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Hisar News: परंपरागत खेती छोड़ सफेद झींगा पालन से बदली तकदीर
Mon, 23 Jun 2025 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 23 Jun 2025 12:46 AM IST
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झींगा मच्छली दिखाते हुए पवन कुमार।
हांसी। हिसार जिले के गांव गुराना के किसान पवन कुमार ने मेहनत और सही जानकारी के बल पर मिसाल कायम की है। पारंपरिक खेती से हटकर पवन कुमार ने सफेद झींगा पालन को अपनाया और आज 30 एकड़ क्षेत्र में मछली पालन कर सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं।
पवन ने बताया कि उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत पांच साल पहले गांव रावलवास से की थी। दो साल पहले अपने गांव गुराना में एक हेक्टेयर जमीन पर सफेद झींगा मछली पालना शुरू किया, जिससे उन्हें करीब 10 लाख रुपये की सालाना आय हुई। सफलता को देखते हुए उन्होंने विस्तार करते हुए 12 हेक्टेयर क्षेत्र (30 एकड़) में पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में थोड़ी शंका जरूर थी, लेकिन सरकार से समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान मिलने से आत्मविश्वास बढ़ा। झींगा की दिल्ली सहित कई बड़े बाजारों में अच्छी मांग रहती है, जिससे विपणन में भी कोई दिक्कत नहीं आती। पवन कुमार आज क्षेत्र के युवाओं व किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।
पवन का कहना है कि झींगा पालन की शुरुआत करना बेहद आसान है। विभागीय अधिकारी सहयोग करते हैं और समय-समय पर तकनीकी जानकारियां, बीज, चारा एवं अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं। प्रशिक्षण शिविरों में मत्स्य पालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों से मछली पालन सिखाया जाता है।
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1 हेक्टेयर में पैदा होते हैं 8 से 10 टन झींगा
मत्स्य अधिकारी राजेश वर्मा ने बताया कि एक हेक्टेयर में 2 से तीन तालाब बना सकते हैं। इसमें दो से तीन लाख झींगा मछली का बीज डालना पड़ता है। यह छह महीने में तैयार हो जाता है। अप्रैल से लेकर सितंबर कर इसका उत्पादन अच्छा होता है। एक हेक्टेयर 8 से 10 टन झींगा मछली का उत्पादन होता है।
सरकार की तरफ से दिया जा रहा है अनुदान
प्रदेश सरकार की तरफ से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजनाओं के अंतर्गत पवन कुमार को इस व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। वहीं, अनुसूचित जाति के लोगों व अन्य सभी जातियों की महिलाओं को सरकार की ओर से 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इससे वे कम लागत में यह व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। इनके अलावा अन्य लोग भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं, उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
पट्टे की जमीन पर भी कर सकते हैं काम
जिला मत्स्य अधिकारी भीम सिंह बेनीवाल व हांसी के मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। लोगों को इन योजनाओं का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। इसमें विभाग की तरफ से हर प्रकार की मदद उपलब्ध करवाई जा रही है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है। इनके पास खुद की जमीन नहीं है, वे पट्टे पर भी मत्स्य व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
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पवन ने बताया कि उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत पांच साल पहले गांव रावलवास से की थी। दो साल पहले अपने गांव गुराना में एक हेक्टेयर जमीन पर सफेद झींगा मछली पालना शुरू किया, जिससे उन्हें करीब 10 लाख रुपये की सालाना आय हुई। सफलता को देखते हुए उन्होंने विस्तार करते हुए 12 हेक्टेयर क्षेत्र (30 एकड़) में पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में थोड़ी शंका जरूर थी, लेकिन सरकार से समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान मिलने से आत्मविश्वास बढ़ा। झींगा की दिल्ली सहित कई बड़े बाजारों में अच्छी मांग रहती है, जिससे विपणन में भी कोई दिक्कत नहीं आती। पवन कुमार आज क्षेत्र के युवाओं व किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।
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पवन का कहना है कि झींगा पालन की शुरुआत करना बेहद आसान है। विभागीय अधिकारी सहयोग करते हैं और समय-समय पर तकनीकी जानकारियां, बीज, चारा एवं अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं। प्रशिक्षण शिविरों में मत्स्य पालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों से मछली पालन सिखाया जाता है।
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1 हेक्टेयर में पैदा होते हैं 8 से 10 टन झींगा
मत्स्य अधिकारी राजेश वर्मा ने बताया कि एक हेक्टेयर में 2 से तीन तालाब बना सकते हैं। इसमें दो से तीन लाख झींगा मछली का बीज डालना पड़ता है। यह छह महीने में तैयार हो जाता है। अप्रैल से लेकर सितंबर कर इसका उत्पादन अच्छा होता है। एक हेक्टेयर 8 से 10 टन झींगा मछली का उत्पादन होता है।
सरकार की तरफ से दिया जा रहा है अनुदान
प्रदेश सरकार की तरफ से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजनाओं के अंतर्गत पवन कुमार को इस व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। वहीं, अनुसूचित जाति के लोगों व अन्य सभी जातियों की महिलाओं को सरकार की ओर से 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इससे वे कम लागत में यह व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। इनके अलावा अन्य लोग भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं, उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
पट्टे की जमीन पर भी कर सकते हैं काम
जिला मत्स्य अधिकारी भीम सिंह बेनीवाल व हांसी के मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। लोगों को इन योजनाओं का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। इसमें विभाग की तरफ से हर प्रकार की मदद उपलब्ध करवाई जा रही है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है। इनके पास खुद की जमीन नहीं है, वे पट्टे पर भी मत्स्य व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।