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Hisar News: सात पुलिसकर्मियों ने किया आत्मसमर्पण, चार के खिलाफ वारंट जारी
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हिसार। करीब नौ साल पुराने मामले में शुक्रवार को हिसार सीआईए के पुलिस कर्मचारियों समेत सात आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ प्रबंधक रमनजीत सिंह के अपहरण और उन्हें अफीम तस्करी के मामले में फंसाने के आरोपों से जुड़ा है। इस मामले में अगली सुनवाई 3 अक्तूबर को होगी।
न्यायिक दंडाधिकारी आयुष की अदालत में सीआईए के तत्कालीन एसआई विरेंद्र सिंह, एएसआई धर्मबीर सिंह, सत्यवान व जयवीर, कांस्टेबल संदीप, मॉडल टाउन निवासी चेतन और ईएचसी सुनील ने सरेंडर कर जमानत याचिका दायर की। अदालत ने सभी को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। इंस्पेक्टर कप्तान सिंह, एसआई भूप सिंह, आशीष और वीर सेन अदालत में पेश नहीं हुए। इनके खिलाफ अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। मामला सुनाम निवासी रमनजीत सिंह की ओर से वर्ष 2018 में दायर इस्तगासे से संबंधित है। शिकायत के अनुसार, 16 दिसंबर 2017 को रेड स्क्वेयर मार्केट में उनकी कार की टक्कर एएसआई विरेंद्र सिंह के पुत्र आशीष उर्फ आशु की कार से हुई थी। आरोप है कि रमनजीत सिंह ने माफी मांगते हुए मरम्मत खर्च देने की पेशकश की लेकिन इसके बाद उन्हें फोन पर धमकियां दी गईं। 18 दिसंबर को करीब 3.35 लाख रुपये लेकर कार खरीदने जाते समय जीत धर्मकांटे के पास आशीष, उसके पिता विरेंद्र सिंह और अन्य लोगों ने उनकी कार रोक ली। आरोप है कि कार को ईंटों से क्षतिग्रस्त करने के बाद उनके साथ मारपीट की गई और जबरन दूसरी गाड़ी में बैठाकर सीआईए थाने ले जाया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने रास्ते में अधिवक्ता विरेंद्र मांझु को फोन कर घटना की जानकारी दी तथा पुलिस कंट्रोल रूम में वीटी भी करवाई।
वर्ष 2022 में बरी हो गए थे बैंक मैनेजर
रमनजीत ने आरोप लगाया कि सीआईए थाने में कपड़े उतरवाकर उनसे मारपीट की गई और 90 हजार रुपये छीन लिए । इंस्पेक्टर कप्तान सिंह से छोड़ने की गुहार लगाने पर वीटी करवाने का मजा चखाने की बात कही। बाद में उनके खिलाफ कार से अफीम बरामदगी की प्राथमिकी दर्ज कर ली। रमनजीत सिंह को इस मामले में 8 जनवरी 2018 को जमानत मिली और वर्ष 2022 में बरी हो गए। इसके बाद उन्होंने सीआईए पुलिसकर्मियों समेत अन्य के खिलाफ अदालत में शिकायत दायर की।
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न्यायिक दंडाधिकारी आयुष की अदालत में सीआईए के तत्कालीन एसआई विरेंद्र सिंह, एएसआई धर्मबीर सिंह, सत्यवान व जयवीर, कांस्टेबल संदीप, मॉडल टाउन निवासी चेतन और ईएचसी सुनील ने सरेंडर कर जमानत याचिका दायर की। अदालत ने सभी को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। इंस्पेक्टर कप्तान सिंह, एसआई भूप सिंह, आशीष और वीर सेन अदालत में पेश नहीं हुए। इनके खिलाफ अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। मामला सुनाम निवासी रमनजीत सिंह की ओर से वर्ष 2018 में दायर इस्तगासे से संबंधित है। शिकायत के अनुसार, 16 दिसंबर 2017 को रेड स्क्वेयर मार्केट में उनकी कार की टक्कर एएसआई विरेंद्र सिंह के पुत्र आशीष उर्फ आशु की कार से हुई थी। आरोप है कि रमनजीत सिंह ने माफी मांगते हुए मरम्मत खर्च देने की पेशकश की लेकिन इसके बाद उन्हें फोन पर धमकियां दी गईं। 18 दिसंबर को करीब 3.35 लाख रुपये लेकर कार खरीदने जाते समय जीत धर्मकांटे के पास आशीष, उसके पिता विरेंद्र सिंह और अन्य लोगों ने उनकी कार रोक ली। आरोप है कि कार को ईंटों से क्षतिग्रस्त करने के बाद उनके साथ मारपीट की गई और जबरन दूसरी गाड़ी में बैठाकर सीआईए थाने ले जाया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने रास्ते में अधिवक्ता विरेंद्र मांझु को फोन कर घटना की जानकारी दी तथा पुलिस कंट्रोल रूम में वीटी भी करवाई।
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वर्ष 2022 में बरी हो गए थे बैंक मैनेजर
रमनजीत ने आरोप लगाया कि सीआईए थाने में कपड़े उतरवाकर उनसे मारपीट की गई और 90 हजार रुपये छीन लिए । इंस्पेक्टर कप्तान सिंह से छोड़ने की गुहार लगाने पर वीटी करवाने का मजा चखाने की बात कही। बाद में उनके खिलाफ कार से अफीम बरामदगी की प्राथमिकी दर्ज कर ली। रमनजीत सिंह को इस मामले में 8 जनवरी 2018 को जमानत मिली और वर्ष 2022 में बरी हो गए। इसके बाद उन्होंने सीआईए पुलिसकर्मियों समेत अन्य के खिलाफ अदालत में शिकायत दायर की।
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