फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Special report on Haryana day

लंबा सफर, लंबी शान, पांच दशक में हर क्षेत्र में बनाई अपनी अलग पहचान

Fri, 01 Nov 2019 07:28 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 01 Nov 2019 07:28 AM IST
विज्ञापन
Special report on Haryana day
73 - फिरोजशाह तुगलक महल। - फोटो : Hisar
हरियाणा के अस्तित्व में आने से लेकर अब तक हिसार को पैदा हुए पांच दशक से अधिक समय बीत चुका है। इस लंबे सफर में हिसार की आज शान भी लंबी है, जिसके लिए हिसार जिला वासियों ने हर क्षेत्र में खूब पसीना बहाया है। यही कारण है कि पांच दशक में हिसार ने लगभग हर क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। चाहे वह खेल का क्षेत्र हो, उच्च पदों पर नौकरी का, राजनीति का, उद्योग का, कृषि का या अन्य क्षेत्र, सभी में हिसार के युवाओं ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। हिसार-ए फिरोजा के नाम से जाना जाने वाला हिसार अपने अंदर पूरा इतिहास समेटे हुए है। हिसार की स्थापना सन 1354 ई. में तुगलक वंश के शासक फिरोज शाह तुगलक ने की थी।
विज्ञापन

यह तीसरी सदी ई.पू. में मौर्य राजवंश का, 13वीं सदी में तुगलक वंश का, 6वीं सदी में मुगल साम्राज्य का भाग था। मुस्लिम विजय के पूर्व हिसार का अर्ध बलुआ भाग चौहान राजपूतों का अपयान स्थान था। 18वीं शताब्दी के अंत में भट्टी और भटियाला लोगों ने इसे अधिकृत किया था। 1803 ई. में यह ब्रिटिश अधिकार में आ गया, किंतु 1810 ई. तक इनका शासन लागू न हो सका। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद निरापद रूप से हिसार ब्रिटिश अधिकार में आ गया। भारत की स्वतंत्रता के बाद यह पंजाब प्रांत का भाग बना दिया गया, किंतु 1966 में पंजाब के विभाजन के बाद यह हरियाणा का भाग बन गया।
विज्ञापन

