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बदलाव के साथ और समृद्ध होती गई रागनी, किसानों का कम नहीं हुआ प्रेम : वीरपाल खरकिया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Feb 2023 11:35 PM IST
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Ragni became more prosperous with the change, the love of the farmers did not decrease: Veerpal Kharkia
वीरपाल खरकिया
संदीप रामायण
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हिसार। हमारी संस्कृति की खास पहचान रागनी समय के साथ और समृद्ध होती जा रही है। हिंदी या पंजाबी गीत रागनी में आते तो हैं, लेकिन भाव हमारे हरियाणवी ही होते हैं। कैसेट से लेकर यूट्यूब के जमाने तक भी किसानों का रागनी से प्रेम बना हुआ है। शहर में बैठा व्यक्ति भी रागनी उसी भाव से सुनता है, जितना खेत में काम कर रहा किसान सुनता है। ये बातें हरियाणवी लोक गायक वीरपाल सिंह खरकिया ने हिसार स्थित ट्रैक्टर ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित किसान मेले में अमर उजाला संवाददाता से बातचीत करते हुए कही।
उन्होंने बताया कि वह अपने बड़े भाई रागनी गायक राजेंद्र सिंह खरकिया को अपना गुरु मानकर वर्ष 1991 में पहली बार मंच पर चढ़े थे, इसके बाद वे निरंतर आगे बढ़ते चले गए। वीरपाल सिंह खरकिया ने अपनी कॅरिअर की पहली रागनी मैं के उजाड़ूं तेरे बाग नै 1991 में रोहतक खोखरा कोट में आयोजित मेहर सिंह के अखाड़े में प्रस्तुत की थी। वीरपाल खरकिया ने कहा कि रागनी का किसानों से वह नाता है जो भगत का भगवान से होता है। संवाद
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दूसरे राज्यों में भी सुनी जाती है रागनी
वीरपाल सिंह खरकिया ने बताया कि रागनी हरियाणवी लोक संगीत की बेहद ही रोचक विधा है। परंपरागत काल से लेकर आज विज्ञान के युग में भी हरियणवी रागनियों को बड़े चाव से सुना जाता है। हरियाणा ही नहीं बल्की राजस्थान, उत्तरप्रदेश व दिल्ली में हमारी रागनियों को काफी पसंद किया जाता है। खरकिया ने बताया कि हरियाणवी लोक गीत व लोक धुनों पर बॉलीवुड और कई पंजाबी हिट गाने बने हैं। वीरपाल सिंह खरकिया फिलहाल अपनी बड़े भाई राजेंद्र सिंह खरकिया की तरह ही पहचान बना चुके हैं।
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गरीब परिवारों की बेटियों की करते हैं मदद
वीरपाल सिंह खरकिया कई महिला गायिकाओं को अपना गुरुमंत्र देकर प्रसिद्ध कर चुके हैं। वीरपाल खरकिया आर्थिक रूप से कमजोर बेटियों पर विशेष ध्यान रहता है। रुपयों की कमी कारण कहीं बेटियों की पढ़ाई अधर में न रह जाए उसके लिए वीरपाल खुद स्कूल फीस और किताबों का खर्च उठाते हैं। वे समय-समय पर अपने पैतृक गांव खरक सहित प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की जरूरत का सामान देते रहे हैं।
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