{"_id":"6316424caa89767be126298d","slug":"monkey-catching-tender-period-is-over-permission-sought-again-hisar-news-hsr64110314","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदर पकड़ने के टेंडर की अवधि हुई पूरी, दोबारा से मांगी अनुमति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदर पकड़ने के टेंडर की अवधि हुई पूरी, दोबारा से मांगी अनुमति
विज्ञापन
हिसार। शहर से बंदर पकड़ने को लेकर नगर निगम की तरफ से लगाए गए टेंडर की अवधि पूरी हो गई है। चूंकि ठेकेदार ने टेंडर में दी गई संख्या से कम बंदर पकड़े हैं। ऐसे में संबंधित शाखा ने निगमायुक्त से टेंडर की अवधि बढ़ाने की मांग की है ताकि ठेकेदार और बंदर पकड़ सके। निगमायुक्त की तरफ से इस मामले में हरी झंडी मिलने के साथ ही ठेकेदार दोबारा से अभियान को शुरू कर देगा।
बता दें कि नगर निगम ने शहर से एक हजार बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया था। इसके तहत ठेकेदार को शहर से बंदरों को पकड़कर कलेसर के जंगल में छोड़ना था। एक बंदर के लिए ठेकेदार को 839 रुपये का भुगतान किया जाना तय हुआ था। बंदरों के खाने-पीने का खर्च ठेकेदार को ही उठाना था, जबकि कलेसर के जंगल तक बंदरों को छोड़ने के लिए गाड़ी का प्रबंध नगर निगम को करना था।
पहले गर्मी तो बाद में बारिश ने अभियान में डाली बाधा
ठेकेदार ने मई के शुरुआत शहर से बंदर पकड़ने का अभियान शुरू किया था। मगर इसी बीच गर्मी ज्यादा बढ़ने से अभियान को रोकना पड़ा। गर्मी थोड़ी कम हुई तो बारिश शुरू हो गई। ऐसे में ठेकेदार अभियान को शुरू नहीं कर सका।
विज्ञापन
इन एरिया में बंदरों का आतंक
नागरिक अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, तेलियान पुल, रामपुरा मोहल्ला, अनाज मंडी, सेक्टर 14, अग्रसेन कॉलोनी, रेड स्क्वेयर मार्केट, हाउसिंग बोर्ड, मोती बाजार, खजांजियान बाजार, पीएलए, नगर निगम में बंदरों का आतंक है। शहर में कई एरिया में तो लोगों ने बंदरों के बचाव के लिए घरों को लोहे की जाली लगाकर कवर किया हुआ है।
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन आते हैं बंदरों के काटने के मामले
जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें बंदर ने काटा होता है। बंदरों के आतंक से छुटकारा पाने के लिए शहरवासी काफी समय से बंदर पकड़ने की मांग कर रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि निगम इस अभियान को गंभीरता से चलाए।
वर्जन
बंदर पकड़ने के टेंडर की अवधि पूरी हो चुकी है। अब दोबारा से अवधि बढ़वाने की प्रक्रिया चल रही है।
- रघुवीर सिंह, वीएलडीए, नगर निगम
विज्ञापन
बता दें कि नगर निगम ने शहर से एक हजार बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया था। इसके तहत ठेकेदार को शहर से बंदरों को पकड़कर कलेसर के जंगल में छोड़ना था। एक बंदर के लिए ठेकेदार को 839 रुपये का भुगतान किया जाना तय हुआ था। बंदरों के खाने-पीने का खर्च ठेकेदार को ही उठाना था, जबकि कलेसर के जंगल तक बंदरों को छोड़ने के लिए गाड़ी का प्रबंध नगर निगम को करना था।
विज्ञापन
पहले गर्मी तो बाद में बारिश ने अभियान में डाली बाधा
ठेकेदार ने मई के शुरुआत शहर से बंदर पकड़ने का अभियान शुरू किया था। मगर इसी बीच गर्मी ज्यादा बढ़ने से अभियान को रोकना पड़ा। गर्मी थोड़ी कम हुई तो बारिश शुरू हो गई। ऐसे में ठेकेदार अभियान को शुरू नहीं कर सका।
विज्ञापन
इन एरिया में बंदरों का आतंक
नागरिक अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, तेलियान पुल, रामपुरा मोहल्ला, अनाज मंडी, सेक्टर 14, अग्रसेन कॉलोनी, रेड स्क्वेयर मार्केट, हाउसिंग बोर्ड, मोती बाजार, खजांजियान बाजार, पीएलए, नगर निगम में बंदरों का आतंक है। शहर में कई एरिया में तो लोगों ने बंदरों के बचाव के लिए घरों को लोहे की जाली लगाकर कवर किया हुआ है।
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन आते हैं बंदरों के काटने के मामले
जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें बंदर ने काटा होता है। बंदरों के आतंक से छुटकारा पाने के लिए शहरवासी काफी समय से बंदर पकड़ने की मांग कर रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि निगम इस अभियान को गंभीरता से चलाए।
वर्जन
बंदर पकड़ने के टेंडर की अवधि पूरी हो चुकी है। अब दोबारा से अवधि बढ़वाने की प्रक्रिया चल रही है।
- रघुवीर सिंह, वीएलडीए, नगर निगम