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ऐलनाबाद उपचुनाव: अभय चौटाला ने जीतकर बचाई लाज, भाजपा को नहीं मिला ताज, कांग्रेस नासाज
Wed, 03 Nov 2021 09:10 AM IST
प्रमोद कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Wed, 03 Nov 2021 09:10 AM IST
सार
ऐलनाबाद उपचुनाव में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को गुटबाजी ले डूबी। वहीं, अपने गढ़ में कम अंतर से जीत पर इनेलो को भी अब मंथन करना होगा। किसान आंदोलन के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अभय सिंह चौटाला हालांकि जीतकर अपनी छवि बचाने में कामयाब रहे। वहीं, भाजपा-जजपा को हराकर खुद को मजबूत दिखाने का प्रयास भी उन्होंने किया।
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उपचुनाव के प्रत्याशी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इनेलो अपने परंपरागत गढ़ सिरसा के ऐलनाबाद में उपचुनाव जीतकर लाज बचाने में सफल रही है। भाजपा का ताज पाने का सपना पूरा नहीं हो पाया, जबकि कांग्रेस के लिए स्थिति नासाज है। विधानासभा में मुख्य विपक्षी दल को उसकी गुटबाजी ही ले डूबी। हालांकि नतीजे इनेलो, गठबंधन दलों और कांग्रेस के लिए मंथन करने वाले हैं। अभय चौटाला ने भले भाजपा-जजपा के चक्रव्यूह को भेदकर विधानसभा की दहलीज लांघ ली, लेकिन पारिवारिक दुर्ग में जीत के कम हुए अंतर ने उन्हें विश्लेषण पर मजबूर कर दिया है। भाजपा का वोट बैंक बढ़ने से ऐलनाबाद में इनेलो के लिए चिंतन करने वाला समय है।
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भाजपा चुनाव हारने के बावजूद अपने प्रदर्शन से उत्साहित है। इस चुनाव में इनेलो की न एकतरफा जीत हुई, न ही भाजपा-जजपा-हलोपा सरकार होने के बावजूद अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित कर पाए। जाटलैंड ने अपने लाल अभय को हारने नहीं दिया। हालांकि इनेलो को अब यह विश्लेषण करने की जरूरत है कि उसके वोट बैंक में सेंध कहां लगी।
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कांग्रेस को किसान आंदोलन का नहीं मिला लाभ
कांग्रेस को किसान आंदोलन का लाभ नहीं मिल पाया। पार्टी को भरत बेनीवाल की जगह पवन बेनीवाल को उतारना भी महंगा पड़ा। पवन चंद दिन पहले ही भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए थे। उन्हें टिकट देने से पुराने कांग्रेसी नाराज हो गए। जिसका खामियाजा कांग्रेस को तीसरे नंबर पर रहकर चुकाना पड़ा। कांग्रेस के लिए धरातल पर संगठन न होना भी भारी पड़ा। बड़े नेताओं के दिल आपस में न मिल पाना भी हार का कारण रहा। चाचा-भतीजा साथ तो आए, पर करिश्मा नहीं दिखा पाए।
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अशोक तंवर से मिली ताकत
अपना भारत मोर्चा के सर्वेसर्वा व पूर्व सांसद अशोक तंवर के साथ आने से भी अभय चौटाला को ताकत मिली। वे सिरसा सीट से कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहते भी उनके साथ अनेक लोग भी जुड़े हैं। उनके कैडर का फायदा भी इनेलो को हुआ। किसान आंदोलन के कारण प्रदेश में राजनीति चरम पर होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार गोबिंद कांडा का 60 हजार से अधिक वोट ले जाना कांग्रेस-इनेलो के लिए चिंता का सबब है। उन्होंने दोनों ही दलों के वोट बैंक में सेंध लगाई है। कांग्रेस के नीचे लुढ़कने का बड़ा कारण भितरघात भी रहा।