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ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन पर पड़े कूड़े में लगी आग, ग्रामीणों ने ताला लगाकर दिया धरना
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ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन के बाहर धरने पर बैठे ग्रामीण।
- फोटो : Hisar
हिसार। गांव ढंढूर स्थित नगर निगम के डंपिंग स्टेशन पर कूड़े में आग लगने के विरोध में ग्रामीणों ने सोमवार सुबह सात बजे स्टेशन के गेट पर ताला लगाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरने की सूचना पाकर सुबह करीब दस बजे निगम आयुक्त अशोक गर्ग मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों ने निगमायुक्त के सामने कुछ मांगें रखीं। निगमायुक्त ने इन मांगों को जल्द पूरा करवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना खत्म कर दिया। उधर कूड़े में लगी आग को बुझाने में दमकल विभाग को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह से लेकर देर शाम तक दमकल गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं।
ये रखी मांगें
- डंपिंग स्टेशन पर कूड़े में आग लगने की घटनाओं को रोक जाए।
- कूड़े के ढेर पर मिट्टी डाली जाए।
- डंपिंग स्टेशन पर हाईमास्ट लाइट लगाई जाए।
- निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं।
शाम तक आग बुझाने में दो लाख लीटर पानी लगा
डंपिंग स्टेशन पर कूड़े के ढेर में लगी को बुझाने के लिए दमकल विभाग की गाड़ियां सुबह पांच बजे से जुट गईं। शाम पांच बजे तक 20 गाड़ियां मौके पर जा चुकी थी। अग्निशमन विभाग के अनुसार देर शाम तक आग पर काबू पाया जा सका। विभाग की मानें तो एक गाड़ी में करीब दस हजार लीटर पानी आता है। इस तरह करीब दो लाख लीटर पानी से आग पर काबू पाया गया।
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10 हजार की आबादी धुएं व राख से परेशान
ढंढूर गांव की आबादी करीब दस हजार है। जब कभी डंपिंग स्टेशन पर पड़े कूड़े में आग लगती है तो उसने उठने वाले धुएं व पैैदा होने वाली राख से पूरे गांव को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार यहां कई बार ठेेकेदार मृत पशुुुओं को भी फेंक जाता है, जिनकी बदबू से भी ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों की मानें तो धुएं व राख के कारण गांव में टीबी व चर्म रोगियों की संख्या काफी ज्यादा है।
शहरवासी भी होते हैं प्रभावित
डंपिंग स्टेशन पर पड़े कूड़े में आग लगने से शहरवासी भी प्रभावित होते हैं। खासकर सर्दियों के मौसम में जब तापमान कम होता है। ऐसे में यह धुआं नमी के साथ मिलकर स्मॉग बन जाता है। इस स्मॉग के कारण जहां दृश्यता कम हो जाती है, वहीं शहरवासियों को आंखों में जलन व सांस लेने में तकलीफ आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
12 वर्षों से यहां डाला जा रहा है कूड़ा
ग्रामीणों के अनुसार इस डंपिंग स्टेशन पर करीब 12 वर्षों से कूड़ा डाला जा रहा है। शहर से प्रतिदिन करीब 180 मीट्रिक टन कूड़ा यहां डाला जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि साल में दर्जनों बार यहां कूड़े में आग लगने की घटनाएं होती हैं।
होता है चर्म रोग व सांस की बीमारी
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक धुएं व राख के वातावरण में रहता है तो उसे चर्म रोग व सांस संबंधी बीमारी होने की आशंका रहती है। बुजुर्गों को इससे ज्यादा परेशानी हो सकती है। कोरोना महामारी को देखते हुए ऐसे वातावरण में जाने से बचना चाहिए।
-डॉ. अजीत लाठर, फिजिशियन, जिला नागरिक अस्पताल, हिसार।
कैंसर का कारण भी बन सकता है कूड़े का जलना
जीजेयू के डीएन ऑफ रिसर्च प्रोफेसर नरसीराम बिश्नोई के अनुसार कूड़े के जलने से नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, अमोनिया, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड आदि गैसें पैदा होती हैं। इसके अलावा इसमें कचरे में पॉलिथीन भी होता है, जिसके जलने से कार्सोजैनिक कंपाउंड जैसे डाईऑक्सीन, फ्यूरेन, पॉलिक्लोरोनेटिड बाई फिनाइल निकलते हैं, जो कैंसर का कारण भी बनती हैं। इसके अलावा कम तापमान व नमी के साथ मिलकर धुआं स्मॉग का रूप धारण कर लेता है। इसमें मौजूद छोटे कण दमे के रोगियों को परेशानी व आंखों में जलन का करण बनते हैं।
डंपिंग स्टेशन को शिफ्ट करने के लिए जगह देखी जा रही है
