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दिल्ली के पास पार्किंग की जगह नहीं, हिसार एयरपोर्ट पर खड़े हों सकेंगे जहाज, एमआरओ भी बनेगा
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एयरपोर्ट को एकीकृत विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए मंगलवार को दूसरे चरण के तहत हवाई पट्टी के निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली से हिसार की दूरी और हिसार में अधिक जगह मिलना इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने के रास्ते को आसान बना रही है। उन्होंने कहा कि हिसार एयरपोर्ट को दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली एयरपोर्ट पर जहाजों की पार्किंग को लेकर बड़ी समस्या रहती है। ऐसे में हिसार एयरपोर्ट पर हवाई जहाजों को खड़ा किया जा सकेगा।
7200 एकड़ जमीन पर बन रहे इस एयरपोर्ट की हवाई पट्टी की लंबाई अब चार हजार मीटर से बढ़कर 10 हजार गुणा 200 फुट होगी। यही नहीं, भविष्य में इसे 14 हजार की फुट की लंबाई तक विस्तार भी दिया जा सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय कंपनी के साथ मिलकर बनाई योजनाएं
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि एयरपोर्ट को एकीकृत विमानन हब बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनी के साथ मिलकर योजनाएं बनाई जा रही हैं। फिलहाल उनका फोकस मुख्य रूप से एमआरओ बनाने, पायलट ट्रेनिंग देने और बड़ी इंडस्ट्री स्थापित करने में है। इसके लिए बल्क ड्रग पार्क का प्रस्ताव भी सरकार की तरफ से भेजा गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ ही एकीकृत विमानन हब बनाने की योजनाओं को बल मिलेगा।
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हिसार एयरपोर्ट पर बने एमआरओ में ठीक होंगे जहाज
दूसरे चरण में एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉलिंग) भी बनाए जाने की योजना है। यानी अब छोटे जहाजों की मरम्मत के लिए दिल्ली से विमानों को नागपुर या अन्य देशों में नहीं जाना पड़ेगा। अब तक जहाजों की मरम्मत के लिए उन्हें नागपुर या विदेशों में ले जाना पड़ता है। विदेशों में जहाजों की मरम्मत से बड़ी मात्रा में पैसा भी विदेशों में चला जाता है। हिसार में एमआरओ बनने से न केवल देश का पैसा देश में रहेगा, बल्कि जहाजों को ठीक करवाने के लिए अधिक दूरी भी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे समय और संसाधन भी बचेंगे।
ये होंगी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की विशेषताएं
- 7200 एकड़ जमीन पर बनेगा।
- 10 हजार गुणा 200 फीट का रनवे बनेगा।
- तीसरे चरण में मुख्य रनवे के साथ दूसरा रनवे भी बनाया जाएगा।
- एयर कार्गो- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कार्गो विमान उतर सकेंगे।
- माल ढुलाई व ट्रक आदि के लिए अलग टर्मिनल बनेगा।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर के लिए अलग-अलग टर्मिनल होंगे।
- 50 एयरक्रॉफ्ट के लिए पार्किंग जगह।
- रेल यातायात से एयरपोर्ट को जोड़ा जाएगा।
जानिए किस फेज में कौन सा काम होगा
प्रथम चरण
- डीजीसीए लाइसेंस मिल चुका।
- रनवे की लंबाई 4 हजार मीटर हो चुकी।
- घरेलू उड़ानें शुरू करना, एक बार शुरू हुईं, लेकिन बाद में बंद कर दी गईं।
द्वितीय चरण
- छोटे स्तर का एमआरओ।
- फिक्सड बेस ऑपरेशंस (एफबीओ)।
- डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग एंड डिफेंस एमआरओ।
- हेंगर्स।
- एयर ट्रैफिक सर्विस।
तीसरा चरण
- एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग।
- एविएशन ट्रेनिंग सेंटर एंड एविएशन यूनिवर्सिटी।
- इंटरनेशनल एयरपोर्ट।
- एयरोट्रोपॉलिस-कमर्शियल एंड रेजीडेंशियल।
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7200 एकड़ जमीन पर बन रहे इस एयरपोर्ट की हवाई पट्टी की लंबाई अब चार हजार मीटर से बढ़कर 10 हजार गुणा 200 फुट होगी। यही नहीं, भविष्य में इसे 14 हजार की फुट की लंबाई तक विस्तार भी दिया जा सकेगा।
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अंतरराष्ट्रीय कंपनी के साथ मिलकर बनाई योजनाएं
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि एयरपोर्ट को एकीकृत विमानन हब बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनी के साथ मिलकर योजनाएं बनाई जा रही हैं। फिलहाल उनका फोकस मुख्य रूप से एमआरओ बनाने, पायलट ट्रेनिंग देने और बड़ी इंडस्ट्री स्थापित करने में है। इसके लिए बल्क ड्रग पार्क का प्रस्ताव भी सरकार की तरफ से भेजा गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ ही एकीकृत विमानन हब बनाने की योजनाओं को बल मिलेगा।
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हिसार एयरपोर्ट पर बने एमआरओ में ठीक होंगे जहाज
दूसरे चरण में एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉलिंग) भी बनाए जाने की योजना है। यानी अब छोटे जहाजों की मरम्मत के लिए दिल्ली से विमानों को नागपुर या अन्य देशों में नहीं जाना पड़ेगा। अब तक जहाजों की मरम्मत के लिए उन्हें नागपुर या विदेशों में ले जाना पड़ता है। विदेशों में जहाजों की मरम्मत से बड़ी मात्रा में पैसा भी विदेशों में चला जाता है। हिसार में एमआरओ बनने से न केवल देश का पैसा देश में रहेगा, बल्कि जहाजों को ठीक करवाने के लिए अधिक दूरी भी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे समय और संसाधन भी बचेंगे।
ये होंगी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की विशेषताएं
- 7200 एकड़ जमीन पर बनेगा।
- 10 हजार गुणा 200 फीट का रनवे बनेगा।
- तीसरे चरण में मुख्य रनवे के साथ दूसरा रनवे भी बनाया जाएगा।
- एयर कार्गो- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कार्गो विमान उतर सकेंगे।
- माल ढुलाई व ट्रक आदि के लिए अलग टर्मिनल बनेगा।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर के लिए अलग-अलग टर्मिनल होंगे।
- 50 एयरक्रॉफ्ट के लिए पार्किंग जगह।
- रेल यातायात से एयरपोर्ट को जोड़ा जाएगा।
जानिए किस फेज में कौन सा काम होगा
प्रथम चरण
- डीजीसीए लाइसेंस मिल चुका।
- रनवे की लंबाई 4 हजार मीटर हो चुकी।
- घरेलू उड़ानें शुरू करना, एक बार शुरू हुईं, लेकिन बाद में बंद कर दी गईं।
द्वितीय चरण
- छोटे स्तर का एमआरओ।
- फिक्सड बेस ऑपरेशंस (एफबीओ)।
- डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग एंड डिफेंस एमआरओ।
- हेंगर्स।
- एयर ट्रैफिक सर्विस।
तीसरा चरण
- एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग।
- एविएशन ट्रेनिंग सेंटर एंड एविएशन यूनिवर्सिटी।
- इंटरनेशनल एयरपोर्ट।
- एयरोट्रोपॉलिस-कमर्शियल एंड रेजीडेंशियल।