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भारत-पाक युद्ध सैन्य इतिहास की अनूठी दास्तां : कैप्टन अजय यादव
रेवाड़ी/ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2013 10:13 PM IST
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हरियाणा के जिल बिजली, वन एवं पर्यावरण मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा
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कि देश-दुनिया के सैन्य इतिहास में यूं तो कई लड़ाईयां लड़ी गई हैं किंतु
1971 का भारत-पाक युद्ध सैन्य इतिहास की अनूठी दास्तां है।
उन्होंने सोमवार को रेजांगला शहीदी पार्क में रेजांगला समिति की ओर से शहीदों की स्मृति में आयोजित विजय एवं शौर्य सम्मान समारोह में शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होेंने कहा कि आज का दिन पूरे भारतवर्ष में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1971 में भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते बांग्लादेश को पाकिस्तान के चंगुल से आजाद कराकर अलग देश की स्थापना की थी।
उन्होंने 1962 में लद्दाख की दुर्गम बर्फीली चोटी पर लडे़ गए युद्ध की यादों को ताजा करते कहा कि वहां का चप्पा-चप्पा आज भी भारत-चीन युद्ध की कहानी बयां कर रहा है।
इस दिन भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की 13वीं बटालियन की चार्ली कंपनी के अफसरों और जवानों ने रेजांगला दर्रे में विश्व की सर्वाधिक ऊंची हवाई पट्टी की रक्षा अपने प्राणों की आहुति देकर की थी।
उन्होंने कहा कि इस दिन देश दीवाली मना रहा था और अहीरवाल के रणबांकुरे मातृभूमि की रक्षा के लिए खून की होली खेल रहे थे। इस लड़ाई में 114 बहादुर अहीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
रेजांगला युद्ध में यहां के वीर सैनिकों ने जो वीरता दिखाई थी, उसके परिणामस्वरूप ही चीन युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ही सीज फायर के लिए मजबूर हो गया था। समारोह की अध्यक्षता स्वामी शरणानंद जी महाराज ने की।
बिजली मंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों, समाजसेवियों, वरिष्ठ अधिकारियों, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र, शौर्य चक्र विजेताओं, शूरवीरों, सीआरपीएफ व बीएसएफ के कार्यरत और सेवानिवृत्त पदाधिकारियों को सम्मानित किया।
इस दौरान अजीत सिंह भाटोटिया, चिरंजीव राव, कर्नल रोशन सिंह, मेजर टीसी राव, ईश्वर सिंह जाखड़, जवाहर लाल सचदेवा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इससे पहले बिजली मंत्री ने युद्ध स्मारक पर पहुंचकर देश के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त सुल्तान सिंह घोसवाल, हरीश सैनी, मेजर प्रताप सिंह, चौधरी हीरा लाल, डॉ. उमाशंकर, मेजर प्रताप सिंह, नरेश शर्मा समेत भूतपूर्व सैनिक, युद्ध वीरांगनाएं और गणमान्य लोग उपस्थित थे।
उन्होंने सोमवार को रेजांगला शहीदी पार्क में रेजांगला समिति की ओर से शहीदों की स्मृति में आयोजित विजय एवं शौर्य सम्मान समारोह में शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होेंने कहा कि आज का दिन पूरे भारतवर्ष में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1971 में भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते बांग्लादेश को पाकिस्तान के चंगुल से आजाद कराकर अलग देश की स्थापना की थी।
उन्होंने 1962 में लद्दाख की दुर्गम बर्फीली चोटी पर लडे़ गए युद्ध की यादों को ताजा करते कहा कि वहां का चप्पा-चप्पा आज भी भारत-चीन युद्ध की कहानी बयां कर रहा है।
इस दिन भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की 13वीं बटालियन की चार्ली कंपनी के अफसरों और जवानों ने रेजांगला दर्रे में विश्व की सर्वाधिक ऊंची हवाई पट्टी की रक्षा अपने प्राणों की आहुति देकर की थी।
उन्होंने कहा कि इस दिन देश दीवाली मना रहा था और अहीरवाल के रणबांकुरे मातृभूमि की रक्षा के लिए खून की होली खेल रहे थे। इस लड़ाई में 114 बहादुर अहीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
रेजांगला युद्ध में यहां के वीर सैनिकों ने जो वीरता दिखाई थी, उसके परिणामस्वरूप ही चीन युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ही सीज फायर के लिए मजबूर हो गया था। समारोह की अध्यक्षता स्वामी शरणानंद जी महाराज ने की।
बिजली मंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों, समाजसेवियों, वरिष्ठ अधिकारियों, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र, शौर्य चक्र विजेताओं, शूरवीरों, सीआरपीएफ व बीएसएफ के कार्यरत और सेवानिवृत्त पदाधिकारियों को सम्मानित किया।
इस दौरान अजीत सिंह भाटोटिया, चिरंजीव राव, कर्नल रोशन सिंह, मेजर टीसी राव, ईश्वर सिंह जाखड़, जवाहर लाल सचदेवा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इससे पहले बिजली मंत्री ने युद्ध स्मारक पर पहुंचकर देश के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त सुल्तान सिंह घोसवाल, हरीश सैनी, मेजर प्रताप सिंह, चौधरी हीरा लाल, डॉ. उमाशंकर, मेजर प्रताप सिंह, नरेश शर्मा समेत भूतपूर्व सैनिक, युद्ध वीरांगनाएं और गणमान्य लोग उपस्थित थे।