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Hisar News: दिवाली पर पालतू पशुओं का रखें विशेष ध्यान
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हिसार। दिवाली पर लोग जहां आतिशबाजी कर खुशियां मनाते हैं, वहीं पटाखों की तेज आवाज और धुआं पालतू पशुओं के लिए डर और घबराहट का कारण बन जाता है। कई बार यह डर इतना बढ़ जाता है कि पशु खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश में हमलावर भी हो जाते हैं।
लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिवाली के दौरान अत्यधिक शोर और धुआं वाले पटाखे पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। तेज आवाज से उनमें बेचैनी, भूख न लगना, घबराहट और भागने जैसी प्रवृत्तियां उत्पन्न हो जाती हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि पारंपरिक पटाखों की जगह ग्रीन क्रैकर्स का इस्तेमाल करें, क्योंकि इनमें 30 से 40 प्रतिशत तक कम धुआं और आवाज होती है। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि पालतू जानवरों की भी सुरक्षा बनी रहेगी।
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लुवास के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नीलेश सिंधु ने कहा कि दिवाली का वास्तविक अर्थ है प्रकाश, न कि प्रदूषण। उन्होंने कहा कि हमें यह पर्व इस तरह मनाना चाहिए जिससे न केवल मनुष्य बल्कि पशु और पर्यावरण भी सुरक्षित रहें। प्रदूषण-मुक्त दिवाली मनाकर हम एक संवेदनशील समाज का उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
दिवाली की रात पालतू पशुओं को घर के अंदर शांत और सुरक्षित स्थान पर रखें।
दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें ताकि बाहर के शोर का असर कम हो।
पटाखों का धुआं और शोर पालतू जानवरों के लिए घातक हो सकता है।
पटाखों के अवशेष हटा दें ताकि जानवर गलती से न निगल लें।
जरूरत पड़ने पर केवल पशुचिकित्सक की सलाह पर ही दवा दें।
पालतू जानवरों को मिठाई या तले खाद्य पदार्थ न खिलाएं, केवल नियमित आहार दें।
बाहर घुमाते समय कॉलर बांधकर रखें ताकि डरने पर भागने या हमला करने से बचा जा सके।
घायल जानवर दिखें तो निकटतम पशु सेवा संगठन या पशुचिकित्सक से संपर्क करें और प्राथमिक उपचार करें।
लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिवाली के दौरान अत्यधिक शोर और धुआं वाले पटाखे पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। तेज आवाज से उनमें बेचैनी, भूख न लगना, घबराहट और भागने जैसी प्रवृत्तियां उत्पन्न हो जाती हैं।
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विशेषज्ञों ने कहा कि पारंपरिक पटाखों की जगह ग्रीन क्रैकर्स का इस्तेमाल करें, क्योंकि इनमें 30 से 40 प्रतिशत तक कम धुआं और आवाज होती है। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि पालतू जानवरों की भी सुरक्षा बनी रहेगी।
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लुवास के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नीलेश सिंधु ने कहा कि दिवाली का वास्तविक अर्थ है प्रकाश, न कि प्रदूषण। उन्होंने कहा कि हमें यह पर्व इस तरह मनाना चाहिए जिससे न केवल मनुष्य बल्कि पशु और पर्यावरण भी सुरक्षित रहें। प्रदूषण-मुक्त दिवाली मनाकर हम एक संवेदनशील समाज का उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
दिवाली की रात पालतू पशुओं को घर के अंदर शांत और सुरक्षित स्थान पर रखें।
दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें ताकि बाहर के शोर का असर कम हो।
पटाखों का धुआं और शोर पालतू जानवरों के लिए घातक हो सकता है।
पटाखों के अवशेष हटा दें ताकि जानवर गलती से न निगल लें।
जरूरत पड़ने पर केवल पशुचिकित्सक की सलाह पर ही दवा दें।
पालतू जानवरों को मिठाई या तले खाद्य पदार्थ न खिलाएं, केवल नियमित आहार दें।
बाहर घुमाते समय कॉलर बांधकर रखें ताकि डरने पर भागने या हमला करने से बचा जा सके।
घायल जानवर दिखें तो निकटतम पशु सेवा संगठन या पशुचिकित्सक से संपर्क करें और प्राथमिक उपचार करें।