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Hisar News: संयुक्त आयुक्त ने घरों से कचरा उठा रही दोनों एजेंसियों की तरफ से लगाई गई आरएफ आईडी की जांच के दिए आदेश
Thu, 25 Apr 2024 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Thu, 25 Apr 2024 01:46 AM IST
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हिसार। नगर निगम के संयुक्त आयुक्त ने घरों से कचरा उठा रही दोनों एजेंसियों की तरफ से लगाई गई आरएफ आईडी की जांच करने के आदेश दिए हैं। दोनों एजेंसियों की तरफ से टेंडर की शर्तों के अनुसार आरएफ आईडी न लगाने को लेकर काफी शिकायतें मिल रही थीं।
निगम ने वार्ड 1 से 10 और 11 से 20 में घरों से कचरा एकत्रित करने का काम दो एजेंसियों को दिया हुआ है। टेंडर की शर्तों के अनुसार इन एजेंसियों को प्रत्येक 10 में से एक घर पर रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटीटी डिवाइस (आरएफ आईडी) टैग लगाने हैं। ये टैग प्रत्येक गली के एंट्री व एग्जिट प्वाइंट पर लगाने हैं। जब कोई कचरा उठाने वाले गाड़ी किसी गली में एंट्री करेगी तो उस आरएफ आईडी टैग को स्कैन करना होगा और गली से बाहर निकलते हुए एग्जिट प्वाइंट पर लगे टैग को स्कैन करना होगा, जिससे यह पता चल सके कि कचरा उठाने वाली गाड़ी उस गली में गई है।
टेंडर एग्रीमेंट होने के 60 दिन के अंदर 90 प्रतिशत टैग करने होंगे शुरू
टेंडर की शर्त के अनुसार एजेंसी को टेंडर एग्रीमेट के 60 दिन के अंदर 90 प्रतिशत टैग को शुरू करना होगा। यही नहीं प्रतिदिन कचरा उठाने के दौरान 90 प्रतिशत टैग को स्कैन भी करना होगा। निगम अधिकारियों के अनुसार वार्ड 1 से 10 में करीब 5,800 और वार्ड 11 से 20 में करीब 7,000 आरएफ आईडी टैग लगाने हैं।
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एजेंसी ने आरएफ आईडी नहीं लगाई है। प्रतिदिन एरिया से कचरे का उठान भी नहीं हो रहा है। टेंडर पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद सफाई व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। -सुरेंद्र शर्मा, प्रधान, आजाद नगर सुधार समिति।
एजेंसी सही ढंग से कार्य नहीं कर रही है। सेक्टर में आरएफ आईडी भी नहीं लगाई गई है। बिना आईडी के स्कैन हुए कैसे पता चलेगा कि गाड़ी किन क्षेत्रों में गई है। एजेंसी के कार्य की कोई निगरानी भी नहीं की जा रही है। -सतपाल ठाकुर, प्रधान, आरडब्ल्यूए, पीएलए।
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निगम ने वार्ड 1 से 10 और 11 से 20 में घरों से कचरा एकत्रित करने का काम दो एजेंसियों को दिया हुआ है। टेंडर की शर्तों के अनुसार इन एजेंसियों को प्रत्येक 10 में से एक घर पर रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटीटी डिवाइस (आरएफ आईडी) टैग लगाने हैं। ये टैग प्रत्येक गली के एंट्री व एग्जिट प्वाइंट पर लगाने हैं। जब कोई कचरा उठाने वाले गाड़ी किसी गली में एंट्री करेगी तो उस आरएफ आईडी टैग को स्कैन करना होगा और गली से बाहर निकलते हुए एग्जिट प्वाइंट पर लगे टैग को स्कैन करना होगा, जिससे यह पता चल सके कि कचरा उठाने वाली गाड़ी उस गली में गई है।
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टेंडर एग्रीमेंट होने के 60 दिन के अंदर 90 प्रतिशत टैग करने होंगे शुरू
टेंडर की शर्त के अनुसार एजेंसी को टेंडर एग्रीमेट के 60 दिन के अंदर 90 प्रतिशत टैग को शुरू करना होगा। यही नहीं प्रतिदिन कचरा उठाने के दौरान 90 प्रतिशत टैग को स्कैन भी करना होगा। निगम अधिकारियों के अनुसार वार्ड 1 से 10 में करीब 5,800 और वार्ड 11 से 20 में करीब 7,000 आरएफ आईडी टैग लगाने हैं।
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एजेंसी ने आरएफ आईडी नहीं लगाई है। प्रतिदिन एरिया से कचरे का उठान भी नहीं हो रहा है। टेंडर पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद सफाई व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। -सुरेंद्र शर्मा, प्रधान, आजाद नगर सुधार समिति।
एजेंसी सही ढंग से कार्य नहीं कर रही है। सेक्टर में आरएफ आईडी भी नहीं लगाई गई है। बिना आईडी के स्कैन हुए कैसे पता चलेगा कि गाड़ी किन क्षेत्रों में गई है। एजेंसी के कार्य की कोई निगरानी भी नहीं की जा रही है। -सतपाल ठाकुर, प्रधान, आरडब्ल्यूए, पीएलए।