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आंखन देखी: जी आया नू, पाकिस्तान चै तुहाडा स्वागत है भाईजान... पाक रेंजर ने इन शब्दों के साथ किया इस्तकबाल

Thu, 18 Jan 2024 09:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो नवीन सहरावत/मोहित जाखड़, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
नवीन सहरावत/मोहित जाखड़, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा) Updated Thu, 18 Jan 2024 09:37 PM IST
सार

करतारपुर साहिब जाने के लिए गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://prakashpurb550.mha.gov.in/kpr/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

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Kartarpur Sahib is located in Narowal district of Punjab province of Pakistan
करतारपुर साहिब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जी आया नू, पाकिस्तान चै तुहाडा स्वागत है भाईजान... भारत की सरहद पार कर पाकिस्तान की सरजमीं पर कदम रखते ही पाक रेंजर ने इन शब्दों के साथ 11 जनवरी को हमारा इस्तकबाल किया। उस दिन भारत से 196 लोग करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए पहुंचे थे।

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करतारपुर साहिब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित है। हम दोनों पहली बार अपने देश से बाहर जा रहे थे। 11 जनवरी को हम हिसार से ट्रेन से अमृतसर पहुंचे। फिर वहां से 50 किमी दूर कस्बा डेरा बाबा नानक में स्थित करतारपुर कॉरिडोर से सरहद पार की।

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पहले भारत और फिर पाकिस्तान की तरफ इमीग्रेशन की प्रकिया पूरी कर गुरुद्वारे के लिए बस में बैठ गए। बस सेवा निशुल्क थी। वहां से रावी दरिया का पुल पार कर साढ़े चार किमी दूर गुरुद्वारा साहिब है।

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बस से उतरने के बाद पाकिस्तानी सिख महिला ने गुरुद्वारा कमेटी और सरकार की तरफ से सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया और परिसर से जुड़ी से जानकारी दी। सबसे पहले हमने सरोवर साहिब के दर्शन किए, जहां से मुंह-हाथ धोकर गुरुद्वारे के गर्भगृह में माथा टेका। इसके बाद लंंगर चखने के लिए हम हॉल की तरफ चल दिए। मीठे चावल, सादे चावल, दाल, सोया बड़ी की सब्जी और थाली जितनी बड़ी रोटी हमें प्रसाद के रूप में मिली। लंगर हॉल से आने के बाद संग्रहालय में गुरुनानक देव के जन्मस्थल ननकाना साहिब से जुड़ीं कुछ कलाकृतियां देखीं।

इसके बाद खरीदारी के लिए परिसर से बाहर निकले तो आगे भाई अजीता जी बाजार था। वहां से हमने शॉल और पठानी कुर्ता-पाजामा, इत्र, अफगानी और पेशावरी टोपी खरीदी। मेवा विक्रेता ने मुल्तानी सोहन हलवा चखाया। स्वादिष्ट होने पर हमने हलवा भी खरीद लिया। उन्होंने थोड़ी रियायत भी दी।

 

ऐसा महसूस ही नहीं हो रहा था कि किसी दूसरे मुल्क में आए हैं। गुरुद्वारे के साथ ही गुरुनानक देवजी के खेत हैं। इनमें अब अमरूद, नींबू, खजूर के पेड़ लगाए गए हैं। आजकल बाग में अमरूद लगे हैं। यहां से श्रद्धालु फल तोड़कर ले जा सकते हैं। भाषा, पहनावा, खान-पान और रहन-पान सब एक जैसा, फर्क बस सरहद का। ये सफर हमें जिंदगी का एक अलग और सुखद अनुभव दे गया। बता दें कि करतारपुर कॉरिडोर का लोकार्पण 9 नवंबर 2019 को किया गया था। इससे पहले श्रद्धालु अटारी बॉर्डर से वीजा लेकर दर्शन करने जाते थे।

अपनों से मिलने की चाहत में लाहौर से नदीम आए थे गुरुद्वारे में
लाहौर से नदीम अपनों से मिलने की चाहत में गुरुद्वारे में आए थे। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज जट्ट सिख थे। बंटवारे के समय पंजाब के होशियारपुर जिले से पाकिस्तान आए थे। होशियारपुर के पास उनकी 40 किले जमीन भी थी, जिसे छोड़कर उन्हें विस्थापित होना पड़ा था। वो इस तलाश में करतारपुर साहिब आए थे कि कोई उनके पैतृक गांव का या आसपास का व्यक्ति मिल जाए, जिससे वह अपने पुराने गांव-घर के बारे में पूछ सकें।

करतारपुर साहिब जाने के लिए कैसे करें आवेदन
करतारपुर साहिब जाने के लिए गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://prakashpurb550.mha.gov.in/kpr/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए आपके पास पासपोर्ट होना जरूरी है। जाने से 20 दिन पहले आवेदन करना जरूरी है। इसके बाद पुलिस सत्यापन करेगी। जाने से 4 दिन पहले ईटीए (इलेक्ट्रोनिक ट्रेवल ऑथराइजेशन) फॉर्म डाउनलोड करें। यात्रा के समय पासपोर्ट और ईटीए फॉर्म के साथ कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट होना भी आवश्यक है। पाकिस्तान में प्रवेश शुल्क 20 डॉलर यानी लगभग 1800 भारतीय रुपये जमा करवाने होंगे। खरीदारी के लिए अधिकतम 10,000 भारतीय रुपये ले जा सकते हैं।



यह भी जानें
सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी ने अपने जीवन के 18 साल करतारपुर साहिब में बिताए थे। तब वह वहां खेती भी करते थे। मान्यता है कि श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की नींव श्री गुरुनानक देव जी ने ही रखी थी। हालांकि बाद में रावी नदी में बाढ़ के कारण यह बह गया था। उसके बाद वर्तमान गुरुद्वारा महाराजा रंजीत सिंह ने बनवाया था।

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