी माजरा डी
सीएचसी जमालपुर- पीएचसी बहू, पीएचसी मातनहेल, पीएचसी साल्हावास, पीएचसी बिरोहड़।
जनसंख्या अनुपात में पहले ही कम हैं एंबुलेंस
10 लाख की आबादी वाले जिले में मरीजों को लाने ले जाने के लिए मात्र 16 एंबुलेंस है। वर्तमान स्थिति पर नजर दौड़ाई जाए तो इस समय जिले में 62 हजार की आबादी पर सिर्फ एक ही एंबुलेंस है। विभाग इन 16 एंबुलेंस के बलबूते ही समय पर सुविधा देने और सिर्फ 15 से 20 मिनट में दुघर्टना स्थल पर पहुंचने का दावा कर रहा है। लेकिन यह दावा पिछले कुछ महीनों में कई दफा फेल हो चुका है। डीघल में जहां दो मासूमों की मौत हो गई थी, वहीं कुलाना गांव के पास भी हुई सड़क दुघर्टना में भी समय पर एंबुलेंस न मिलने के चलते दो छात्राओं ने दम तोड़ दिया था।
स्टाफ की कमी भी आ रही आड़े
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रति एंबुलेंस पर प्रति दिन के हिसाब से 3 ड्राइवर और 3 ईएमटी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके चलते जिले भर की 16 एंबुलेंस पर 40 ड्राईवर और 31 ईएमटी की व्यवस्था होनी आवश्यक है, पर वास्तविकता कुछ और ही है। वर्तमान में 16 एंबुलेंस पर 40 ड्राईवरों की जगह 32 और 31 ईएमटी के लिए सिर्फ 14 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
क्या है डब्लयूएचओ के नार्म्स
डब्लयूएचओ के नार्म्स के तहत एक एंबुलेेंस में एक ईएमटी इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशयन की नियुक्ति होनी चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीज की देखभाल उचित ढंग से की जा सके। स्टाफ के साथ में एंबुलेंस में आक्ॅसीजन सिलेंडर, ग्लूकोज व्यवस्था, आपातकालीन सभी दवाओं के अलावा, डिलीवरी केस में इससे संबंधित सभी दवाईयां होने का प्रावधान है।
दुर्घटना होने की स्थिति में रोटेशन के अलावा इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात एंबुलेंस की भी सहायता ली जा रही है। स्टाफ की कमी खल रही है, जिसके लिए उच्चअधिकारियों को लिखा जा चुका है। उनके प्रयास रहा है कि मरीजों और हादसों में घायलों तक तुरंत मदद पहुंचाई जाए।
डा. रमेश धनखड़, सीएमओ, झज्जर।
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कैदियों की वैन भिड़ी तो करना पड़ा था एंबुलेंस का इंतजार
कुछ दिन पहले दुलीना जेल से दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में पेशी पर ले जा रही वैन को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। घटना में दो कैदी और 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। एक पुलिस के जवान को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया था तो मौके पर एंबुलेंस नहीं मिली। रेफर किए गए पुलिस के जवान को करीब एक घंटे तक वहीं रखा गया, इसके बाद पुलिस लाइन से एंबुलेंस बुलाकर रवाना किया गया था। वहीं गुड़गांव रोड पर हुए बस एक्सीडेंट में भी सवारियों को एंबुलेंस की सहायता नहीं मिल पाई थी। रोडवेज बस में ही घायलों को सामान्य अस्पताल तक लाया गया था। इससे साफ दिख रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किस प्रकार से लोगों की जान पर रिस्क लिया जा रहा है।
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इन अस्पतालों में एंबुलेंस
विभाग के अनुसार झज्जर के नागरिक अस्पताल में 4, बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में 2, बेेरी के नागरिक अस्पताल में 1, डीघल सीएचसी में 1, बादली सीएचसी में 1, ढाकला सीएचसी में 1, दूबलधन सीएचसी में 1, माछरौली सीएचसी में 1, मातनहेल में 1, जमालपुर सीएचसी में 1, जहांगीर पुर सीएचसी में 1, छारा सीएचसी में 1 एंबुलेंस हैं।
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इमरजेंसी ड्यूटी पर कहां कितनी एंबुलेंस तैनात
झज्जर- 3
बहादुगरढ़ 2
बेरी 2
साल्हावास 1
जिले भर में सीएचसी और उनके अंडर आने वाली पीएचसी
सीएचसी बादली- पीएचसी बाढ़सा, पीएचसी, जहांगीरपुर, पीएचसी, छुड़ानी।
सीएचसी ढाकला- पीएचसी पाटोदा, पीएचसी माछरौली, पीएचसी तुंबाहेडी, पीएचसी सिलानी।
सीएचसी डीघल- पीएचसी दुजाना, पीएचसी भंभेवा, पीएचसी खरहर।
सीएचसी छारा- पीएचसी खोरड़ा, पीएचसी जसौरखेड़ी, पीएचसी मांडोठी, पीएचसी नूनामाजरा।
सीएचसी दूबलधन- पीएचसी जहाजगढ़, पीएचसी छुछकवास, पीएचसी माजरा डी
सीएचसी जमालपुर- पीएचसी बहू, पीएचसी मातनहेल, पीएचसी साल्हावास, पीएचसी बिरोहड़।
जनसंख्या अनुपात में पहले ही कम हैं एंबुलेंस
10 लाख की आबादी वाले जिले में मरीजों को लाने ले जाने के लिए मात्र 16 एंबुलेंस है। वर्तमान स्थिति पर नजर दौड़ाई जाए तो इस समय जिले में 62 हजार की आबादी पर सिर्फ एक ही एंबुलेंस है। विभाग इन 16 एंबुलेंस के बलबूते ही समय पर सुविधा देने और सिर्फ 15 से 20 मिनट में दुघर्टना स्थल पर पहुंचने का दावा कर रहा है। लेकिन यह दावा पिछले कुछ महीनों में कई दफा फेल हो चुका है। डीघल में जहां दो मासूमों की मौत हो गई थी, वहीं कुलाना गांव के पास भी हुई सड़क दुघर्टना में भी समय पर एंबुलेंस न मिलने के चलते दो छात्राओं ने दम तोड़ दिया था।
स्टाफ की कमी भी आ रही आड़े
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रति एंबुलेंस पर प्रति दिन के हिसाब से 3 ड्राइवर और 3 ईएमटी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके चलते जिले भर की 16 एंबुलेंस पर 40 ड्राईवर और 31 ईएमटी की व्यवस्था होनी आवश्यक है, पर वास्तविकता कुछ और ही है। वर्तमान में 16 एंबुलेंस पर 40 ड्राईवरों की जगह 32 और 31 ईएमटी के लिए सिर्फ 14 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
क्या है डब्लयूएचओ के नार्म्स
डब्लयूएचओ के नार्म्स के तहत एक एंबुलेेंस में एक ईएमटी इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशयन की नियुक्ति होनी चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीज की देखभाल उचित ढंग से की जा सके। स्टाफ के साथ में एंबुलेंस में आक्ॅसीजन सिलेंडर, ग्लूकोज व्यवस्था, आपातकालीन सभी दवाओं के अलावा, डिलीवरी केस में इससे संबंधित सभी दवाईयां होने का प्रावधान है।
दुर्घटना होने की स्थिति में रोटेशन के अलावा इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात एंबुलेंस की भी सहायता ली जा रही है। स्टाफ की कमी खल रही है, जिसके लिए उच्चअधिकारियों को लिखा जा चुका है। उनके प्रयास रहा है कि मरीजों और हादसों में घायलों तक तुरंत मदद पहुंचाई जाए।
डा. रमेश धनखड़, सीएमओ, झज्जर।