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सेवानिवृत्त एसडीओ की मौत की वजह का अभी तक पता नहीं लगा पाई पुलिस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Nov 2021 12:09 AM IST
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The police could not yet ascertain the cause of death of the retired SDO
सेवानिवृत्त एसडीओ की मौत की वजह का अभी तक पता नहीं लगा पाई पुलिस
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मृतक एसडीओ के बेटे ने महिला सफाई कर्मी पर जताया था शक
गली-सड़ी अवस्था में 27 अक्तूबर को उसके घर में बरामद हुआ था प्यारेलाल का शव
हिसार। न्यू ऋषि नगर में अपने घर में गली-सड़ी अवस्था से बरामद प्यारेलाल की मौत के कारणों का पुलिस पांच दिन बाद भी पता नहीं लगा पाई है। मामले में पुलिस उसके बेटे रविंद्र के बयान पर इत्तफाकिया कार्रवाई कर चुकी है, लेकिन रविंद्र ने उसके पिता के घर पर सफाई करने वाली महिला पर शक जताया था। रविंद्र ने शक जताया था कि वारदात के पीछे उस महिला का हाथ है। हालांकि पुलिस का भी कहना था कि महिला से पूछताछ की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि टेलिफोन विभाग से एसडीओ पद से सेवानिवृत्त न्यू ऋषि नगर निवासी करीब 75 वर्षीय प्यारेलाल का शव 27 अक्तूबर की शाम को उनके मकान में गली-सड़ी अवस्था में बरामद हुआ था। शव देखने से 10-12 दिन पुराना लग रहा था। शव में कीड़े पड़ चुके थे। बस अड्डा चौकी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टामर्टम के लिए नागरिक अस्पताल के शवगृह में भिजवाया था। जहां से चिकित्सकों ने वीरवार को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया था। वहां चिकित्सकों के बोर्ड ने उसका पोस्टमार्टम किया था।
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बेटों से प्रॉपर्टी का था विवाद
मृतक प्यारेलाल के बेटे रविंद्र का आरोप था कि इस वारदात को अंजाम उसके पिता के घर में काम करने वाली महिला सफाई कर्मी ने दिया है। आरोप था कि उसने किसी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया है। उल्लेखनीय है कि जानकारी मिली थी कि प्यारेलाल का अपने दोनों बेटे रविंद्र व सतविंद्र से प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। एक बेटा ऋषि नगर में व दूसरा देवी मंदिर के पास रहता है। प्यारेलाल की पत्नी की कई वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। प्यारेलाल अपने घर पर अकेले ही रहते थे। रविंद्र का कहना है कि उनके पिता महिला सफाईकर्मी के दबाव में रहते थे। हालांकि रविंद्र ने इसका कारण नहीं बताया। रविंद्र का आरोप था कि उस महिला के चलते ही उनके पिता ने उन्हें अलग किया। वह उस महिला की ही बात मानते थे।
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दरवाजे अंदर से बंद तो सीढ़ियों का दरवाजा खुला था
रविंद्र ने बताया था कि शाम करीब चार बजे वह उसके पिता के पड़ोसियों से सूचना पाकर मौके पर पहुंचा तो मकान का दरवाजा अंदर से बंद पाया। पास में ही सीढ़ियों का दरवाजा देखा तो वह खुला हुआ था। उसने बताया कि उसके पिता के पास हर वक्त 50-60 हजार रुपये रहते थे। रविंद्र को शक था कि रुपयों के चलते उसके पिता के साथ ये घटना घटी।
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