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Hisar News: महाशिवरात्रि पर भक्तों पर बरसेगी शिव की कृपा
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हिसार। महाशिवरात्रि शुक्रवार को है। मंदिरों में सुबह चार बजे से जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। श्रद्धालु व्रत रख भगवान शिव की पूजा करेंगे। शहर के कई मंदिरों में कांवड़ भी चढ़ाई जाएगी। मंदिराें में कीर्तन से लेकर भंडारे का आयोजन होगा। भक्तों पर भगवान शिव की कृपा बरसेगी। वहीं महाशिवरात्रि को लेकर मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। मंदिर प्रबंधकों की ओर से तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सीसवाला और किरमारा के शिव मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ जुटेगी।
श्री बाबा प्रयागगिरी शिवालय मंदिर 200 साल पुराना
पड़ाव चौक स्थित श्री बाबा प्रयागगिरी शिवालय मंदिर 200 साल पुराना बताया जा रहा है। जहां मंदिर में शिवलिंग विराजमान है। बताया जाता है कि शिवलिंग के नीचे गुफा होती थी। इसमे संत तपस्या करते थे। धीरे-धीरे मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई। मंदिर में शिवरात्रि पर ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। पड़ाव चौक स्थित बाबा प्रयागगिरी शिवालय ट्रस्ट के प्रबंधक ओमप्रकाश असीजा ने बताया कि 8 मार्च को मंदिर में मेला लगेगा। 9 मार्च को मंदिर में ब्राहमणों को भोजन कराया जाएगा।
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महाशिवरात्रि पर वैसे तो किसी भी समय जलाभिषेक कर सकते हैं। मगर इसमें रूद्राभिषेक करने का काफी महत्व है। महाशिवरात्रि पर कावड़ भी चढ़ाई जाती है। - पंडित देव शर्मा, कैलाश पंचांग के निर्माता
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श्री बाबा प्रयागगिरी शिवालय मंदिर 200 साल पुराना
पड़ाव चौक स्थित श्री बाबा प्रयागगिरी शिवालय मंदिर 200 साल पुराना बताया जा रहा है। जहां मंदिर में शिवलिंग विराजमान है। बताया जाता है कि शिवलिंग के नीचे गुफा होती थी। इसमे संत तपस्या करते थे। धीरे-धीरे मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई। मंदिर में शिवरात्रि पर ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। पड़ाव चौक स्थित बाबा प्रयागगिरी शिवालय ट्रस्ट के प्रबंधक ओमप्रकाश असीजा ने बताया कि 8 मार्च को मंदिर में मेला लगेगा। 9 मार्च को मंदिर में ब्राहमणों को भोजन कराया जाएगा।
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महाशिवरात्रि पर वैसे तो किसी भी समय जलाभिषेक कर सकते हैं। मगर इसमें रूद्राभिषेक करने का काफी महत्व है। महाशिवरात्रि पर कावड़ भी चढ़ाई जाती है। - पंडित देव शर्मा, कैलाश पंचांग के निर्माता