{"_id":"3534be4304b236825628dd2658c6b03b","slug":"second-day-of-geeta-jayanti-festival-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा संस्कारवान बनाने को पाठ्यक्रम में शामिल की गीता : कंबोज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा संस्कारवान बनाने को पाठ्यक्रम में शामिल की गीता : कंबोज
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
Updated Sun, 20 Dec 2015 11:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुराना गवर्नमेंट कॉलेज मैदान में चल रहे गीता जयंती महोत्सव के दूसरे दिन सेमिनार में गीता के महत्व पर प्रकाश डाला गया। सरकार की ओर से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के राज्य मंत्री कर्णदेव कंबोज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
विज्ञापन
बैंडबाजे के साथ उनका स्वागत किया गया। जिसके बाद राज्य मंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई स्टॉलों का अवलोकन किया। मुख्य अतिथि की उपस्थिति में कई संस्कृत विद्वानों ने विचार प्रस्तुत करते हुए गीता के संदेश को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।
विज्ञापन
वहीं राज्यमंत्री कंबोज ने कहा कि अक्सर अंतिम पलों से गुजर रहे व्यक्ति को गीता सुनाई जाती है, मगर इसे मरने से पहले नहीं बल्कि बहुत जल्दी ही जीवन में धारण कर लेना चाहिए।
विज्ञापन
गीता ही हमें संस्कारवान बनाती है। हम कर्तव्यों से विमुख होकर अधिकारों की तरफ अधिक ध्यान देते हैं। गीता हमें नि:स्वार्थ भाव से अपने कर्म को करते रहने का संदेश देती है। हमने शिक्षा के क्षेत्र में तो बहुत उन्नति कर ली, मगर संस्कारों को भूलते चले जा रहे हैं। शिक्षा को संस्कारवान बनाने के लिए ही सरकार ने गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।
शिक्षा का भगवाकरण नहीं किया
राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज ने कहा कि जब सरकार ने गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया तो कुछ लोगों ने शिक्षा के भगवाकरण करने का हो-हल्ला मचाना शुरू कर दिया। अगर अच्छे संस्कार मिलते हों, तो गीता को पाठ्यक्रम में क्या नहीं लागू करना चाहिए।
गीता एक महान ग्रंथ है, जिसमें सभी ग्रंथों एवं शास्त्रों की शिक्षाओं का निचोड़ है अथवा सार है। गीता हमें सिखाती है कि हमें जीवन में कैसी जीवन शैली अपनानी चाहिए अथवा कर्म करना चाहिए। यदि पूरी मानव जाति गीता सार के हर पहलू को अपने जीवन शैली के साथ जोड़कर जिए तो पूरे विश्व में शांति-अमन एवं भाईचारा बढ़ेगा।
पढ़े-लिखे लोग उग्रवाद के पीछे
राज्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में संस्कारों की कमी के कारण ही पढ़े-लिखे लोग उग्रवाद के पीछे लगे हुए हैं। इसीलिए सरकार ने फैसला लिया है कि स्कूली स्तर से ही विद्यार्थियों को गीता का संदेश दिया जाए, ताकि उनमें संस्कारों की कोई कमी न रहे। जिस तरह संसार मेें उग्रवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं, उसे सुसंस्कारित शिक्षा से ही रोका जा सकता है।
श्रीमद्भागवत गीता विश्व की सबसे सुंदर एवं महान ज्ञान की दार्शनिक कृति है और इसके अध्ययन से हमारी आने वाली युवा पीढ़ी सुसंस्कारित होने के साथ अच्छे नागरिक भी बनेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाएंगे गीता जयंती
मंत्री ने कहा कि पहले सिर्फ कुरुक्षेत्र में ही गीता जयंती समारोह होता था। मगर इस बार सरकार ने हर जिला स्तर पर यह समारोह मनाने का फैसला लिया।
कंबोज ने कहा कि उनकी मुख्यमंत्री से बात हुई है, अगले साल इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का फैसला लेंगे। जिससे योग की तरह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गीता का महत्व लोगों को पता चल सके।
इन्होंने भी रखे अपने विचार
इससे पहले डॉ. मुकेश कुमार, इंद्र देव शास्त्री, मिथिलेश कुमार, मुरलीधर पांडे, संतोष शास्त्री व ब्रह्मकुमारी बहन अनीता ने भी अपने विचार रखे।
अधिकतर वक्ताओं ने गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने के फैसला को सही ठहराया। सभी वक्ताओं को मुख्य अतिथि की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। डीसी चंद्रशेखर खरे ने राज्यमंत्री को स्मृतिचिन्ह, जबकि एडीसी विजय कुमार ने शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
इस मौके पर सीटीएम सरजीत सिंह नैन, एसडीएम अशोक बंसल, डीईओ मधु मितल, रेडक्रॉस के डीटीओ सुरेंद्र श्योराण, बीजेपी नेता सीमा गैबीपुर, कृष्णलाल रिणवा, सुजीत कुमार, रवि सैनी, कर्ण सिंह राणोलिया, मंदीप मलिक, योगेश सिहाग, नरेश नैन, देशराज कंबोज, तारा सिंह, धर्मपाल तंवर, सुभाष खुंडिया, लाल बहादुर खोवाल सहित अनेक लोग उपस्थित थे।
आज यह होगा कार्यक्रम
दोपहर 2 बजे - पुराना गवर्नमेंट कॉलेज मैदान से पालकी एवं शोभायात्रा
शाम 6 बजे - जीजेयू के ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक संध्या व पुरस्कार वितरण
मुख्य अतिथि - डॉ. कमल गुप्ता, मुख्य संसदीय सचिव