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अब हो सकेगा 14 वर्षीय किशोरी का गर्भपात
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Wed, 08 Oct 2014 12:28 AM IST
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हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट ने मंगलवार को नाबालिग दुराचार पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने यह आदेश भी दिए हैं कि गर्भपात तभी किया जाए जब पीड़िता को इससे कोई खतरा न हो।
सोमवार को पीड़िता के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद मंगलवार को जस्टिस के कानन की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई।
सीएमओ को भेजे आदेश
सुनवाई के बारे में पीड़िता के वकील डॉ. लाल बहादुर खोवाल, विक्रम मित्तल और पीके चुघ ने बताया कि कोर्ट ने सामान्य अस्पताल के सीएमओ को यह आदेश दिया है कि पीड़िता के गर्भपात मामले में तुरंत प्रभाव से दो चिकित्सकों की टीम बनाई जाए।
यह टीम पीड़िता की सेहत की जांच करेगी कि क्या उसकी सेहत गर्भपात सहन करने लायक है या नहीं। अगर सेहत के अनुसार गर्भपात हो सकता है तो तुरंत पीड़िता का गर्भपात कर दिया जाए।
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इसके अलावा उसके भ्रूण को सुरक्षित किसी सरकारी लैब में रखा जाए और पुलिस प्रशासन को भी इसकी जानकारी दी जाए।
एसएचओ को करनी चाहिए कानूनी कार्रवाई
पीड़िता के वकील के अनुसार मामले की सुनवाई में जस्टिस कानन ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के परिवार वाले अपनी बेटी के लिए जो कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं वो कार्रवाई उस क्षेत्र के थाने के एसएचओ को करनी चाहिए थी।
इस संबंध में कोर्ट ने डीजीपी हरियाणा के माध्यम से इस आदेश की कॉपी भी सभी एसएचओ को भेजने को कहा है ताकि भविष्य में किसी पीड़िता को यह सहना न पड़े।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि हालांकि इस बारे में पहले भी डीजीपी को यह आदेश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने यह आदेश सभी एसएचओ को प्रेषित नहीं किए।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह मामला काफी अर्जेंट है। इस वजह से इसमें राज्य सरकार को भी कोई नोटिस नहीं दिया जा रहा है। हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई में कोर्ट ने यह आदेश सुनाया है।
गर्भपात एक्ट के कारण रुकी कार्रवाई
पीड़िता के वकील डॉ. लाल बहादुर खोवाल के मुताबिक दो सप्ताह पहले न्यायिक दंडाधिकारी प्रतीक जैन की अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि यदि परिजनों की इच्छा है, तो वे कानून के अनुसार पीड़िता का गर्भपात करा सकते हैं।
साथ ही पुलिस को यह हिदायत थी कि पुलिस भ्रूण को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रखे क्योंकि यह केस का अहम सबूत है।
उधर, इस फैसले के बाद पीड़िता के परिजन उसे लेकर सामान्य अस्पताल में गए तो चिकित्सकों ने गर्भपात एक्ट का हवाला देते हुए गर्भपात करने से इंकार कर दिया।
साथ ही पीड़िता को रोहतक रेफर कर दिया। इस बारे में सामान्य अस्पताल प्रशासन का कहना था कि एमटीपी एक्ट के अनुसार 20 सप्ताह से ज्यादा का भ्रूण होने पर गर्भपात नहीं किया जा सकता, जबकि पीड़िता उस समय 23 सप्ताह की गर्भवती है। इसके बाद परिजन पीड़िता को लेकर घर लौट आए थे।
यह है मामला
17 सितंबर को बरवाला क्षेत्र के एक गांव की 8वीं कक्षा की 14 वर्षीय छात्रा ने अपने पड़ोसी 55 वर्षीय निहाल सिंह पर दुराचार करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
पीड़ित छात्रा का आरोप था कि निहाल सिंह पिछले छह महीने से उसके साथ दुराचार कर रहा है। बरवाला पुलिस ने आरोपी निहाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