इतिहासकारों के अनुसार इसुकार नाम
पाणिनि ने उनके ग्रंथ अष्टाध्यायी में इसुकार नाम के स्थान का उल्लेख किया है, जिसे इतिहासकारों द्वारा हिसार का प्राचीन नाम माना गया है। 1354 ई. में जब फिरोज शाह तुगलक ने हिसार की स्थापना की तो उन्होंने इसका नाम हिसार-ए-फिरोजा रखा जिसका, अरबी भाषा में अर्थ होता है फिरोज का किला। हालांकि अकबर के काल में इसके नाम से फिरोज हट गया तथा इसे सिर्फ हिसार के नाम से जाना जाने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस्पात के नाम से पहचान
भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित हरियाणा के हिसार जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह भारत की राजधानी नई दिल्ली के 164 किमी पश्चिम में राष्ट्रीय राजमार्ग-10 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग-65 पर पड़ता है। यह भारत का सबसे बड़ा जस्ती लोहा उत्पादक है, इसीलिए इसे इस्पात का शहर के नाम से भी जाना जाता है। पश्चिमी यमुना नहर पर स्थित हिसार राजकीय पशु फार्म के लिए विशेष विख्यात है। यमुना नहर हिसार जिला से होकर जाती है। जलवायु शुष्क है। कपास पर आधारित उद्योग हैं। भिवानी, हिसार, हांसी तथा सिरसा मुख्य व्यापारिक केंद्र हैं। अच्छी नस्ल के सांड़ों के लिए हिसार विख्यात है। घग्गर एवं दृषद्वती नदियां एक समय हिसार से गुजरती थीं। हिसार में महाद्वीपीय जलवायु देखने को मिलती है, जिसमें ग्रीष्म ऋतु में बहुत गर्मी होती है तथा शीत ऋतु में बहुत ठंड होती है। यहां हरियाणवी के अलावा हिंदी एवं अंग्रेजी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाएं हैं। 1960 के दशक में हिसार की प्रति व्यक्ति आय भारत में सर्वाधिक थी।
एक दुर्ग के रूप में हुई थी स्थापना
तुगलक वंश के शासक बादशाह फिरोज शाह तुगलक ने एक दुर्ग के रूप में हिसार की स्थापना की थी। यह शहर बाद में एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। तुगलक के समय में यहां मुख्य द्वार नागोरी गेट, तलाकी गेट, मोरी गेट व दिल्ली गेट बनाए गए थे। उन्होंने इस शहर को महलों, मस्जिदों, बगीचों, नहरों और अन्य इमारतों से सजाया था। 1783 ई. के दुर्भिक्ष में हिसार पूर्णत: जनहीन हो गया था, किंतु आयरलैंड के साहसी अभियानकर्ता जार्ज थामस ने एक दुर्ग बनवाकर इसे पुन: बसाया। 1867 ई. में हिसार की नगरपालिका का अध्ययन किया गया। हिसार में फिरोज शाह के किले व महल के अवशेषों के साथ कई प्राचीन मस्जिदें हैं, जिनमें जहाज भी एक है, जो अब एक जैन मंदिर है। प्राचीन समय में यह हड़प्पा सभ्यता का मुख्य केंद्र था। प्राचीन समय में यहां कई आदिवासी जातियां रहती थीं। इन जातियों में भरत, पुरु, मुजावत्स और महावृष प्रमुख थीं।
गेहूं व कपास हैं प्रमुख फसलें
गेहूं व कपास यहां की प्रमुख फसलें हैं। अन्य फसलों में चना, बाजरा, चावल, सरसों व गन्ना शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की फसलों का उत्पादन किया जाता है। मुख्य रूप से हिसार में फसलों का उत्पादन एक अच्छे स्तर पर किया जाता है। गेहूं का हिसार जिले में रिकॉर्ड उत्पादन होता है।
उद्योग और व्यापार
उद्योगों में कपास की ओटाई, हथकरघा बुनाई और कृषि यंत्रों व सिलाई मशीनोें के निर्माण से जुड़े उद्योग शामिल हैं। यहां पर कपास, अनाज और तेल के बीजों का बड़ा बाजार है। इस बाजार के लिए यह बहुत प्रसिद्ध है। 55-60 साल पूर्व छोटे-बड़े मिलाकर 125 कारखाने थे। इनमें रुई-बिनौला अलग करने, आयल मिल, दाल मिल, चीनी मिल, गोंद व गुड़ के कारखाने प्रमुख रहे। मौजूदा समय में स्टील की जिंदल इंडस्ट्री, हिसार मेटल, डीसीएम, धागा मिल आदि में इजाफा हुआ है।
यातायात और परिवहन
हिसार शहर एक प्रमुख रेल व सड़क जंक्शन है। यहां बना रेलवे स्टेशन लगभग 1860 में ब्रिटिश इंडिया कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था। यहां माल ढोने के लिए रेलवे लाइन बिछाई गई थी, जो बठिंडा से कोलकाता तक ले जाया जाता था। आज इस स्टेशन से लगभग प्रत्येक स्थान के लिए रेलगाड़ियां चलती हैं। इसके अलावा बस सुविधा उपलब्ध है और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरू हो चुका है। इसके प्रथम चरण में चंडीगढ़ के लिए फ्लाइट शुरू हुई। दूसरे चरण का काम जारी है, जिसके पूरा होते ही अन्य स्थानों के लिए फ्लाइट उड़ेंगी।
तीन विश्वविद्यालय और दो राष्ट्रीय संस्थान हैं
जिले में तीन विश्वविद्यालय और दो राष्ट्रीय संस्थान हैं। इनमें गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, लाला लाजपत राय पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अलावा संस्थानों में राष्ट्रीय अश्व शोध केंद्र और केंद्रीय भैंस शोध संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा राजकीय कॉलेज 11 व प्राइवेट कॉलेज 15 हैं। 26 कॉलेज और 849 सरकारी स्कूल और 450 प्राइवेट स्कूल हैं। 11 सरकारी आईटीआई, 10 बीएड कॉलेज, सात इंजीनियरिंग कॉलेज, गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक संस्थान दो, चार-चार नर्सिंग कॉलेज और फार्मेसी कॉलेज हैं। इनके अलावा अग्रोहा में अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भी है।
पर्यटन में आधुनिकता के साथ ऐतिहासिकता का मिश्रण
हिसार एक सुंदर स्थान तथा पर्यटन का आकर्षक स्थल है। पर्यटक यहां पर कई ख़ूबसूरत स्थलों की सैर कर सकते हैं। यहां पर सम्राट अशोक के काल का एक स्तंभ, कुषाण वंश के सिक्के व अन्य अवशेष भी मिले हैं। कुल मिलाकर हिसार बहुत ख़ूबसूरत है और पर्यटक यहां पर अनेक ख़ूबसूरत स्थान देख सकते हैं। पर्यटक स्थलों की सैर के बाद यहां पर अनेक ऐतिहासिक इमारतों की यात्रा की जा सकती है, जिनमें फिरोजशाह तुगलक महल आदि शामिल हैं।
राजनीति में दिग्गज हिसार से
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल आदमपुर से थे। वे तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। अरविंद केजरीवाल सिवानी हलके के निवासी हैं। वे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। सिवानी पहले हिसार का हिस्सा था, लेकिन आजकल भिवानी जिले में है। वर्तमान में कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा हिसार से हैं।
खेलकूद में अंतरराष्ट्रीय पहचान
साइना नेहवाल - भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वर्तमान में वह दुनिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं तथा इस मुकाम तक पहुंचने वाली वे प्रथम भारतीय महिला हैं। साथ ही एक महीने में तीसरी बार प्रथम वरीयता पाने वाली भी वो अकेली महिला खिलाड़ी हैं।
गीतिका जाखड़ - गीतिका जाखड़ एक भारतीय महिला पहलवान हैं। इन्होंने 2014 में ग्लासगो कामनवेल्थ गेम्स में 63 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।
ललिता सहरावत - एक भारतीय महिला पहलवान हैं। 2014 में ग्लासगो कामनवेल्थ गेम्स में 53 किलोग्राम भार वर्ग कुश्ती में भारत की पहलवान ललिता सहरावत ने सिल्वर मेडल जीता।
एकता भ्याण - जकार्ता में वर्ष 2018 में आयोजित तीसरे एशियन पैरा गेम्स में एथलेटिक्स मुकाबले में एकता भ्याण ने गोल्ड मेडल हासिल किया था। छोटी से दिक्कत आने पर भी हम अक्सर परिस्थितियों के सामने घुटने टेक देते हैं, मगर इरादे मजबूत हों तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। इसका जीता जागता उदाहरण हैं हिसार के अर्बन एस्टेट की एकता भ्याण।
अनीता कुंडू - तीन बार माउंट एवरेस्ट को फतह कर चुकी हैं। जिले की बेटी अनीता कुंडू ने तीसरी बार एवरेस्ट की चोटी को फतह कर वहां तिरंगा फहराया है।
शिवांगी पाठक - शहर की बेटी शिवांगी पाठक ने 16 साल की उम्र में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर हरियाणा का नाम रोशन किया है। सबसे छोटी उम्र में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली शिवांगी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है।
कृष्णा पूनिया - राष्ट्रमंडल खेल 2010 की स्वर्ण पदक विजेता चक्का फेंक खिलाड़ी कृष्णा पूनिया वर्तमान में राजस्थान के सादुलपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। यह अग्रोहा की रहने वाली हैं।
उद्योगपति...
नवीन जिंदल - भारत के राजनेता, उद्योगपति एवं पूर्व सांसद हैं। वे कुरुक्षेत्र से 14वीं और 15वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए थे। वे जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के अध्यक्ष हैं।
अशोक मंगालीवाला - अस्पाम फाउंडेशन के चेयरमैन हैं। कई देशों में कच्चे तेल का कारोबार है।
सुभाष चंद्रा - कंस्ट्रक्शन में बड़े व्यवसायी हैं और कई मीडिया हाउस हैं।
साहित्य...
विष्णु प्रभाकर : विष्णु प्रभाकर हिंदी के सुप्रसिद्ध लेखक थे। उन्होंने अनेक लघु कथाएं, उपन्यास, नाटक तथा यात्रा संस्मरण लिखे। उनकी कृतियों में देशप्रेम, राष्ट्रवाद, तथा सामाजिक विकास मुख्य भाव हैं।
ऐतिहासिकता के मिले सुराग
हिसार जिले में अग्रोहा, राखीगढ़ी, (बनावाली, कुनाल और भिरड़ाना अब फतेहाबाद जिले में) नामक स्थलों की खुदाई के दौरान पहली बार मानव सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जिनके अध्ययन से प्री हड़प्पन सेटलमेंट और प्रागैतिहासिक काल के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है। हिसार किले में स्थापित सम्राट अशोक के शासनकाल के समय का स्तंभ (234 एडी) वास्तव में अग्रोहा से लाकर यहां स्थापित किया गया था।

