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Hisar News: महंगाई का तड़का...मिर्च-मसालों के तीखे तेवरों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, ईंधन और रसोई गैस की दोहरी मार

Tue, 26 May 2026 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Tue, 26 May 2026 11:39 PM IST
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The spike of inflation... Spicy spikes of chillies and spices spoil kitchen budget, double whammy of fuel and cooking gas
हिसार। बढ़ती महंगाई ने सफर ही नहीं रसोई का बजट भी बिगाड़ दिया है। नमक, मिर्च, मसाले, तेल और रिफाइंड सहित तमाम खाद्य पदार्थों के दाम महज एक सप्ताह के भीतर तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई पर पड़ा है जिससे महिलाओं के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल हो गया है। स्थिर आमदनी के बीच आसमान छूते खर्चों ने मध्यम वर्ग को आर्थिक बोझ के दलदल में धकेल दिया है।
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पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने न केवल परिवहन बल्कि हर छोटे-बड़े कारोबार को प्रभावित किया है। इसके साथ ही एलपीजी (रसोई गैस) और खाद्य पदार्थों के महंगे होने से साधारण व मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा आहत हैं। सरसों तेल, घी, रिफाइंड और डिब्बाबंद नमकीन के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से अब खुदरा व्यापार भी गड़बड़ाने लगा है।
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व्यापार पर पड़ा सीधा असर
थोक विक्रेताओं से लेकर छोटे दुकानदारों तक महंगाई की मार हर तरफ देखी जा रही है। किराना स्टोर संचालकों का कहना है कि सामान महंगा होने से बिक्री में भारी गिरावट आई है। कंपनियों द्वारा पैकेट की कीमतें बढ़ाने या उनकी मात्रा घटाने के कारण अक्सर ग्राहकों और दुकानदारों के बीच बहस की स्थिति बन जाती है। छोटे दुकानदारों का धंधा मुख्य रूप से मध्यम वर्ग पर निर्भर करता है क्योंकि साधन-संपन्न लोग मॉल या ऑनलाइन शॉपिंग का रुख करते हैं। ऐसे में छोटे व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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जनता की आवाज
अब दुकान पर रसोई का सामान लेने जाएं तो हर वस्तु के दाम बढ़े मिलते हैं। घर से जो बजट बनाकर चलते हैं। दुकान पर बिल उससे कहीं ज्यादा का बनता है। ऐसे में मजबूरी में सामान कम करवाना पड़ता है। तेल, रिफाइंड, चीनी और चावल के दाम बहुत बढ़ गए हैं। सरकार को इस पर लगाम लगानी चाहिए। - सीमा शर्मा, गृहिणी।
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पिछले पंद्रह सालों से लगातार महंगाई बढ़ रही है लेकिन इस एक सप्ताह में आई तेजी ने संयुक्त परिवारों का जीना मुश्किल कर दिया है। कमाई का जरिया और सैलरी वही है लेकिन रसोई का खर्च दोगुना हो गया है। अब हर सामान बहुत सोच-समझकर खर्च करना पड़ रहा है। - पूनम मनचंदा, गृहिणी।
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इस दौर में बच्चों को पढ़ा पाना पहले ही मुश्किल हो रहा था क्योंकि स्कूल-कॉलेज की फीस लगातार बढ़ रही है। अब रही-सही कसर रसोई के खर्चों ने पूरी कर दी। मध्यम वर्ग पर चौतरफा मार पड़ रही है लेकिन सरकार इस पर चर्चा करने को भी तैयार नहीं दिखती। - उषा ठकराल, गृहिणी।
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नमक, मिर्च, दाल और चीनी जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। मिर्च-मसालों के रेट बढ़ने से रसोई में तड़का लगाना भी मुश्किल हो गया है। आने वाले समय में स्थितियां और खराब होने की आशंका है जिससे आम जनता बेहद परेशान है। - सुनीता जनावा, गृहिणी।
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सेल घटी, ग्राहकों से होती है बहस
तेल, रिफाइंड, चाय पत्ती और मसालों के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर भार पड़ा है जिससे हमारी सेल घट गई है। नमकीन जैसी चीजों के रेट बढ़ रहे हैं और वजन घट रहा है। ग्राहक कंपनियों के बजाय हमसे उलझते हैं जिसका हमारे पास कोई जवाब नहीं होता। - कालूराम, संचालक किराना स्टोर, डाबड़ा चौक।

छोटे दुकानदारों का धंधा चौपट
हमारा मुख्य ग्राहक मध्यम वर्ग है जिसका बजट सीमित होता है। खाद्य पदार्थों के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो छोटे दुकानदारों का धंधा पूरी तरह चौपट हो जाएगा। मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए इस महंगाई पर तुरंत नियंत्रण पाना जरूरी है। - दीपक, संचालक, किराना स्टोर, डाबड़ा चौक।
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एक सप्ताह में खाद्य पदार्थ के दाम का ब्योरा

खाद्य पदार्थ - पहले---अब
सरसों तेल--- 160 -- 170

रिफांड -- 135-- 150
देशी घी मधु -- 520 --- 560

देशी घी अमूल -- 590 --- 630
लाल मिर्च - 320 -- 400

हल्दी ------- 280 --- 320
बिस्कुट --- 35-- 40

ब्रेड -- 55--- 60
नमक ------- 22--- 25
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