पीड़ित लड़की ने जब अपने परिजनों को पेट दर्द होने की शिकायत बताई, तो डाक्टरों द्वारा जांच में नाबालिग के गर्भवती होने का पता चला। उसके बाद कोर्ट से गर्भपात की अनुमति ली गई।
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सोमवार को पीड़िता के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद मंगलवार को जस्टिस के कानन की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई।
सीएमओ को भेजे आदेश
सुनवाई के बारे में पीड़िता के वकील डॉ. लाल बहादुर खोवाल, विक्रम मित्तल और पीके चुघ ने बताया कि कोर्ट ने सामान्य अस्पताल के सीएमओ को यह आदेश दिया है कि पीड़िता के गर्भपात मामले में तुरंत प्रभाव से दो चिकित्सकों की टीम बनाई जाए।
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यह टीम पीड़िता की सेहत की जांच करेगी कि क्या उसकी सेहत गर्भपात सहन करने लायक है या नहीं। अगर सेहत के अनुसार गर्भपात हो सकता है तो तुरंत पीड़िता का गर्भपात कर दिया जाए।
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इसके अलावा उसके भ्रूण को सुरक्षित किसी सरकारी लैब में रखा जाए और पुलिस प्रशासन को भी इसकी जानकारी दी जाए।
एसएचओ को करनी चाहिए कानूनी कार्रवाई
पीड़िता के वकील के अनुसार मामले की सुनवाई में जस्टिस कानन ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के परिवार वाले अपनी बेटी के लिए जो कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं वो कार्रवाई उस क्षेत्र के थाने के एसएचओ को करनी चाहिए थी।
इस संबंध में कोर्ट ने डीजीपी हरियाणा के माध्यम से इस आदेश की कॉपी भी सभी एसएचओ को भेजने को कहा है ताकि भविष्य में किसी पीड़िता को यह सहना न पड़े।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि हालांकि इस बारे में पहले भी डीजीपी को यह आदेश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने यह आदेश सभी एसएचओ को प्रेषित नहीं किए।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह मामला काफी अर्जेंट है। इस वजह से इसमें राज्य सरकार को भी कोई नोटिस नहीं दिया जा रहा है। हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई में कोर्ट ने यह आदेश सुनाया है।
गर्भपात एक्ट के कारण रुकी कार्रवाई
पीड़िता के वकील डॉ. लाल बहादुर खोवाल के मुताबिक दो सप्ताह पहले न्यायिक दंडाधिकारी प्रतीक जैन की अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि यदि परिजनों की इच्छा है, तो वे कानून के अनुसार पीड़िता का गर्भपात करा सकते हैं।
साथ ही पुलिस को यह हिदायत थी कि पुलिस भ्रूण को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रखे क्योंकि यह केस का अहम सबूत है।
उधर, इस फैसले के बाद पीड़िता के परिजन उसे लेकर सामान्य अस्पताल में गए तो चिकित्सकों ने गर्भपात एक्ट का हवाला देते हुए गर्भपात करने से इंकार कर दिया।
साथ ही पीड़िता को रोहतक रेफर कर दिया। इस बारे में सामान्य अस्पताल प्रशासन का कहना था कि एमटीपी एक्ट के अनुसार 20 सप्ताह से ज्यादा का भ्रूण होने पर गर्भपात नहीं किया जा सकता, जबकि पीड़िता उस समय 23 सप्ताह की गर्भवती है। इसके बाद परिजन पीड़िता को लेकर घर लौट आए थे।
यह है मामला
17 सितंबर को बरवाला क्षेत्र के एक गांव की 8वीं कक्षा की 14 वर्षीय छात्रा ने अपने पड़ोसी 55 वर्षीय निहाल सिंह पर दुराचार करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
पीड़ित छात्रा का आरोप था कि निहाल सिंह पिछले छह महीने से उसके साथ दुराचार कर रहा है। बरवाला पुलिस ने आरोपी निहाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
पीड़ित लड़की ने जब अपने परिजनों को पेट दर्द होने की शिकायत बताई, तो डाक्टरों द्वारा जांच में नाबालिग के गर्भवती होने का पता चला। उसके बाद कोर्ट से गर्भपात की अनुमति ली गई।