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चालक-परिचालकों के जिम्मे क्लर्क का काम, परिवहन सेवा से जिले के कई गांव अभी अछूते
Updated Thu, 22 Mar 2018 01:35 AM IST
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चालक परिचालक संभाल रहे क्लर्क का काम, 15 बस रूट प्रभावित
चरखी दादरी।
जिले के रोडवेज डिपो में चालक-परिचालक से क्लर्क का काम करवाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं डिपो में 60 परिचालकों व 15 चालकों की भी लंबे समय से कमी बनी हुई है। इनके अलावा 28 क्लर्कों की भी कमी भी खल रही है। कर्मचारियों की कमी के चलते सभी रूटों पर बसों के पहिये नहीं दौड़ पा रहे हैं। वहीं, रोडवेज को प्रतिदिन करीब दो लाख रुपये के राजस्व का भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। डिपो में इस समय 145 बसें विभिन्न रूटों पर चल रही हैं।
रोडवेज डिपो पिछले काफी समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। कांग्रेस सरकार के शासनकाल में चरखी दादरी सब डिपो को डिपो का दर्जा दिया गया था। उसके बाद यहां चालक प्रशिक्षण केंद्र भी शुरू किया गया ताकि भारी वाहन का प्रशिक्षण देकर लाइसेंस दिया जा सके। डिपो की बसों द्वारा दिल्ली, चंडीगढ़, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, बहादुरगढ़, महेंद्रगढ़, नारनौल, पिलानी, झुंझनू,सीकर, अजमेर, पुष्कर, जयपुर सहित लंबे रूटों को कवर किया जाता है। इसके लिए जिले के सभी लोकल रूट कवर किए जाते हैं। अब पिछले करीब पांच माह से डिपो में सभी प्रकार के कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। डिपो में इस समय चालक-परिचालक क्लर्क का काम संभाल रहे हैं। केश काउंटर, ड्यूटी क्लर्क व कार्यालय के अन्य कामकाज चालक-परिचालकों द्वारा ही निपटाए जा रहे हैं। विभाग अधिकारियों का तर्क है कागजी कार्रवाई पूरा करवाना सबसे पहला कार्य है। क्लर्कों की कमी होने की वजह से चालक-परिचालक को यह जिम्मेदारी सौंपनी पड़ रही हैं। डिपो में 28 क्लर्कों की भी कमी बनी हुई है। क्लर्क की कमी होने की वजह से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
इन रूटों पर खल रही परिवहन सुविधाओं की कमी
इस समय ढाणी, टिकाण, खेड़ी सनवाल, महराणा, पातुवास, झोझूकलां, घिकाड़ा, साहुवास, फतेहगढ़, भागवी सहित करीब 12 गांवों में इस समय बस सेवाओं में सुधार की जरूरत है। इन गांवों के ग्रामीण काफी हद तक प्राइवेट वाहनों पर जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए निर्भर है। इसके अलावा दादरी-भिवानी, दादरी-पानीपत, दादरी-नारनौल सहित अन्य रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
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60 परिचालक व 15 चालकों की कमी
इस समय डिपो में 60 परिचालक व 15 चालकों की कमी बनी हुई है। इससे डिपो को भी रोजाना करीब दो लाख रुपये तक के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इन बसों के न चलने से रोहतक रूट, भिवानी रूट, महेंद्रगढ़, कनीना, झज्जर के अलावा बड़े गांवों के रूट भी प्रभावित हो रहे हैं। डिपो में इस समय 145 बसें विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। इनके अलावा दो बसें उड़नदस्तों के पास रहती हैं जबकि 11 बसें चालक-प्रशिक्षण केंद्र के अधीन हैं जिनके जरिए बेरोजगारों को लाइसेंस बनवाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
::वर्सन-
सरकार को चालक-परिचालकों व क्लर्कों की डिमांड भेज रखी है। जल्द ही डिपो में यह रिक्त पद भरे जाएंगे। उसके बाद बसों की सर्विस और बढ़ जाएगी। यात्रियों को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
अनिल नागर, महाप्रबंधक रोडवेज डिपो
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चरखी दादरी।
जिले के रोडवेज डिपो में चालक-परिचालक से क्लर्क का काम करवाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं डिपो में 60 परिचालकों व 15 चालकों की भी लंबे समय से कमी बनी हुई है। इनके अलावा 28 क्लर्कों की भी कमी भी खल रही है। कर्मचारियों की कमी के चलते सभी रूटों पर बसों के पहिये नहीं दौड़ पा रहे हैं। वहीं, रोडवेज को प्रतिदिन करीब दो लाख रुपये के राजस्व का भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। डिपो में इस समय 145 बसें विभिन्न रूटों पर चल रही हैं।
रोडवेज डिपो पिछले काफी समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। कांग्रेस सरकार के शासनकाल में चरखी दादरी सब डिपो को डिपो का दर्जा दिया गया था। उसके बाद यहां चालक प्रशिक्षण केंद्र भी शुरू किया गया ताकि भारी वाहन का प्रशिक्षण देकर लाइसेंस दिया जा सके। डिपो की बसों द्वारा दिल्ली, चंडीगढ़, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, बहादुरगढ़, महेंद्रगढ़, नारनौल, पिलानी, झुंझनू,सीकर, अजमेर, पुष्कर, जयपुर सहित लंबे रूटों को कवर किया जाता है। इसके लिए जिले के सभी लोकल रूट कवर किए जाते हैं। अब पिछले करीब पांच माह से डिपो में सभी प्रकार के कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। डिपो में इस समय चालक-परिचालक क्लर्क का काम संभाल रहे हैं। केश काउंटर, ड्यूटी क्लर्क व कार्यालय के अन्य कामकाज चालक-परिचालकों द्वारा ही निपटाए जा रहे हैं। विभाग अधिकारियों का तर्क है कागजी कार्रवाई पूरा करवाना सबसे पहला कार्य है। क्लर्कों की कमी होने की वजह से चालक-परिचालक को यह जिम्मेदारी सौंपनी पड़ रही हैं। डिपो में 28 क्लर्कों की भी कमी बनी हुई है। क्लर्क की कमी होने की वजह से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
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इन रूटों पर खल रही परिवहन सुविधाओं की कमी
इस समय ढाणी, टिकाण, खेड़ी सनवाल, महराणा, पातुवास, झोझूकलां, घिकाड़ा, साहुवास, फतेहगढ़, भागवी सहित करीब 12 गांवों में इस समय बस सेवाओं में सुधार की जरूरत है। इन गांवों के ग्रामीण काफी हद तक प्राइवेट वाहनों पर जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए निर्भर है। इसके अलावा दादरी-भिवानी, दादरी-पानीपत, दादरी-नारनौल सहित अन्य रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
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60 परिचालक व 15 चालकों की कमी
इस समय डिपो में 60 परिचालक व 15 चालकों की कमी बनी हुई है। इससे डिपो को भी रोजाना करीब दो लाख रुपये तक के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इन बसों के न चलने से रोहतक रूट, भिवानी रूट, महेंद्रगढ़, कनीना, झज्जर के अलावा बड़े गांवों के रूट भी प्रभावित हो रहे हैं। डिपो में इस समय 145 बसें विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। इनके अलावा दो बसें उड़नदस्तों के पास रहती हैं जबकि 11 बसें चालक-प्रशिक्षण केंद्र के अधीन हैं जिनके जरिए बेरोजगारों को लाइसेंस बनवाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
::वर्सन-
सरकार को चालक-परिचालकों व क्लर्कों की डिमांड भेज रखी है। जल्द ही डिपो में यह रिक्त पद भरे जाएंगे। उसके बाद बसों की सर्विस और बढ़ जाएगी। यात्रियों को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
अनिल नागर, महाप्रबंधक रोडवेज डिपो