स्वतंत्रता संग्राम में विशेष योगदान
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में हिसार-हांसी निवासियों विशेषकर ग्रामीणों का योगदान अविस्मरणीय है। हिसार भारत का ऐसा पहला नगर है जहां देशभक्तों ने दिनदहाड़े भरी कचहरी में यहां के डिप्टी क्लेक्टर बेडर्नबर्न को कोर्ट रूम में गोली मारकर हत्या करने के साथ जनक्रांति का बिगुल बजा दिया था। यहां के ग्रामीणों ने अपने परंपरागत हथियारों जैली, बर्छी, भाला, तलवार, कुल्हाड़ी व गंडासी आदि से ब्रिटिश सैनिकों के विरुद्ध लड़ाइयां लड़ीं। 19 अगस्त 1857 के दिन हिसार किले में नागोरी गेट की लड़ाई में यहां के मंगाली, रोहनात, पुट्ठी मंगल खां, जमालपुर, हाजमपुर, बलियाली, भाटला आदि गांवों के सैकड़ों देशभक्त शहीद हुए और 260 वीर घायल हुए, यह एक बेमिसाल शहादत की घटना है। जो बच गए, उन्हें उन्हीं के गांवों में पेड़ों पर फांसी पर लटका दिया गया। सैकड़ों लोगों को काले पानी की सजा देकर अंडमान-निकोबार भेज दिया गया। यहां तक की हांसी की एक सड़क शहीदों के खून से लाल हो गई और आज भी लाल सड़क के नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं अंग्रेजी सेना ने तोपों के साथ पुट्ठी मंगल खां व गांव रोहनात पर हमला किया व तोपें लगाकर गांव को उड़ा दिया, जिसमें सैकड़ों क्रांतिकारी ग्रामीण शहीद हुए। जहां पंजाब केसरी लाला लाजपत राय ने सन् 1886 से 1892 तक हिसार को अपनी कर्मभूमि बनाया, वहीं स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश की महान विभूतियों जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंडित मदन मोहन मालवीय तथा सरोजनी नायडू ने इस ऐतिहासिक नगर में आकर अनेक जनसभाओं को संबोधित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed