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Hisar News: सचिन अमर रहे...शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा सैलाब, मां बोलीं-अमर हो गया मेरा लाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Apr 2025 12:03 AM IST
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Sachin Amar Rahe... Huge crowd gathered in the last journey of the martyr, mother said- my son has become immortal
​भिवानी रोहिल्ला गांव में सैन्य सम्मान के साथ हुआ शहीद सचिन का अंतिम संस्कार।  
बालसमंद/हिसार। असम में शहीद हुए वायुसेना के जवान सचिन रोहिल (25) का वीरवार दोपहर पैतृक गांव भिवानी रोहिल्ला में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे भाई सागर ने उन्हें मुखाग्नि दी। इससे पहले, सुबह 10 बजे शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो उमड़ी भीड़ ने सचिन रोहिल अमर रहे और भारत माता की जय के जयकारे लगाए। इस दौरान स्कूलों के बच्चे हाथों में तिरंगा लिए खड़े थे। नलवा विधायक रणधीर पनिहार भी अंतिम संस्कार में शामिल रहे।
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सचिन रोहिल भारतीय वायुसेना की 11 एयर विंग में असम के जिला तेजपुर में तैनात थे। वे 14 अप्रैल को असम के सोनितपुर जिले के भालुकपोंग में भराली नदी में एक नागरिक को बचाने के लिए कूदे थे। घटना की सूचना मिलने के बाद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया। 15 अप्रैल की सुबह आईटीबीपी की 59वीं बटालियन ने सचिन रोहिल का शव बरामद किया।
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फ्लाइट लेफ्टिनेंट अनुभूति भारद्वाज, तहसीलदार अनिल बिढान ने शहीद सचिन रोहिल को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा में तेजपुर असम के वारंट अधिकारी मुकनाराम चौधरी, वायुसेना के जूनियर वारंट अधिकारी सतीश कुमार, हरियाणा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर नसीब खान, जिला सैनिक बोर्ड के सूबेदार सोमबीर, संतलाल, कर्ण सिंह ढाका, एच चौधरी, सरपंच बलजीत रोहिल, शमीम शर्मा, नीलम प्रभा, भारत भूषण शर्मा आदि शामिल रहे।
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भिवानी रोहिल्ला के बलिदानी बेटे सचिन रोहिल की अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स की आंखें नम थीं। पहली बार श्मशान गृह में पुरुषों के साथ भारी संख्या में महिलाएं भी पहुंचीं। इससे पहले शव घर लाया तब अपने लाल का चेहरा देखकर मां कमलेश फफक पड़ी। रुंधे गले से कहा, मेरा बेटा शहीद होने के साथ अमर हो गया। ग्रामीणों ने शोक स्वरूप दुकानें बंद रखीं।
सागर ने कहा, भाई सचिन की शहादत पर पीढ़ियों तक को गर्व रहेगा। ऐसा भाई सबको मिले। पार्थिव शरीर के साथ पहुंचे वायु सेना के जवानों ने बलिदानी सचिन को बिगुल बजाकर सलामी दी और पांच राउंड फायरिंग कर सैन्य सम्मान दिया। तेज धूप के बावजूद घंटों तक लोग बलिदानी की अंतिम यात्रा में डटे रहे।



आठ साल पहले पिता को खोया, 2020 में वायुसेना में हुए भर्ती
सचिन रोहिल का जन्म 23 मार्च 2002 को हुआ था। वे 2020 में वायुसेना में भर्ती हुए थे। करीब आठ साल पहले सड़क दुर्घटना में उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी मां कमलेश गृहिणी हैं और छोटा भाई सागर प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनके दादा, चाचा और परिवार के अन्य सदस्य गांव भिवानी रोहिल्ला में ही रहते हैं। सचिन का परिवार 20 साल पहले जींद आकर बस गया था। सचिन अविवाहित थे।

सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद आईटीबीपी ने दी सूचना
आईटीबीपी को सचिन रोहिल के डूबने की खबर मिली तो उन्होंने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सहायक कमांडेंट (जीडी) गंभीर सिंह चौहान के नेतृत्व में 59 बीएन आईटीबीपी टीम रस्सी के सहारे नदी में उतरी और सचिन के शव को बरामद किया। सर्च अभियान पूरा होने के बाद आईटीबीपी ने एक्स पर दुखद घटना की जानकारी पोस्ट की।

जवान के बलिदान होने पर मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

सीएम नायब सिंह सैनी ने एक्स पर लिखा, असम की भराली नदी में डूब रहे एक नागरिक को बचाने के प्रयास में वीरगति को प्राप्त हुए गांव भिवानी रोहिल्ला (हिसार) के लाल सचिन रोहिल की वीरता पर हमें गर्व है। दुख की इस घड़ी में शहीद के परिवार के साथ हमारी पूरी संवेदना एवं सहानुभूति है। भारतीय वायुसेना में कार्यरत जवान की शहादत को मैं नमन करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें।
शादी के लिए देख रहे थे लड़की
सचिन के चचेरे भाई अजय ने बताया कि घटना के कुछ घंटे पहले ही सचिन की फोन पर घर वालों से बात हुई थी। उसने अगले महीने आने की बात कही थी। इसके एक रोज बाद ही ऐसी सूचना मिलेगी, इसका कतई अंदाजा नहीं था। सचिन की शादी की बात भी चल रही थी और परिवार के लोग लड़की देख रहे थे।

दादा बोले-दुख है पर गर्व भी है

सचिन के पिता के साथ उनके चाचा का भी देहांत हो चुका है। इसके बावजूद सचिन के दादा चतर सिंह ने हिम्मत नहीं खोई, लेकिन सचिन के निधन ने उन्हें झकझोर दिया। 80 वर्षीय चतर सिंह की आंखों में आंसू जरूर थे लेकिन पोते के बलिदान का गर्व भी था। वे श्मशान घाट पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, दुख है जो कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन पोते के बलिदान और उसके सम्मान में उमड़े लोगों की भावनाओं को देखकर गर्व भी है।
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