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Hisar News: ब्लू बर्ड झील लबालब पर नौकाएं उदास.. ठेका नहीं होने से छाई वीरानगी, अभी दो से तीन फीट भरा है पानी
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ब्लू बर्ड झील का दृश्य।
हिसार। पर्यटकों व बच्चों के लिए नौका विहार का शानदार ठिकाना ब्लू बर्ड झील बारिश के दौर में लबालब है। दूर-दूर तक फैले पानी को देखकर बोटिंग का मन करेगा, लेकिन अभी आप जाएंगे तो वीरानगी नजर आएगी। पर्यटन विभाग के अधीन इस झील के प्रवेश द्वार पर ताला लटका है और पानी में उदास सी खड़ी नावें मानों पर्यटकों का इंतजार कर रही हैं। झील में अभी दो से तीन फीट तक पानी भरा है, हालांकि इसमें छह फीट तक जलभराव की क्षमता है।
सिरसा-दिल्ली बाईपास पर स्थित झील वर्ष 1995 में बनाई गई थी। यह जिले की एकमात्र झील है। इसका परिसर करीब 52 एकड़ में फैला है, जिसमें से करीब 18 एकड़ में झील, पेट्रोल पंप, पर्यटक आवास गृह और जंगल क्षेत्र शामिल है। सर्दियों में यहां कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी आते हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि अभी इस झील में मछली पालन और बोटिंग का ठेका आवंटित नहीं किया गया है, इस वजह से किसी भी तरह की आवाजाही बंद है। ठेका देने के बाद यहां रौनक नजर आएगी। इस मानसून में ज्यादा अच्छी बारिश नहीं हुई है। अच्छी बारिश होने पर झील में छह फीट तक पानी भर जाता है।
मछली पालन का देते हैं ठेका
पर्यटन विभाग ठेकेदार को मछली पालन के साथ-साथ बोटिंग करवाने का ठेका देता है। ठेकेदार इसमें विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के बीज डालेगा। इन्हीं मछलियों को लोग नौका विहार के दौरान दाना डालते हैं। दाना भी ठेकेदार के यहां से मिलता है। झील के बीच टापूनुमा जगह पर कुछ झोपड़ियां और बैठने की जगह भी हैं, जहां लोग सुकून के पल बिता सकते हैं। झील में नौकायन के लिए मोटरबोट और पैडलबोट उपलब्ध हैं। इनका किराया 75 से 100 रुपये तक प्रति व्यक्ति तय है।
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गर्मियों में सूख जाता है पानी
झील में मानसून सीजन में पानी भर जाता है, लेकिन गर्मियों में सूख जाता है। कई बार तो पानी इतना कम हो जाता है कि मछलियां मर जाती हैं। झील में पानी कम होने पर भरवाने का जिम्मा भी ठेकेदार के पास रहता है। स्थानीय निवासी रमेश चंद्र, मोहन कुमार, विनोद आदि ने बताया कि झील में नहरी पानी की आपूर्ति नियमित होनी चाहिए ताकि पानी सूखे नहीं।
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झील में नौकायन और मछली पालन का ठेका पूरा हो चुका है। अभी नया टेंडर जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। नए ठेकेदार के माध्यम से ही झील में सुधार कार्य किया जाएगा।
- सुरेंद्र सिंह, प्रबंधक, पर्यटन विभाग, हिसार।
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सिरसा-दिल्ली बाईपास पर स्थित झील वर्ष 1995 में बनाई गई थी। यह जिले की एकमात्र झील है। इसका परिसर करीब 52 एकड़ में फैला है, जिसमें से करीब 18 एकड़ में झील, पेट्रोल पंप, पर्यटक आवास गृह और जंगल क्षेत्र शामिल है। सर्दियों में यहां कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी आते हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि अभी इस झील में मछली पालन और बोटिंग का ठेका आवंटित नहीं किया गया है, इस वजह से किसी भी तरह की आवाजाही बंद है। ठेका देने के बाद यहां रौनक नजर आएगी। इस मानसून में ज्यादा अच्छी बारिश नहीं हुई है। अच्छी बारिश होने पर झील में छह फीट तक पानी भर जाता है।
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मछली पालन का देते हैं ठेका
पर्यटन विभाग ठेकेदार को मछली पालन के साथ-साथ बोटिंग करवाने का ठेका देता है। ठेकेदार इसमें विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के बीज डालेगा। इन्हीं मछलियों को लोग नौका विहार के दौरान दाना डालते हैं। दाना भी ठेकेदार के यहां से मिलता है। झील के बीच टापूनुमा जगह पर कुछ झोपड़ियां और बैठने की जगह भी हैं, जहां लोग सुकून के पल बिता सकते हैं। झील में नौकायन के लिए मोटरबोट और पैडलबोट उपलब्ध हैं। इनका किराया 75 से 100 रुपये तक प्रति व्यक्ति तय है।
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गर्मियों में सूख जाता है पानी
झील में मानसून सीजन में पानी भर जाता है, लेकिन गर्मियों में सूख जाता है। कई बार तो पानी इतना कम हो जाता है कि मछलियां मर जाती हैं। झील में पानी कम होने पर भरवाने का जिम्मा भी ठेकेदार के पास रहता है। स्थानीय निवासी रमेश चंद्र, मोहन कुमार, विनोद आदि ने बताया कि झील में नहरी पानी की आपूर्ति नियमित होनी चाहिए ताकि पानी सूखे नहीं।
झील में नौकायन और मछली पालन का ठेका पूरा हो चुका है। अभी नया टेंडर जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। नए ठेकेदार के माध्यम से ही झील में सुधार कार्य किया जाएगा।
- सुरेंद्र सिंह, प्रबंधक, पर्यटन विभाग, हिसार।