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प्रॉपर्टी टैक्स के 29 बड़े बकायेदारों की आपत्ति के बाद अधिकारियों ने मौका निरीक्षण कर तैयार की रिपोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Aug 2022 12:33 AM IST
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Property tax: After objections from 29 big defaulters, officers inspect the spot and prepare a report
हिसार। प्रॉपर्टी टैक्स के 29 बड़े बकायेदारों की आपत्ति के बाद नगर निगम अधिकारियों ने मौका निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट में अधिकारियों ने आधी आपत्तियों को सही व आधी को गलत बताया है। अब जिन बकायेदारों की आपत्तियां ठीक मिली हैं, उनका टैक्स अपडेट किया जाएगा। वहीं बाकी बचे बकायेदारों से टैक्स लिया जाएगा। उधर, निगम प्रशासन सुनवाई में न पहुंचने वाले 51 बकायेदारों की प्रॉपर्टी सील करने की कार्रवाई कर सकता है।
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बता दें कि नगर निगम ने शहर के 100 बड़े बकायेदारों को नोटिस जारी किए गए थे। इस नोटिस के माध्यम से उनसे बकाया प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाने को कहा था। निगम प्रशासन की मानें तो इन बकायेदारों पर प्रॉपर्टी टैक्स के करीब 40 करोड़ रुपये बकाया है। इन नोटिस के माध्यम से इन्हें एक माह में बकाया टैक्स जमा करवाने या नोटिस का जवाब देने को कहा था। मगर इस समयावधि में सिर्फ दो बकायेदारों ने ही 42 लाख रुपये बकाया टैक्स के रूप में जमा करवाए, जबकि 18 अन्य ने अपना पक्ष रख दिया। इसके बाद निगम ने बाकी बचे 80 बकायेदारों को 8 अगस्त को निगम कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा था। इन कमेटियों के सामने 29 बकायेदारों ने प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखा था।
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100 डिफॉल्टरों में मंदिर, धर्मशाला व अस्पताल शामिल
निगम प्रशासन के अनुसार इन 100 डिफॉल्टरों में तीन मंदिर, पांच धर्मशालाएं, चार इंडस्ट्री, एक पेट्रोल पंप, एक कांप्लेक्स, एक अस्पताल, एक बैंक शामिल हैं। अधिकारियों की मानें तो वैसे मंदिर व धर्मशाला का प्रॉपर्टी टैक्स माफ होता है, लेकिन इनमें दुकानें भी हैं, जिनका व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल हो रहा है।
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मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती चार माह में 3 करोड़ रुपये आया टैक्स
मौजूदा वित्त वर्ष के चार माह पूरे हो चुके हैं और अभी तक निगम प्रशासन के पास प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में 3 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में निगम प्रशासन ने 22 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं पिछले वित्त वर्ष में निगम ने 24 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, जबकि 8.87 करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में जमा हुए थे। बता दें कि प्रॉपर्टी टैक्स नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत है।
निगम को प्रॉपर्टी सील करने का भी अधिकार
अब कोई प्रॉपर्टी टैक्स धारक टैक्स नहीं जमा करवाता है तो निगम प्रशासन उसकी प्रॉपर्टी को सील भी कर सकता है। हालांकि जब से यह नियम लागू हुआ है, तब से आज तक निगम प्रशासन ने कोई भी प्रॉपर्टी सील नहीं की है, जबकि निगम प्रशासन का करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया है।

जिन बकायेदारों ने आपत्ति उठाई थी, उनका मौका निरीक्षण किया गया है। इनमें कुछ की आपत्तियां ठीक मिली हैं, जिनमें ज्यादातर धर्मशालाएं हैं। जिनकी आपत्ति ठीक मिली हैं, उनका टैक्स दुरुस्त करके रिकॉर्ड अपडेट कर दिया जाएगा।
- डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगमायुक्त, नगर निगम
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