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दुष्कर्म पीड़िता को भेजा रोहतक, गर्भपात को लेकर आज होगा फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Sat, 27 Sep 2014 12:16 AM IST
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सामान्य अस्पताल में ही अपनी बेटी का गर्भपात करवाने को लेकर पीएमओ से गुहार लगा रहे पीड़िता के पिता को शुक्रवार को निराशा हाथ लगी। गांव से आई पंचायत से भी डॉक्टरों ने मिलने से भी इंकार कर दिया।
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डॉक्टरों ने सुबह से आई पंचायत व पीड़िता के माता-पिता को पीएमओ कार्यालय में बैठाए रखा और दोपहर करीब दो बजे के बाद डॉक्टरों के एक बोर्ड ने पीड़िता को रोहतक रेफर कर दिए जाने का फैसला ले लिया। सामान्य अस्पताल की एंबुलेंस में बैठाकर पीड़िता को रोहतक भेज दिया गया।
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शाम करीब पांच बजे पीड़ित किशोरी व उसके परिजन रोहतक पहुंचे। जिसके बाद रोहतक के डॉक्टरों के एक बेंच ने पीड़ित किशोरी की जांच करनी शुरू कर दी। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को पता चलेगा कि क्या डॉक्टर पीड़िता का गर्भपात करेंगे। वहीं पीड़ित किशोरी के वकील लालबहादुर खोवाल ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि रोहतक का डॉक्टरों का पैनल पीड़िता का गर्भपात करने का फैसला लेगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो पीड़िता के गर्भपात के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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यह दी डॉक्टरों ने दलील
कोर्ट के आदेश मिलने के बाद से ही सामान्य अस्पताल के डॉक्टर पीड़ित किशोरी के गर्भपात को लेकर आनाकानी कर रहे थे। पीड़ित किशोरी के परिजनों की कई बार की गई गुहार के बाद भी डॉक्टरों ने हिसार के सामन्य अस्पताल में गर्भपात करने का निर्णय नहीं लिया। शुक्रवार को पीड़िता को रोहतक रेफर करने के दौरान भी डॉक्टरों ने यही दलील दी कि गर्भ 20 सप्ताह का हो चुका है और यहां गर्भपात करना ठीक नहीं है। रोहतक में डॉक्टरों का एक बेंच बैठकर पीड़िता के हालात व रिपोर्ट की जांच करके फैसला लेगा। वहां पर हर सुविधा उपलब्ध है।
सीएमओ बोले- मुझे कुछ नहीं पता
सामान्य अस्पताल के सीएमओ राजपाल वर्मा से जब पीड़ित किशोरी के मामले में बात की गई तो उन्होंने बडे़ ही साफ शब्दों में कह दिया कि मुझे इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। मामले को अस्पताल प्रशासन की ओर से पीएमओ देख रहे है। इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं जानता और न ही कह सकता हूं।
पीएमओ ने जताई मजबूरी
पीएमओ डॉ. दयानंद से जब गर्भपात मामले में बात की गई तो उन्होंने बताया कि डॉक्टरों से बैठक करके इस मामले में विचार-विमर्श किया जाएगा। उसी के बाद कुछ कह सकते हैं। उन्होंने बताया कि पीड़िता के परिवार के अलावा किसी से कोई बात नहीं की जा रही है। गांव की पंचायत भी आई थी लेकिन उनसे बात करना ठीक नहीं था। क्योंकि पीड़िता के बारे में जितने लोगों को जानकारी होगी उतना ज्यादा उसके भविष्य पर प्रभाव पडे़गा।
वकील का आरोप, जबरदस्ती भेजा
पीड़िता के वकील लालबहादुर खोवाल ने कहा है कि पीड़िता के परिजनों ने उन्हें बताया कि वह पहले ही दिन से रोहतक नहीं जाना चाहते थे। इसी को लेकर शुक्रवार को गांव की पंचायत भी डॉक्टरों से मिलने आई थी। लेकिन डॉक्टरों ने उनकी भी नहीं सुनी। पीड़िता को रोहतक भेजने की बात पर परिजनों ने ले जाने से इंकार कर दिया था। परिजन उसे रोहतक नहीं ले जाना चाहते थे, लेकिन जबरदस्ती पीड़िता व उसके परिजनों को सरकारी एंबुलेंस में बैठाकर रोहतक भेज दिया गया।