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Hisar News: जनस्वास्थ्य विभाग की एक्सईएन के गांव में नहीं है दो माह से पानी की बूंद, खरीदकर पीने को मजबूर ग्रामीण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2025 11:26 PM IST
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There is no drop of water in the village of Public Health Department's XEN for two months, villagers are forced to buy and drink it.
बालसमंद। गांव किरतान में जनस्वास्थ्य विभाग हर घर तक जल पहुंचाने में इस दौर में भी कामयाब नहीं हुआ है। ग्रामीण पिछले लंबे समय से पेयजल की मांग कर रहे हैं। वहीं किरतान गांव जन स्वास्थ्य विभाग की अधीक्षक अभियंता कंचन वर्मा का मायका है। ग्रामीण विकास रेपसवाल ने बताया कि उनके घर में पिछले 2 महीने से पानी की एक बूंद भी नहीं आई है। सर्दियों के मौसम में भी पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। उनके घरों में पानी नहीं आने का कारण जनस्वास्थ्य विभाग के लापरवाह कर्मचारी हैं जो नहर आने पर भी टैंक में पानी नहीं डालते हैं। ग्रामीणों को टैंकरों से पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीण एक बार फिर से जलघर को ताला लगाने के लिए तैयार हैं।
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चेहतो का दो घंटे जल देने के आरोप
ग्रामीण राजेश बुगालिया ने विभाग के अफसरों पर अपने चहेते घरों में पानी की स्पेशल लाइन डालने के आरोप लगाए हैं, जिनमें 2 घंटे पानी सप्लाई की जाती है, बाकी का पूरा गांव पानी की किल्लत झेल रहा है और कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है।
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जलघर को ताला लगा प्रदर्शन की चेतावनी
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष कई बार ताला लगा प्रदर्शन कर पेयजल की मांग की। अधिकारी बार-बार ग्रामीणों को झूठा आश्वासन देते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि अगर जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पहले की तरह जलघर को ताला लगाया जाएगा।
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28 करोड़ के प्रोजेक्ट पर भी उठने लगे हैं सवाल
किरतान समेत 6 गांवों में पानी की किल्लत दूर करने के लिए विभाग ने सीसवाला रेस्ट हाउस के पास नहर पर 28 करोड़ की लागत से पंप हाउस बनाया है। इस पंप हाउस से किरतान, बासड़ा, बालसमंद, बुड़ाक गांवों के जलघर में पानी डालने की योजना थी। करोड़ों खर्च के बाद भी ये प्रोजेक्ट एक किलोमीटर दूर बसे गांव की प्यास भी नहीं बुझा पाया।


पूर्व एक्सईएन बोले-प्रोजेक्ट में कमियां
पंप हाउस चालू होने के बाद भी इन गांवों के टैंक नहीं भरने की बात खुद विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं। विभाग के पूर्व कार्यकारी अभियंता संजीव त्यागी के अनुसार इस प्रोजेक्ट के डिजाइन में गड़बड़ी हुई है। टैंकों की क्षमता और नहर में पानी की उपलब्धता की सही से गणना नहीं की गई, जिस वजह से मोटर और लाइन कम क्षमता की डाल दी गई है।

सरकारी खर्च की ऑडिट की मांग
ग्रामीणों ने गांव में बीते 15 साल में पानी की समस्या दूर करने के लिए विभाग द्वारा किए गए सरकारी खर्चे की ऑडिट करवाने की मांग की है।
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