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Hisar News: जीजेयू में पांच वर्षीय नए कोर्स होंगे शुरू, ऑनलाइन एकेडमिक प्रोग्राम्स भी होंगे
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पत्रकारों से बातचीत करते कुलपति प्रोफेसर नरसीराम बिश्नोई।
हिसार। जीजेयू में इस साल नए कोर्स शुरू होंगे, जो सभी एकेडमिक प्रोग्राम्स वर्तमान समय की मांग के अनुरूप और रोजगारपरक होंगे। एकेडमिक प्रोग्राम्स नियमित और दूरस्थ शिक्षा दोनों ही माध्यमों से शुरू किए जाएंगे। यह बात जीजेयू के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कही। वे सोमवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नियमित एकेडमिक प्रोग्राम्स में पांच वर्षीय बीकॉम-एमकॉम इंटेग्रेटिड, पांच वर्षीय बीसीए-एमसीए इंटेग्रेटिड, बीटेक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड डाटा साइंस, बीएएलएलबी, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, एमएससी जियोग्राफी, पांच वर्षीय बीए-एमएससी जियोग्राफी इंटेग्रेटिड, डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीक्स और डिप्लोमा इन फार्मेसी नए एकेडमिक प्रोग्राम्स शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कुछ शैक्षणिक कार्यक्रमों की कक्षाएं सायंकालीन सत्र में लगेंगी। विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों के शैक्षणिक कार्यक्रम भी नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा पार्ट-टाइम पीएचडी कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। इससे सेवारत आवेदकों को पीएचडी करने का मौका मिलेगा। इस दौरान कुलपति ने डिजिटल कैलेंडर का विमोचन भी किया। इस कैलेंडर के क्यूआर कोड को स्कैन करके माह से संबंधित जानकारियां उपलब्ध होंगी। वहीं, नववर्ष के उपलक्ष्य में जीजेयू में हवन और विश्वविद्यालय परिवार मिलन समारोह का आयोजन किया गया। हवन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई व विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डाॅ. वंदना बिश्नोई मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर भी रहे। पत्रकारवार्ता में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. देवेंद्र कुमार, तकनीकी सलाहकार एचआरएम प्रो. संदीप राणा, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. संजीव कुमार, निदेशक आउटरीच प्रो. दलबीर सिंह, निदेशक दूरस्थ शिक्षा प्रो. खुजान सिंह, उपनिदेशक जनसंपर्क डाॅ. बिजेंद्र दहिया, सहायक कुलसचिव अशोक कौशिक व कंसल्टेंट विमल झा उपस्थित रहे।
ऑनलाइन एकेडमिक प्रोग्राम्स भी होंगे शुरू
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से कई नए ऑनलाइन एकेडमिक प्रोग्राम्स शुरू किए जा रहे हैं। इनमें एमबीए जनरल, एमकॉम, एमए मास कम्युनिकेशन, एमसीए, बीसीए, डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशंस, एमए हिंदी तथा डिप्लोमा इन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड डाटा साइंस शामिल हैं।
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मल्टीपर्पज हॉल बनाया जाएगा
विश्वविद्यालय की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में नए भवनों का निर्माण भी इस वर्ष में शुरू किया जाएगा। विश्वविद्यालय में शिक्षण खंड-8 का निर्माण होगा और शिक्षण खंड-7 की तीसरी मंजिल बनाई जाएगी। सिविल इंजीनियरिंग विभाग की इमारत तथा एक मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण भी किया जाएगा। इसी प्रकार लड़कियों के लिए नए छात्रावास नंबर-5 तथा लड़कों के लिए एक और नए छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए एक अलग से छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर में नए ए-टाइप, सी-टाइप, सुपर सी-टाइप तथा डी-टाइप मकानों का निर्माण भी में किया जाएगा। बढ़ती विद्यार्थियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के आधारभूत ढांचे को भी और अधिक मजबूत किया जाएगा।
विश्वविद्यालयों की रहेगी अहम भूमिका
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा है कि भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने में विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका रहेगी। ऐसे में विश्वविद्यालयों को वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करना व मजबूत करना आवश्यक है। विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख एकेडमिक प्रोग्राम्स उपलब्ध करवाने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास को बेहतर करना भी विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है।