मैं खुद ढंढूर गया था। इस दौरान ग्रामीणों ने कूड़े के ढेर पर मिट्टी डलवाने की मांग की, जिस पर वहां मिट्टी डलवा दी गई। इसके अलावा जल्द ही यहां हाईमास्ट लाइट व सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए जाएंगे। डंपिंग स्टेशन को शिफ्ट करने के लिए जगह देखी जा रही है।
-अशोक कुमार गर्ग, आयुक्त, नगर निगम, हिसार।
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ग्रामीणों ने निगमायुक्त के सामने कुछ मांगें रखीं। निगमायुक्त ने इन मांगों को जल्द पूरा करवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना खत्म कर दिया। उधर कूड़े में लगी आग को बुझाने में दमकल विभाग को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह से लेकर देर शाम तक दमकल गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं।
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ये रखी मांगें
- डंपिंग स्टेशन पर कूड़े में आग लगने की घटनाओं को रोक जाए।
- कूड़े के ढेर पर मिट्टी डाली जाए।
- डंपिंग स्टेशन पर हाईमास्ट लाइट लगाई जाए।
- निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं।
शाम तक आग बुझाने में दो लाख लीटर पानी लगा
डंपिंग स्टेशन पर कूड़े के ढेर में लगी को बुझाने के लिए दमकल विभाग की गाड़ियां सुबह पांच बजे से जुट गईं। शाम पांच बजे तक 20 गाड़ियां मौके पर जा चुकी थी। अग्निशमन विभाग के अनुसार देर शाम तक आग पर काबू पाया जा सका। विभाग की मानें तो एक गाड़ी में करीब दस हजार लीटर पानी आता है। इस तरह करीब दो लाख लीटर पानी से आग पर काबू पाया गया।
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10 हजार की आबादी धुएं व राख से परेशान
ढंढूर गांव की आबादी करीब दस हजार है। जब कभी डंपिंग स्टेशन पर पड़े कूड़े में आग लगती है तो उसने उठने वाले धुएं व पैैदा होने वाली राख से पूरे गांव को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार यहां कई बार ठेेकेदार मृत पशुुुओं को भी फेंक जाता है, जिनकी बदबू से भी ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों की मानें तो धुएं व राख के कारण गांव में टीबी व चर्म रोगियों की संख्या काफी ज्यादा है।
शहरवासी भी होते हैं प्रभावित
डंपिंग स्टेशन पर पड़े कूड़े में आग लगने से शहरवासी भी प्रभावित होते हैं। खासकर सर्दियों के मौसम में जब तापमान कम होता है। ऐसे में यह धुआं नमी के साथ मिलकर स्मॉग बन जाता है। इस स्मॉग के कारण जहां दृश्यता कम हो जाती है, वहीं शहरवासियों को आंखों में जलन व सांस लेने में तकलीफ आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
12 वर्षों से यहां डाला जा रहा है कूड़ा
ग्रामीणों के अनुसार इस डंपिंग स्टेशन पर करीब 12 वर्षों से कूड़ा डाला जा रहा है। शहर से प्रतिदिन करीब 180 मीट्रिक टन कूड़ा यहां डाला जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि साल में दर्जनों बार यहां कूड़े में आग लगने की घटनाएं होती हैं।
होता है चर्म रोग व सांस की बीमारी
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक धुएं व राख के वातावरण में रहता है तो उसे चर्म रोग व सांस संबंधी बीमारी होने की आशंका रहती है। बुजुर्गों को इससे ज्यादा परेशानी हो सकती है। कोरोना महामारी को देखते हुए ऐसे वातावरण में जाने से बचना चाहिए।
-डॉ. अजीत लाठर, फिजिशियन, जिला नागरिक अस्पताल, हिसार।
कैंसर का कारण भी बन सकता है कूड़े का जलना
जीजेयू के डीएन ऑफ रिसर्च प्रोफेसर नरसीराम बिश्नोई के अनुसार कूड़े के जलने से नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, अमोनिया, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड आदि गैसें पैदा होती हैं। इसके अलावा इसमें कचरे में पॉलिथीन भी होता है, जिसके जलने से कार्सोजैनिक कंपाउंड जैसे डाईऑक्सीन, फ्यूरेन, पॉलिक्लोरोनेटिड बाई फिनाइल निकलते हैं, जो कैंसर का कारण भी बनती हैं। इसके अलावा कम तापमान व नमी के साथ मिलकर धुआं स्मॉग का रूप धारण कर लेता है। इसमें मौजूद छोटे कण दमे के रोगियों को परेशानी व आंखों में जलन का करण बनते हैं।
डंपिंग स्टेशन को शिफ्ट करने के लिए जगह देखी जा रही है
मैं खुद ढंढूर गया था। इस दौरान ग्रामीणों ने कूड़े के ढेर पर मिट्टी डलवाने की मांग की, जिस पर वहां मिट्टी डलवा दी गई। इसके अलावा जल्द ही यहां हाईमास्ट लाइट व सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए जाएंगे। डंपिंग स्टेशन को शिफ्ट करने के लिए जगह देखी जा रही है।
-अशोक कुमार गर्ग, आयुक्त, नगर निगम, हिसार।

ढंढूर डंपिंग स्टेशन से उठता धुआं।- फोटो : Hisar