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हिसार: नगर निगम ने देरी से जमा करवाया कर्मचारियों का पीएफ, ईपीएफओ ने लगाया दो करोड़ रुपये जुर्माना
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हिसार। कर्मचारियों का पीएफ देरी से जमा करवाने पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने नगर निगम पर करीब दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि में ब्याज की राशि भी शामिल है। उधर निगम प्रशासन इस फैसले के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील करेगा।
जानकारी के अनुसार नगर निगम प्रशासन ने वर्ष 2016 से 2022 के बीच करीब 500 कर्मचारियों का पीएफ समय पर जमा नहीं करवाया। इस पर संज्ञान लेते हुए ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय की तरफ से निगम प्रशासन को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद इस मामले में निगम प्रशासन ने ईपीएफओ के सामने अपना पक्ष रखा। इस मामले में करीब 10 से 12 बार सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद इस मामले में निगम प्रशासन को दोषी ठहराया गया। ईपीएफओ की सहायक आयुक्त गुरदीप कौर के आदेश पर निगम पर करीब दो करोड़ रुपये जुर्माना किया है। साथ ही संगठन की तरफ से जुर्माना राशि जमा करवाने का लेकर निगम को नोटिस भी थमाया है।
प्रभावित कर्मचारियों के खातों में जमा करवाया जाएगा ब्याज
संगठन की तरफ से निगम से वसूली जाने वाली करीब 2 करोड़ रुपये की राशि में ब्याज भी शामिल है। संगठन निगम से यह ब्याज राशि वसूल कर प्रभावित कर्मचारियों के खातों में जमा करवाएगा। संगठन की माने तो निगम की तरफ से पीएफ समय पर न जमा करवाने से कर्मचारियों को ब्याज की हानि हुई है। निगम से ही इस हानि की क्षतिपूर्ति करवाई जाएगी।
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वर्जन
इस मामले में निगम ने सरकार को अवगत करवा दिया था। उस दौरान निगम के पास बजट की कमी थी। सरकार की तरफ से बजट मिलने के बाद कर्मचारियों का पीएफ जमा करवा दिया था। निगम ईपीएफओ के फैसले के खिलाफ ईपीएफओ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएगा।
-डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगमायुक्त, हिसार
ईपीएफओ ने पहले भी निगम से वसूले थे पीएफ के 6.18 करोड़ रुपये
पिछले ही वर्ष ईपीएफओ ने नगर निगम से पीएफ के 6.18 करोड़ रुपये वसूले थे। मामले के अनुसार वर्ष 2011 से 16 तक निगम का कार्य करने वाली 104 एजेंसियों ने अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं करवाया। जांच पूरी होने पर यह सामने आया था कि निगम ने उक्त एजेंसियों को पूरा भुगतान कर दिया था, लेकिन इन एजेंसियों ने कर्मचारियों के खातों में यह राशि जमा नहीं करवाई। इस मामले में 6 साल में 72 बार सुनवाई हुई थी। आखिर में तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त द्वितीय केसी जोशी ने नगर निगम को 6.18 करोड़ रुपये के पीएफ की राशि जमा करने का फैसला सुनाया था। मगर निगम की तरफ से राशि जमा न करवाने पर ईपीएफओ के इंफोर्समेंट ऑफिसर अनुरंजन कपूर व रामफल ने इसकी रिकवरी की थी।
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जानकारी के अनुसार नगर निगम प्रशासन ने वर्ष 2016 से 2022 के बीच करीब 500 कर्मचारियों का पीएफ समय पर जमा नहीं करवाया। इस पर संज्ञान लेते हुए ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय की तरफ से निगम प्रशासन को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद इस मामले में निगम प्रशासन ने ईपीएफओ के सामने अपना पक्ष रखा। इस मामले में करीब 10 से 12 बार सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद इस मामले में निगम प्रशासन को दोषी ठहराया गया। ईपीएफओ की सहायक आयुक्त गुरदीप कौर के आदेश पर निगम पर करीब दो करोड़ रुपये जुर्माना किया है। साथ ही संगठन की तरफ से जुर्माना राशि जमा करवाने का लेकर निगम को नोटिस भी थमाया है।
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प्रभावित कर्मचारियों के खातों में जमा करवाया जाएगा ब्याज
संगठन की तरफ से निगम से वसूली जाने वाली करीब 2 करोड़ रुपये की राशि में ब्याज भी शामिल है। संगठन निगम से यह ब्याज राशि वसूल कर प्रभावित कर्मचारियों के खातों में जमा करवाएगा। संगठन की माने तो निगम की तरफ से पीएफ समय पर न जमा करवाने से कर्मचारियों को ब्याज की हानि हुई है। निगम से ही इस हानि की क्षतिपूर्ति करवाई जाएगी।
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इस मामले में निगम ने सरकार को अवगत करवा दिया था। उस दौरान निगम के पास बजट की कमी थी। सरकार की तरफ से बजट मिलने के बाद कर्मचारियों का पीएफ जमा करवा दिया था। निगम ईपीएफओ के फैसले के खिलाफ ईपीएफओ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएगा।
-डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगमायुक्त, हिसार
ईपीएफओ ने पहले भी निगम से वसूले थे पीएफ के 6.18 करोड़ रुपये
पिछले ही वर्ष ईपीएफओ ने नगर निगम से पीएफ के 6.18 करोड़ रुपये वसूले थे। मामले के अनुसार वर्ष 2011 से 16 तक निगम का कार्य करने वाली 104 एजेंसियों ने अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं करवाया। जांच पूरी होने पर यह सामने आया था कि निगम ने उक्त एजेंसियों को पूरा भुगतान कर दिया था, लेकिन इन एजेंसियों ने कर्मचारियों के खातों में यह राशि जमा नहीं करवाई। इस मामले में 6 साल में 72 बार सुनवाई हुई थी। आखिर में तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त द्वितीय केसी जोशी ने नगर निगम को 6.18 करोड़ रुपये के पीएफ की राशि जमा करने का फैसला सुनाया था। मगर निगम की तरफ से राशि जमा न करवाने पर ईपीएफओ के इंफोर्समेंट ऑफिसर अनुरंजन कपूर व रामफल ने इसकी रिकवरी की थी।