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उन्होंने कहा कि नियमित एकेडमिक प्रोग्राम्स में पांच वर्षीय बीकॉम-एमकॉम इंटेग्रेटिड, पांच वर्षीय बीसीए-एमसीए इंटेग्रेटिड, बीटेक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड डाटा साइंस, बीएएलएलबी, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, एमएससी जियोग्राफी, पांच वर्षीय बीए-एमएससी जियोग्राफी इंटेग्रेटिड, डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीक्स और डिप्लोमा इन फार्मेसी नए एकेडमिक प्रोग्राम्स शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कुछ शैक्षणिक कार्यक्रमों की कक्षाएं सायंकालीन सत्र में लगेंगी। विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों के शैक्षणिक कार्यक्रम भी नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा पार्ट-टाइम पीएचडी कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। इससे सेवारत आवेदकों को पीएचडी करने का मौका मिलेगा। इस दौरान कुलपति ने डिजिटल कैलेंडर का विमोचन भी किया। इस कैलेंडर के क्यूआर कोड को स्कैन करके माह से संबंधित जानकारियां उपलब्ध होंगी। वहीं, नववर्ष के उपलक्ष्य में जीजेयू में हवन और विश्वविद्यालय परिवार मिलन समारोह का आयोजन किया गया। हवन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई व विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डाॅ. वंदना बिश्नोई मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर भी रहे। पत्रकारवार्ता में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. देवेंद्र कुमार, तकनीकी सलाहकार एचआरएम प्रो. संदीप राणा, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. संजीव कुमार, निदेशक आउटरीच प्रो. दलबीर सिंह, निदेशक दूरस्थ शिक्षा प्रो. खुजान सिंह, उपनिदेशक जनसंपर्क डाॅ. बिजेंद्र दहिया, सहायक कुलसचिव अशोक कौशिक व कंसल्टेंट विमल झा उपस्थित रहे।
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ऑनलाइन एकेडमिक प्रोग्राम्स भी होंगे शुरू
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से कई नए ऑनलाइन एकेडमिक प्रोग्राम्स शुरू किए जा रहे हैं। इनमें एमबीए जनरल, एमकॉम, एमए मास कम्युनिकेशन, एमसीए, बीसीए, डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशंस, एमए हिंदी तथा डिप्लोमा इन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड डाटा साइंस शामिल हैं।
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मल्टीपर्पज हॉल बनाया जाएगा
विश्वविद्यालय की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में नए भवनों का निर्माण भी इस वर्ष में शुरू किया जाएगा। विश्वविद्यालय में शिक्षण खंड-8 का निर्माण होगा और शिक्षण खंड-7 की तीसरी मंजिल बनाई जाएगी। सिविल इंजीनियरिंग विभाग की इमारत तथा एक मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण भी किया जाएगा। इसी प्रकार लड़कियों के लिए नए छात्रावास नंबर-5 तथा लड़कों के लिए एक और नए छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए एक अलग से छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर में नए ए-टाइप, सी-टाइप, सुपर सी-टाइप तथा डी-टाइप मकानों का निर्माण भी में किया जाएगा। बढ़ती विद्यार्थियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के आधारभूत ढांचे को भी और अधिक मजबूत किया जाएगा।
विश्वविद्यालयों की रहेगी अहम भूमिका
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा है कि भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने में विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका रहेगी। ऐसे में विश्वविद्यालयों को वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करना व मजबूत करना आवश्यक है। विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख एकेडमिक प्रोग्राम्स उपलब्ध करवाने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास को बेहतर करना भी विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है।