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हिसार जिले में पहली बार व्हाइट फंगस के दो मामले आए
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हिसार। जिले में ब्लैक फंगस संक्रमण के बाद अब व्हाइट फंगस का संक्रमण भी फैलने लगा है। कोरोना के बाद अब तीसरा खतरा स्वास्थ्य विभाग के सामने आ गया है। जिला नागरिक अस्पताल में व्हाइट फंगस संक्रमण के 2 मामले सामने आए हैं। संक्रमित दोनों ही महिलाएं हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक दोनों महिलाएं कोरोना से भी संक्रमित है। इन दोनों में व्हाइट फंगस का संक्रमण मिला है। इन दोनों संक्रमित महिलाओं को आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया गया है। महिलाओं को एंटीफंगल दवा देकर उपचार शुरू कर दिया गया है।
दोनों महिलाएं हिसार जिले की रहने वाली हैं। दोनों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है। इन महिलाओं को शुगर की शिकायत भी है। संक्रमित महिलाएं पिछले 3-4 दिनों से जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल हैं। यहां आने पर 2 दिन बाद महिलाओं में व्हाइट फंगस संक्रमण के लक्षण सामने आए। जिसके बाद चिकित्सकों ने बुधवार को दोनों महिलाओं का सैंपल लिया। वीरवार को इन दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। चिकित्सकों के मुताबिक व्हाइट फंगस के संक्रमण का पता लगाने के लिए भी ब्लैक फंगस की तरह केओएच यानी फंगल कल्चर टेस्ट किया जाता है। ऐसी सुविधा जिला अस्पताल नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने बाहर की लैब से टेस्ट करवाए हैं।
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यह है कम खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है यह व्हाइट फंगस संक्रमण ब्लैक फंगस यानी म्यूकर्माइकोसिस की अपेक्षा कम खतरनाक होता है। यह म्यूकर्माइकोसिस नसों में जाकर खून में फैलता है। इसके बाद नसों को प्रभावित करता है। व्हाइट फंगस चमड़ी पर छाले बनकर उन पर सफेद परत बन जाती है। इसका असर केवल मुंह, जीभ या जबड़ों पर पड़ता है। जहां पर पहले मुंह में दर्द रहने लगता है। इसके बाद मुंह में छाले होने लगती हैं। धीरे-धीरे फिर उन पर सफेद परत या फफूंदी भी आने लगती है।
ये ध्यान रखें
- तरल पदार्थ का अधिक सेवन करें।
- मुंह में हर रोज गर्म पानी से गरारे करें और सफाई का ध्यान रखें।
- शुगर कंट्रोल रखें।
- खाने-पीने या चबाते समय दर्द हो तो चिकित्सक से जांच करवाएं।
संक्रमण होने के कारण
- शरीर में पानी की कमी होने या मुंह में गंदगी और रहने से भी हो सकता है।
- शुगर अधिक रहने से।
मरीजों का उपचार चल रहा है
व्हाइट फंगस संक्रमण के दो केस मिले हैं। दोनों महिलाएं जिले की रहने वाली हैं। संक्रमित महिलाओं का आइसोलेशन वार्ड में उपचार चल रहा है। बुधवार को सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट वीरवार को पॉजिटिव आई है।
-डॉ. विमल जैन, ईएनटी विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, हिसार।
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चिकित्सकों के मुताबिक दोनों महिलाएं कोरोना से भी संक्रमित है। इन दोनों में व्हाइट फंगस का संक्रमण मिला है। इन दोनों संक्रमित महिलाओं को आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया गया है। महिलाओं को एंटीफंगल दवा देकर उपचार शुरू कर दिया गया है।
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दोनों महिलाएं हिसार जिले की रहने वाली हैं। दोनों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है। इन महिलाओं को शुगर की शिकायत भी है। संक्रमित महिलाएं पिछले 3-4 दिनों से जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल हैं। यहां आने पर 2 दिन बाद महिलाओं में व्हाइट फंगस संक्रमण के लक्षण सामने आए। जिसके बाद चिकित्सकों ने बुधवार को दोनों महिलाओं का सैंपल लिया। वीरवार को इन दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। चिकित्सकों के मुताबिक व्हाइट फंगस के संक्रमण का पता लगाने के लिए भी ब्लैक फंगस की तरह केओएच यानी फंगल कल्चर टेस्ट किया जाता है। ऐसी सुविधा जिला अस्पताल नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने बाहर की लैब से टेस्ट करवाए हैं।
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यह है कम खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है यह व्हाइट फंगस संक्रमण ब्लैक फंगस यानी म्यूकर्माइकोसिस की अपेक्षा कम खतरनाक होता है। यह म्यूकर्माइकोसिस नसों में जाकर खून में फैलता है। इसके बाद नसों को प्रभावित करता है। व्हाइट फंगस चमड़ी पर छाले बनकर उन पर सफेद परत बन जाती है। इसका असर केवल मुंह, जीभ या जबड़ों पर पड़ता है। जहां पर पहले मुंह में दर्द रहने लगता है। इसके बाद मुंह में छाले होने लगती हैं। धीरे-धीरे फिर उन पर सफेद परत या फफूंदी भी आने लगती है।
ये ध्यान रखें
- तरल पदार्थ का अधिक सेवन करें।
- मुंह में हर रोज गर्म पानी से गरारे करें और सफाई का ध्यान रखें।
- शुगर कंट्रोल रखें।
- खाने-पीने या चबाते समय दर्द हो तो चिकित्सक से जांच करवाएं।
संक्रमण होने के कारण
- शरीर में पानी की कमी होने या मुंह में गंदगी और रहने से भी हो सकता है।
- शुगर अधिक रहने से।
मरीजों का उपचार चल रहा है
व्हाइट फंगस संक्रमण के दो केस मिले हैं। दोनों महिलाएं जिले की रहने वाली हैं। संक्रमित महिलाओं का आइसोलेशन वार्ड में उपचार चल रहा है। बुधवार को सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट वीरवार को पॉजिटिव आई है।
-डॉ. विमल जैन, ईएनटी विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, हिसार।