फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   खरीद न होने से परेशान किसानों ने 3450 के भाव आढ़तियों को बेची सरसों, जमींदारा सोसायटीने खरीदे 1.

खरीद न होने से परेशान किसानों ने 3450 के भाव आढ़तियों को बेची सरसों, जमींदारा सोसायटीने खरीदे 1.

Thu, 17 May 2018 01:40 AM IST
Updated Thu, 17 May 2018 01:40 AM IST
विज्ञापन
खरीद न होने से परेशान किसानों ने 3450 के भाव आढ़तियों को बेची सरसों, जमींदारा सोसायटीने खरीदे 1.
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

चरखी दादरी।
सरसों खरीद न होने से परेशान किसानों ने औने-पौने दामों पर अपनी सरसों तेल मिलर्स और आढ़तियों को बेच दी। किसानों ने 3450 से 3700 के भाव पर सरसों बेची है और इससे इन्हें प्रति क्विंटल 300-550 रुपये तक का नुकसान हुआ है। वहीं, पिछले दो सप्ताह से मंडी में सरसों की सरकारी खरीद न होने के कारण कई किसानों को ट्रैक्टरों का प्रतिदिन एक हजार रुपये के हिसाब से किराया देना पड़ा है। इसके अलावा मंडी में ठहरने पर एक किसान का रोजाना 400 से 500 रुपये का खर्चा भी हुआ है। इस लिहाज से समय पर खरीद न होने से किसान को 15 से 20 हजार का नुकसान हुआ है। जिले के करीब चार हजार किसानों ने निर्धारित 4000 रुपये प्रति क्विंटल से कम दाम पर अपनी सरसों बेची है।
पहले अनाज मंडी गेट और फिर मार्केटिंग बोर्ड व हैफेड कार्यालय को ताला जड़ने के बाद मंगलवार देर शाम किसानों ने बैठक आयोजित की। बैठक में बुधवार को प्रदर्शन कर डीसी को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। किसान जनहित समिति के अध्यक्ष सुनील पहलवान ने बताया कि योजना के अनुसार बुधवार को करीब तीन हजार किसानों को मंडी में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने पहुंचना था। लेकिन आढ़ती, मार्केटिंग बोर्ड और हैफेड ने किसानों को रातोंरात गुमराह कर सस्ते दामों पर सरसों खरीद लीं।
विज्ञापन

अनाज मंडी प्रधान रामकुमार रिटोलिया का कहना है कि जमींदारा सोसायटी ने करीब 4000 रुपये के भाव से एक लाख 80 हजार बैग सरसों खरीदी हैं। उन्होंने सस्ते दाम पर सरसों खरीदने के संबंध में कहा कि जमींदारा सोसायटी ने 4000 हजार के भाव से ही खरीदी है, अगर कोई बिचौलिया बीच में किसान से रुपये खा गया हो तो अलग बात है।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसान नहीं मिले तो प्रस्तावित प्रदर्शन किया रद्द
बुधवार को अनाज मंडी में एक भी किसान के न होने से किसान नेताओं को प्रस्तावित प्रदर्शन रद्द करना पड़ा। किसान नेताओं ने बताया कि मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को पता था कि आज किसान बड़ा प्रदर्शन करने वाले हैं और इसके चलते रात के समय किसानों को गुमराह कर 500 से 600 रुपये कम दामों पर उनकी सरसों खरीद ली। इसकी जिम्मेवार प्रदेश सरकार है।
आढ़तियों ने खरीदी 40 हजार क्विंटल सरसों
अनाज मंडी में इस समय करीब 72 आढ़ती हैं। मंगलवार रात को इनमें से करीब 60 फीसदी आढ़तियों ने किसानों की सरसों खरीदी हैं। अनाज मंडी प्रधान रामकुमार रिटोलिया ने बताया कि एक आढ़ती ने औसतन 500 से 700 क्विंटल सरसों की खरीद की है। रिटोलिया ने बताया कि आढ़तियों ने 3700 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल से सरसों खरीद की है। वहीं, सूत्रों की मानें तो करीब 15 से 20 हजार क्विंटल सरसों किसानों ने मिलर्स को भी बेची है।
चार मई से पोर्टल बंद, चार हजार किसानों को टोकन हुए थे जारी
हैफेड अधिकारी रामनारायण ने बताया कि चार मई से नैफेड ने पोर्टल बंद कर रखा है और अब वो न तो किसी किसान का रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और न ही पिछले रिकॉर्ड से छेड़छाड़। उन्होंने बताया कि 10 मई के बाद किसानों को टोकन नंबर ही नहीं जारी किए गए थे। इससे पहले करीब 4000 किसानों को टोकन नंबर दिए गए। सरसों खरीद के आदेश न मिलने के चलते हैफेड ने खरीद नहीं की।

बोले, किसानों
- मैं पिछले 10 दिनों से मंडी में ठहरा था लेकिन सरसों खरीद नहीं हो रही थी। मजबूरीवश मंगलवार रात को मैंने 3700 के भाव से अपनी सरसों आढ़ती को बेच दी।
मनफूल, बलकरा

- मैं दो मई से मंडी में सरसों बेचने के लिए गया हुआ था। परेशान होकर मंगलवार रात मैंने 3400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अपनी सरसों मंडी में आढ़ती को बेच दी।
संजय, बलकरा
- मंडी में मुझे टोकन नंबर तो मिल गया लेकिन 13 दिन बाद सरसों नहीं खरीदी गई। इसके चलते मानसिक रूप से परेशान था। मंगलवार को 3450 के हिसाब से सरसों मंडी में बेच दी।
रविंद्र, बलकरा

वर्जन::
किसानों से जमींदारा सोसायटी व आढ़तियों ने सरसों खरीदी है। सोसायटी ने रात के समय करीब एक लाख 80 हजार क्विंटल सरसों की खरीद की है, जबकि आढ़तियों ने भी करीब 35 से 40 हजार क्विंटल सरसों खरीदी है। मिलों में भी कुछ किसानों ने अपनी सरसों बेची हैं।

रामकुमार रिटोलिया, प्रधान, चरखी दादरी अनाज।
वर्जन::
मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों, हैफेड व आढ़तियों ने किसानों को गुमराह करने का काम किया है। सरकार ने किसानों की कोई सुध नहीं ली है और इसके चलते उन्हें अपनी सरसों 400 से 550 रुपये सस्ती बेचनी पड़ी। किसानों को जो नुकसान भुगतना पड़ा उसकी जिम्मेवारी अधिकारियों की है।
सुनील पहलवान, प्रदेशाध्यक्ष, किसान जनहित समिति।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed