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Hisar News: क्रांतिकारियों के खून से रंगी सड़क के नाम पर पड़ा लाल सड़क
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हांसी की लाल सड़क की यादगार दीवार
हांसी। शहर में ऐतिहासिक किले के पास बनी लाल सड़क हमें क्रांतिकारियों की याद दिलाती है। अंग्रेजों ने वर्ष 1857 में दमनकारी नीति अपनाते हुए स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लेने क्रांतिकारियों को गिरड़ी से कुचल दिया था। इससे सड़क खून से लाल हो गई। इसी के नाम पर पर सड़क का नाम पड़ा लाल सड़ृक। गर्व कीजिए हांसी में हैं में आज हम शहर की लाल सड़क की बात करेंगे।
हांसी। अंग्रेजी हुकूमत ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले क्रांतिकारियों पर काफी जुल्म ढहाए। प्रदेश में जब भी वर्ष 1857 की क्रांति को याद किया जाता है तो उसके साथ हांसी की इस लाल सड़क को भी याद किया जाता है। यह लाल सड़क 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उन क्रांतिकारियों के खून से लाल हुई, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था।
क्रांतिकारियों की याद में वर्ष 1992 में लाल सड़क पर एक शहीद स्मारक भी बनाया गया था। इस सड़क को अभी लाल रंग में बनाया गया है। करीब ढाई वर्ष पहले शहीदों की यादगार में यहां पर लाल सड़क की यादगार दीवार भी बनाई गई।
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सैनिक छावनी भी थी हांसी में
अंग्रेजों ने हांसी में आकर सैनिक छावनी भी बनाई थी। इसके अलावा स्कीनर हॉर्स रेजिमेंट भी बनाई थी। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सैनिकों व हांसी के निवासियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया था। हांसी के क्रांतिकारियों ने दिनदहाड़े हिसार में डिप्टी कलेक्टर बेडर्नबर्न की कोर्ट रूम में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद ही अंग्रेजों ने हांसी व आसपास के क्षेत्रों के लोगों पर जुल्म ढाए थे।
आजादी की कूर्बानी का निशान है लाल सड़क। यहां पर दी गई कुर्बानियों के बारे में हमारे बुजुर्ग बताते रहे हैं। ये सड़क उन कुर्बानियों का सबूत जिन्होंने देश की आजादी के लिए जान दी। वहां अब शहीद स्मारक है। जिसके जरिये हम उन शहीदों को सलामी देते हैं जिन्हें हम भूल चुके हैं।- फतेह सिंह गुर्जर, इतिहासकार।
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हांसी। अंग्रेजी हुकूमत ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले क्रांतिकारियों पर काफी जुल्म ढहाए। प्रदेश में जब भी वर्ष 1857 की क्रांति को याद किया जाता है तो उसके साथ हांसी की इस लाल सड़क को भी याद किया जाता है। यह लाल सड़क 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उन क्रांतिकारियों के खून से लाल हुई, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था।
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क्रांतिकारियों की याद में वर्ष 1992 में लाल सड़क पर एक शहीद स्मारक भी बनाया गया था। इस सड़क को अभी लाल रंग में बनाया गया है। करीब ढाई वर्ष पहले शहीदों की यादगार में यहां पर लाल सड़क की यादगार दीवार भी बनाई गई।
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सैनिक छावनी भी थी हांसी में
अंग्रेजों ने हांसी में आकर सैनिक छावनी भी बनाई थी। इसके अलावा स्कीनर हॉर्स रेजिमेंट भी बनाई थी। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सैनिकों व हांसी के निवासियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया था। हांसी के क्रांतिकारियों ने दिनदहाड़े हिसार में डिप्टी कलेक्टर बेडर्नबर्न की कोर्ट रूम में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद ही अंग्रेजों ने हांसी व आसपास के क्षेत्रों के लोगों पर जुल्म ढाए थे।
आजादी की कूर्बानी का निशान है लाल सड़क। यहां पर दी गई कुर्बानियों के बारे में हमारे बुजुर्ग बताते रहे हैं। ये सड़क उन कुर्बानियों का सबूत जिन्होंने देश की आजादी के लिए जान दी। वहां अब शहीद स्मारक है। जिसके जरिये हम उन शहीदों को सलामी देते हैं जिन्हें हम भूल चुके हैं।- फतेह सिंह गुर्जर, इतिहासकार।