{"_id":"60b149e18ebc3ed71b435af8","slug":"owner-death-due-to-corona-one-helper-for-3-child-and-grandmother-hisar-news-rtk6105004109","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना ने दिव्यांग दादी और तीन बच्चों का सहारा छीना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना ने दिव्यांग दादी और तीन बच्चों का सहारा छीना
विज्ञापन
जय कुमार
नारनौंद/हिसार। गांव गुराना के एक गरीब परिवार के लिए कोरोना महामारी ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। 54 वर्षीय दिव्यांग दादी सहित तीन मासूम बच्चों का सहारा ही छीन लिया। एकमात्र कमाने वाले राजेश सोनी की मौत के बाद दिव्यांग बिमला ही पौते-पोतियों का आखिरी सहारा है। दो साल पहले राजेश की पत्नी भी उसको व बच्चों को छोड़कर चली गई थी।
राजेश की मौत के बाद उसकी मां व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। ग्रामीण भी परिवार की इस हालत पर दुखी हैं। परिवार को किसी से प्रकार की प्रशासन व अन्य स्रोतों से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। राजेश अपने पीछे अपनी मां बिमला, 14 वर्षीय बेटी मुस्कान, 9 वर्षीय बेटा साहिल व 7 वर्षीय बेटा नितिन को छोड़ गया है। उसकी पत्नी भी दो साल पहले पति व बच्चों को छोड़कर मायके चली गई थी। राजेश की मौत के बाद भी वह मायके से नहीं लौटी।
पैसों के अभाव में नहीं हुआ इलाज
मृतक राजेश की मां बिमला ने रोते हुए बताया कि उसके बेटे ने घर पर ही उसकी गोद मे सिर रखकर अपनी जान दे दी। कोरोना के कारण सांस लेने में दिक्कत थी। सरकारी अस्पताल में उसको बेड नहीं मिला और प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। जिसके कारण उसके बेटे की घर पर ही मौत हो गई।
विज्ञापन
बचपन मे ही पिता की हो गई थी मौत
ग्रामीण अशोक कुमार बताते हैं कि राजेश सोनी के पिता की भी जब वह चार साल का था उस समय मौत हो गई थी। बिमला ने मेहनत मजदूरी कर अपने बेटों को पाला था। बड़ा बेटा रणबीर बाहर रहता है। बच्चों का फिलहाल कोई सहारा नहीं है।
मकान की हालत हो चुकी खस्ता
जिस मकान में राजेश सोनी की बुजुर्ग मां व तीनों बच्चे रह रहे हैं, उसकी हालत बहुत खस्ता है। आधे से ज्यादा मकान गिर चुका है। मकान की छत कच्ची है। जो आधे मकान की छत बची हुई है वह भी क्षतिग्रस्त है। परिवार मजबूरियों के चलते मौत के मुंह में रहने को मजबूर है।
सरकार का पक्ष
कोरोना में अनाथ हुए बच्चों की जानकारी देने के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर 1098 जारी किया है। जिस पर प्रशासन को आज तक कोई सूचना नहीं मिली। अमर उजाला ने अपनत्व अभियान के तहत हेल्पलाइन नंबर जारी किया तो पांच ऐसे परिवार सामने आ चुके हैं।
(संवाद)
हमारे पास कोई परिवार नहीं आया
हमने हेल्पलाइन नंबर जारी किया हुआ है। अभी तक ऐसा कोई परिवार हमारे सामने नहीं आया है। ऐसा कोई अनाथ बच्चा होगा तो उसे हम बाल भवन में बने केयर होम में रखेंगे। उसकी पढ़ाई, रहने का खर्च उठाएंगे। ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता के बारे में हमारे पास कोई योजना नहीं आई है।
- विनोद कुमार, जिला बाल कल्याण अधिकारी, हिसार।
विज्ञापन
नारनौंद/हिसार। गांव गुराना के एक गरीब परिवार के लिए कोरोना महामारी ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। 54 वर्षीय दिव्यांग दादी सहित तीन मासूम बच्चों का सहारा ही छीन लिया। एकमात्र कमाने वाले राजेश सोनी की मौत के बाद दिव्यांग बिमला ही पौते-पोतियों का आखिरी सहारा है। दो साल पहले राजेश की पत्नी भी उसको व बच्चों को छोड़कर चली गई थी।
राजेश की मौत के बाद उसकी मां व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। ग्रामीण भी परिवार की इस हालत पर दुखी हैं। परिवार को किसी से प्रकार की प्रशासन व अन्य स्रोतों से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। राजेश अपने पीछे अपनी मां बिमला, 14 वर्षीय बेटी मुस्कान, 9 वर्षीय बेटा साहिल व 7 वर्षीय बेटा नितिन को छोड़ गया है। उसकी पत्नी भी दो साल पहले पति व बच्चों को छोड़कर मायके चली गई थी। राजेश की मौत के बाद भी वह मायके से नहीं लौटी।
विज्ञापन
पैसों के अभाव में नहीं हुआ इलाज
मृतक राजेश की मां बिमला ने रोते हुए बताया कि उसके बेटे ने घर पर ही उसकी गोद मे सिर रखकर अपनी जान दे दी। कोरोना के कारण सांस लेने में दिक्कत थी। सरकारी अस्पताल में उसको बेड नहीं मिला और प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। जिसके कारण उसके बेटे की घर पर ही मौत हो गई।
विज्ञापन
बचपन मे ही पिता की हो गई थी मौत
ग्रामीण अशोक कुमार बताते हैं कि राजेश सोनी के पिता की भी जब वह चार साल का था उस समय मौत हो गई थी। बिमला ने मेहनत मजदूरी कर अपने बेटों को पाला था। बड़ा बेटा रणबीर बाहर रहता है। बच्चों का फिलहाल कोई सहारा नहीं है।
मकान की हालत हो चुकी खस्ता
जिस मकान में राजेश सोनी की बुजुर्ग मां व तीनों बच्चे रह रहे हैं, उसकी हालत बहुत खस्ता है। आधे से ज्यादा मकान गिर चुका है। मकान की छत कच्ची है। जो आधे मकान की छत बची हुई है वह भी क्षतिग्रस्त है। परिवार मजबूरियों के चलते मौत के मुंह में रहने को मजबूर है।
सरकार का पक्ष
कोरोना में अनाथ हुए बच्चों की जानकारी देने के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर 1098 जारी किया है। जिस पर प्रशासन को आज तक कोई सूचना नहीं मिली। अमर उजाला ने अपनत्व अभियान के तहत हेल्पलाइन नंबर जारी किया तो पांच ऐसे परिवार सामने आ चुके हैं।
(संवाद)
हमारे पास कोई परिवार नहीं आया
हमने हेल्पलाइन नंबर जारी किया हुआ है। अभी तक ऐसा कोई परिवार हमारे सामने नहीं आया है। ऐसा कोई अनाथ बच्चा होगा तो उसे हम बाल भवन में बने केयर होम में रखेंगे। उसकी पढ़ाई, रहने का खर्च उठाएंगे। ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता के बारे में हमारे पास कोई योजना नहीं आई है।
- विनोद कुमार, जिला बाल कल्याण अधिकारी, हिसार।