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इंसान को कभी भी जीवन में अपनी सफलता पर अंहकार नहीं करना चाहिए: धर्ममुनि ठाणे
Updated Fri, 16 Jun 2017 08:15 PM IST
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सफलता पर अहंकार नहीं करें : धर्ममुनि ठाणे
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
इंसान को कभी भी जीवन में अपनी सफलता पर अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि परोपकार के भाव को अपनाते हुए प्रत्येक पदार्थ व सुख सुविधा को परमात्मा की कृपा समझ कर ग्रहण करते हुए सर्व जीवकल्याण के मार्ग पर हमेशा प्रशस्त रहना चाहिए। ये विचार शुक्रवार को जैन स्थानक में नगर प्रवास पर आए तपस्वी रत्न जैन धर्ममुनि ठाणे महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। ये जानकारी समाज के प्रवक्ता धीरज जैन ने दी ।
धर्ममुनि ठाणे महाराज ने कहा कि हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि परमात्मा ने जिस प्रकार हमें जीवन प्रदान किया है ठीक उसी प्रकार अन्य सभी प्राणियों को भी उसने बनाया है। मनुष्य की भांति ही उन्हें भी सुख व दु:ख का पूर्णता से अहसास होता है, इसलिए हमें कभी भी किसी दूसरे जीव की कोई भी हानि नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि धर्म का मार्ग हमेशा ही लाभप्रद रहता है, इस पर सच्चे हृदय से चलने वाला हमेशा परमात्मा की कृपा का पात्र बना रहता है। परमात्मा की कृपा दृष्टि हमेशा उसी पर होती है जो सभी के हित में ही अपना भला जानता व सोचता है। अगर हम प्रभु को पाना चाहते हैं तो इस संसार में रहकर भी उसे पाया जा सकता है। भव सागर में रहते हुए सभी जीवों पर दया भाव के साथ व्यवहार करना सही मायनों में संसार में रहते हुए मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करना है। अहिंसा भाव को अपने हृदय में बसा लेना इन सभी मार्गों का मूल मंत्र है, जिस पर चलकर ही हम परमात्मा की कृपा को पा सकते है। इस अवसर पर आईसी जैन, पंकज जैन, मुकेश, दीपक जैन, कपिल, इंद्र जैन, सुरेंद्र मोहन, मोतीलाल, अश्वनी, हैप्पी, गोपीराम जैन, बिल्लू जैन, मास्टर जगदीश जैन, डॉ. एनके जैन, सुनील जैन, विजय जैन, पप्पू जैन, गगन जैन, नैना देवी, निर्मल, शांती, राजरानी, पूनम, मीना, मंजू, सुनीता, अनिता आदि उपस्थित थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
इंसान को कभी भी जीवन में अपनी सफलता पर अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि परोपकार के भाव को अपनाते हुए प्रत्येक पदार्थ व सुख सुविधा को परमात्मा की कृपा समझ कर ग्रहण करते हुए सर्व जीवकल्याण के मार्ग पर हमेशा प्रशस्त रहना चाहिए। ये विचार शुक्रवार को जैन स्थानक में नगर प्रवास पर आए तपस्वी रत्न जैन धर्ममुनि ठाणे महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। ये जानकारी समाज के प्रवक्ता धीरज जैन ने दी ।
धर्ममुनि ठाणे महाराज ने कहा कि हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि परमात्मा ने जिस प्रकार हमें जीवन प्रदान किया है ठीक उसी प्रकार अन्य सभी प्राणियों को भी उसने बनाया है। मनुष्य की भांति ही उन्हें भी सुख व दु:ख का पूर्णता से अहसास होता है, इसलिए हमें कभी भी किसी दूसरे जीव की कोई भी हानि नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि धर्म का मार्ग हमेशा ही लाभप्रद रहता है, इस पर सच्चे हृदय से चलने वाला हमेशा परमात्मा की कृपा का पात्र बना रहता है। परमात्मा की कृपा दृष्टि हमेशा उसी पर होती है जो सभी के हित में ही अपना भला जानता व सोचता है। अगर हम प्रभु को पाना चाहते हैं तो इस संसार में रहकर भी उसे पाया जा सकता है। भव सागर में रहते हुए सभी जीवों पर दया भाव के साथ व्यवहार करना सही मायनों में संसार में रहते हुए मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करना है। अहिंसा भाव को अपने हृदय में बसा लेना इन सभी मार्गों का मूल मंत्र है, जिस पर चलकर ही हम परमात्मा की कृपा को पा सकते है। इस अवसर पर आईसी जैन, पंकज जैन, मुकेश, दीपक जैन, कपिल, इंद्र जैन, सुरेंद्र मोहन, मोतीलाल, अश्वनी, हैप्पी, गोपीराम जैन, बिल्लू जैन, मास्टर जगदीश जैन, डॉ. एनके जैन, सुनील जैन, विजय जैन, पप्पू जैन, गगन जैन, नैना देवी, निर्मल, शांती, राजरानी, पूनम, मीना, मंजू, सुनीता, अनिता आदि उपस्थित थे।
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