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झूठे प्रचार के बजाय पूरी फसल खरीदे सरकार : किसान संगठन
Updated Fri, 15 Jun 2018 01:00 AM IST
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झूठे प्रचार के बजाय पूरी फसल खरीदे सरकार: किसान संगठन
अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। भारतीय किसान यूनियन, भूमि बचाओ संघर्ष समिति, जय किसान आंदोलन और ऑल इंडिया कृषक खेत मजदूर संगठन, स्वराज नागरिक मंच आदि किसान संगठनों ने वीरवार को एसडीएम जगनिवास को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से फसल की पूरी खरीद, कृषि नीति पर काम करने, मंडियों के हालात सुधारने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि किसान देश का सबसे बड़ा उत्पादक है, देश का अन्नदाता है। मगर देश में अन्नदाता का ही शोषण किया जा रहा है। किसानों को उनकी फसल का जायज रुपया नहीं मिलता। अब सरकार झूठे प्रचार के जरिये पूरी खरीद के दावे कर रही है। जबकि धरातल पर ऐसा कुछ नहीं है। विज्ञापनों के जरिये सरकार भ्रामक प्रचार कर रही है। जबकि हकीकत ये है कि राज्य के किसानों की गन्ने की फसल का 800 करोड़ रुपये अभी बकाया है। इसके अलावा पहले सरसों की खरीद के दौरान किसानों की दुर्गति की गई। अब सूरजमुखी खरीद में भी किसानों से लूट की जा रही है। 4100 रुपये एमएसपी दरों पर खरीदने के बजाय तीन हजार से 3200 रुपये के हिसाब से फसल खरीदी जा रही है। कृषि अन्वेषक डा. शमशेर ने कहा कि वर्तमान में किसानों की उपजाऊ भूमि छीनकर किसानों को मजदूर बनाने की नीति पर काम चल रह है। जो किसान संगठन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। कामरेड हंसराज राणा ने कहा कि चुनाव के समय सत्ता और प्रतिपक्ष को किसानों की वोट याद आती है। मगर बाद में सब भूल जाते हैं। किसान देश का अन्नदाता है और किसान के हित में काम किया जाए। ज्ञापन देने वालों में चौधरी प्रताप सिंह छिल्लर, अशोक, दिलावर सिंह, राहुल, मांगेराम, कर्मवीर, सतवीर, देवेंद्र राठी आदि उपस्थित थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। भारतीय किसान यूनियन, भूमि बचाओ संघर्ष समिति, जय किसान आंदोलन और ऑल इंडिया कृषक खेत मजदूर संगठन, स्वराज नागरिक मंच आदि किसान संगठनों ने वीरवार को एसडीएम जगनिवास को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से फसल की पूरी खरीद, कृषि नीति पर काम करने, मंडियों के हालात सुधारने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि किसान देश का सबसे बड़ा उत्पादक है, देश का अन्नदाता है। मगर देश में अन्नदाता का ही शोषण किया जा रहा है। किसानों को उनकी फसल का जायज रुपया नहीं मिलता। अब सरकार झूठे प्रचार के जरिये पूरी खरीद के दावे कर रही है। जबकि धरातल पर ऐसा कुछ नहीं है। विज्ञापनों के जरिये सरकार भ्रामक प्रचार कर रही है। जबकि हकीकत ये है कि राज्य के किसानों की गन्ने की फसल का 800 करोड़ रुपये अभी बकाया है। इसके अलावा पहले सरसों की खरीद के दौरान किसानों की दुर्गति की गई। अब सूरजमुखी खरीद में भी किसानों से लूट की जा रही है। 4100 रुपये एमएसपी दरों पर खरीदने के बजाय तीन हजार से 3200 रुपये के हिसाब से फसल खरीदी जा रही है। कृषि अन्वेषक डा. शमशेर ने कहा कि वर्तमान में किसानों की उपजाऊ भूमि छीनकर किसानों को मजदूर बनाने की नीति पर काम चल रह है। जो किसान संगठन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। कामरेड हंसराज राणा ने कहा कि चुनाव के समय सत्ता और प्रतिपक्ष को किसानों की वोट याद आती है। मगर बाद में सब भूल जाते हैं। किसान देश का अन्नदाता है और किसान के हित में काम किया जाए। ज्ञापन देने वालों में चौधरी प्रताप सिंह छिल्लर, अशोक, दिलावर सिंह, राहुल, मांगेराम, कर्मवीर, सतवीर, देवेंद्र राठी आदि उपस्थित थे।
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