बेजुबानों की ली जान: छह साल में अवैध शिकार की भेंट चढ़े 69 वन्य जीव, 59 फीसदी नील गाय
वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग ने छह जिलों की रिपोर्ट तैयार कर सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया दिल्ली, वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो व सरकार को भेजी है। विभाग ने रात को पेट्रोलिंग बढ़ाई तो वन्य जीवों का शिकार कम हुआ।
विस्तार
छह साल में हरियाणा के हिसार सहित सिरसा, फतेहाबाद, जींद, भिवानी और चरखीदादरी में 69 वन्य जीवों का अवैध शिकार किया गया। इनमें सबसे ज्यादा 59 फीसदी यानि 41 नील गाय शामिल हैं। इसके अलावा 1 गीदड़, 10 खरगोश, 3 भूरा तीतर, 1 काली भूज, 1 बटेर, 1 चिंकारा हिरण, 2 सांप, 4 जंगली सूअर, 1 सांडा, 3 बंदर और 1 जंगली बिल्ली शिकार की भेंट चढ़ी। यदि इन छह जिलों की बात करें तो सबसे ज्यादा भिवानी में 24 वन्य जीवों का शिकार किया गया। वहीं चरखी दादरी और जींद में एक-एक नील गाय का शिकार हुआ।
वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार कर सेंट्रल जू ऑथोरिटी ऑफ इंडिया दिल्ली, वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो और हरियाणा सरकार को भेजी गई है। वर्ष 2021-22 में सबसे कम वन्य जीवों का शिकार हुआ है। इसका मुख्य कारण विभाग की ओर से पेट्रोलिंग बढ़ाना और लोगों को जागरूक करना रहा। इसके साथ ही मुखबरी नेटवर्क बढ़ाने से भी शिकार कम हुआ है। 2021-22 की बात करें तो सात वन्य जीवों का शिकार हुआ हैं। इनमें सांडा, नील गाय, भूरा तीतर और खरगोश शामिल हैं।
जानिए... किस साल कितने वन्य जीव बने शिकार
वर्ष 2016-17
- भिवानी 03
- सिरसा 01
- हिसार 02
- फतेहाबाद 03
- कुल 09
वर्ष 2017-18
- भिवानी 01
- सिरसा 02
- हिसार 02
- फतेहाबाद 05
- कुल 10
वर्ष 2018-19
- चरखी दादरी 01
- भिवानी 03
- सिरसा 02
- फतेहाबाद 04
- कुल 10
वर्ष 2019-20
- भिवानी 01
- सिरसा 05
- हिसार 02
- फतेहाबाद 03
- कुल 11
वर्ष 2020-21
- भिवानी 14
- हिसार 01
- फतेहाबाद 07
- कुल 22
वर्ष 2021-22
- भिवानी 02
- हिसार 01
- फतेहाबाद 03
- जींद 01
- कुल 07
शिकार करने पर दो साल की कैद
वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग के डिविजनल वाइल्ड लाइफ ऑफिसर वेदप्रकाश का कहना है कि इन वन्य जीवों को शेड्यूल-4 में रखा गया है। शिकार करने पर दो साल की सजा होती है। उन्होंने बताया कि जब भी विभाग की ओर से पेट्रोलिंग की जाती है तो वहां मौजूद लोगों को सतर्क कर दिया जाता है कि वह किसी भी जीव का शिकार न करे। यदि ऐसा कोई करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वन्य जीवों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर कैंप लगाए जाते हैं। पेट्रोलिंग बढ़ाने से शिकार पर काफी अंकुश लगा है। यदि वर्ष 2021-22 की बात करे तो सात ही वन्य जीवों का शिकार हुआ है। जबकि इससे पहले संख्या अधिक थी। इस साल अप्रैल के बाद की बात करें तो अभी तक एक भी शिकार का केस सामने नहीं आया है। - वेदप्रकाश, डिविजनल वाइल्ड लाइफ ऑफिसर, वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग