फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Now the central government will prepare a policy for water and chemical purification

Hisar News: अब जल और रसायन शोधन के लिए नीति तैयार करेगी केंद्र सरकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 11:43 PM IST
विज्ञापन
Now the central government will prepare a policy for water and chemical purification
हिसार। अब केंद्र सरकार एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्रोसेस (ईटीपी) सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने को लेकर नीति बनाने की तैयारी कर रही है। कॉमन प्लांट लगाने को लेकर संबंधित विभागों से डाटा और उद्यमी संगठनों से सुझाव मांगे गए हैं। हालांकि राज्य सरकार की तरफ से पहले ही नीति बनी हुई है। जहां उद्योगों की तरफ से उत्पादन कार्य में पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहां ईटीपी लगाया जाना अनिवार्य है। दूसरी तरफ जिन औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत मजदूरों की संख्या काफी ज्यादा है और उनकी रिहायश भी औद्योगिक परिसर में ही है, उन औद्योगिक इकाइयों के लिए एसटीपी लगाया जाना अनिवार्य है। राज्य सरकार की नीति के तहत कोई औद्योगिक इकाई ईटीपी या एसटीपी स्थापित करना चाहती है तो उसे 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाती है।
विज्ञापन

जिले में 60 हजार एमएसएमई इकाइयां
जिले में करीब 60 हजार एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) इकाइयां पंजीकृत हैं। सुक्ष्म उद्योग वे हैं, जो प्रति वर्ष 5 करोड़ तक का कारोबार करती हैं। लघु उद्योग वे हैं, जिनका प्रति वर्ष 5 से 75 करोड़ तक टर्न ओवर हैं और मध्यम श्रेणी के उद्योग वे हैं, जो प्रति वर्ष 75 से 250 करोड़ तक का टर्न ओवर करते हैं। इनमें विनिर्माण, सेवा व व्यापार संबंधी इकाइयां शामिल हैं। जिले में विनिर्माण की 12935, सेवा की 24993 और व्यापार की 22289 इकाइयां हैं।
विज्ञापन

यह मांगा डाटा व सुझाव
केंद्र सरकार ने अधिकारियों से कहा कि वे औद्योगिक संगठनों व विशेषज्ञों से बातचीत कर डाटा व सुझाव उपलब्ध करवाएं कि, कहां कॉमन ईटीपी व एसटीपी की जरूरत है। डाटा में औद्योगिक प्लॉट की संख्या की भी जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या है ईटीपी और एसटीपी

इटीपी : ये एक अपशिष्ट उपचार प्लांट होता है, जिसके माध्यम से अपशिष्ट और बेकार पानी का शोधन कर पुन: उपयोग किया जा सकता है या सफाई और गार्डनिंग के काम में आसानी से उपयोग किया जा सकता है। केमिकल प्लांट , बेवरेज प्लांट, शुगर प्लांट, पेट्रोलियम, रिफाइनिंग प्लांट, टेक्सटाइल्स मिल्स,पेपर मिल्स, फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्रीज में इसे लगाते हैं।
एसटीपी: गंदे नाले- नालियों, बाथरूम, वॉशिंग मशीन, शौचालय और अन्य स्रोतों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचाया जाता है,जो इसे साफ कर पीने योग्य बनाया जाता है या नदियों में छोड़ा जाता है।
---
केंद्र की तरफ से कॉमन ईटीपी व एसटीपी को लेकर पॉलिसी का गठन किया जा रहा है। इसी को लेकर कुछ जानकारी मांगी गई है। - रचना त्रिपाठी, एएस, एमएसएमई (केंद्र)

-------------
ईटीपी और एसटीपी को लेकर सरकार कोई पॉलिसी बना रही है तो इससे उद्योगों को फायदा होगा। फिलहाल राज्य सरकार की तरफ से ईटीपी व एसटीपी लगाने पर सब्सिडी दी जा रही है। - मदन लाल, प्रधान, द हिसार स्मॉल स्केल इंडस्ट्री एसोसिएशन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed