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Hisar News: सातरोड आरओबी की समय अवधि पूरी होने में 45 दिन शेष, नहीं मिली गर्डर रखने की मंजूरी
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हिसार। सातरोड के पास साउथ बाईपास पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की डेडलाइन पूरी होने में 45 दिन का समय शेष है, लेकिन अभी तक रेलवे से गर्डर रखने की मंजूरी नहीं मिली है। अगर जल्द ही मंजूरी नहीं मिलती है तो आरओबी की डेडलाइन तीसरी दफा बढ़ानी पड़ेगी।
बता दें कि इस आरओबी का शिलान्यास पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दिसंबर 2021 में किया था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा फरवरी 2024 निर्धारित की गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर जून 2024 कर दिया। इस समयावधि में भी काम पूरा नहीं हुआ तो नई डेडलाइन अक्तूबर 2024 दी गई। गर्डर रखने के लिए रेलवे से मंजूरी न मिलने के कारण काम पूरा नहीं हो सका। ऐसे में फरवरी 2025 तीसरी समय सीमा रखी गई है।
पिछले साल अगस्त में मांगी थी मंजूरी
बीएंडआर विभाग ने पिछले साल अगस्त में गर्डर की लॉन्चिंग ड्राइंग मंजूरी के लिए रेलवे को भेजी दी थी। इस दौरान रेलवे ने तीन बार आपत्तियां लगाकर ड्राइंग बीएंडआर को लौटा चुका है। यही नहीं बीएंडआर के अधिकारी खुद रेलवे मुख्यालय जाकर आपत्तियों को दूर करवा चुके हैं, लेकिन अभी तक रेलवे ने मंजूरी नहीं दी है।
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यह काम अभी बाकी
रेलवे ट्रैक के ऊपर वाले हिस्से पर 6 गार्डर रखने व स्लैब निर्माण किया जाना है। इस पूरे काम के लिए कम से कम एक माह का समय चाहिए। वहीं आरओबी पर सड़क का निर्माण करना अभी बाकी है। चूंकि अभी तापमान काफी कम है तो सड़क बनाने का काम शुरू नहीं होगा। यह काम भी 15 फरवरी के बाद ही किया जाएगा।
प्रोजेक्ट लेट होने के ये रहे कारण
आरओबी के पिलर के बीच में हाईटेंशन लाइन आ गई थी, जिसके लिए आरओबी के डिजाइन में भी बदलाव करना पड़ा था और इसे फिर से रेलवे से मंजूर करवाना पड़ा था। इस कार्य में काफी समय बर्बाद हुआ। इसके अलावा आरओबी के साथ बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की लाइन भी इसके बीच में आ गई थी, उसे भी शिफ्ट करने में थोड़ा समय लग गया।
31.10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा आरओबी
आरओबी के निर्माण पर 31.10 करोड़ रुपये लागत आएगी। इसकी कुल लंबाई 658 मीटर होगी। सड़क की चौड़ाई 11 मीटर होगी। इसके दोनों तरफ तीन-तीन मीटर की सर्विस रोड भी बनाई गई है। यह आरओबी दिल्ली रोड को पार करके सातरोड में जाकर खत्म होगा। दिल्ली रोड पर करीब 6 फुट की ऊंचाई पर एक चौराहा बनाया जाएगा। आरओबी के बनने साउथ बाईपास से प्रतिदिन गुजरने वाले 10,000 वाहन चालकों को फायदा होगा।
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बता दें कि इस आरओबी का शिलान्यास पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दिसंबर 2021 में किया था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा फरवरी 2024 निर्धारित की गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर जून 2024 कर दिया। इस समयावधि में भी काम पूरा नहीं हुआ तो नई डेडलाइन अक्तूबर 2024 दी गई। गर्डर रखने के लिए रेलवे से मंजूरी न मिलने के कारण काम पूरा नहीं हो सका। ऐसे में फरवरी 2025 तीसरी समय सीमा रखी गई है।
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पिछले साल अगस्त में मांगी थी मंजूरी
बीएंडआर विभाग ने पिछले साल अगस्त में गर्डर की लॉन्चिंग ड्राइंग मंजूरी के लिए रेलवे को भेजी दी थी। इस दौरान रेलवे ने तीन बार आपत्तियां लगाकर ड्राइंग बीएंडआर को लौटा चुका है। यही नहीं बीएंडआर के अधिकारी खुद रेलवे मुख्यालय जाकर आपत्तियों को दूर करवा चुके हैं, लेकिन अभी तक रेलवे ने मंजूरी नहीं दी है।
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यह काम अभी बाकी
रेलवे ट्रैक के ऊपर वाले हिस्से पर 6 गार्डर रखने व स्लैब निर्माण किया जाना है। इस पूरे काम के लिए कम से कम एक माह का समय चाहिए। वहीं आरओबी पर सड़क का निर्माण करना अभी बाकी है। चूंकि अभी तापमान काफी कम है तो सड़क बनाने का काम शुरू नहीं होगा। यह काम भी 15 फरवरी के बाद ही किया जाएगा।
प्रोजेक्ट लेट होने के ये रहे कारण
आरओबी के पिलर के बीच में हाईटेंशन लाइन आ गई थी, जिसके लिए आरओबी के डिजाइन में भी बदलाव करना पड़ा था और इसे फिर से रेलवे से मंजूर करवाना पड़ा था। इस कार्य में काफी समय बर्बाद हुआ। इसके अलावा आरओबी के साथ बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की लाइन भी इसके बीच में आ गई थी, उसे भी शिफ्ट करने में थोड़ा समय लग गया।
31.10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा आरओबी
आरओबी के निर्माण पर 31.10 करोड़ रुपये लागत आएगी। इसकी कुल लंबाई 658 मीटर होगी। सड़क की चौड़ाई 11 मीटर होगी। इसके दोनों तरफ तीन-तीन मीटर की सर्विस रोड भी बनाई गई है। यह आरओबी दिल्ली रोड को पार करके सातरोड में जाकर खत्म होगा। दिल्ली रोड पर करीब 6 फुट की ऊंचाई पर एक चौराहा बनाया जाएगा। आरओबी के बनने साउथ बाईपास से प्रतिदिन गुजरने वाले 10,000 वाहन चालकों को फायदा होगा।

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