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30 दिन लग सकते हैं सीईटी का परिणाम जारी होने में : हिम्मत सिंह
Mon, 28 Jul 2025 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 28 Jul 2025 01:03 AM IST
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हिसार। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने कहा कि यह सीईटी उत्सव था, जो कि बहुत अच्छे ढंग से संपन्न हो गया। मुझे भी इसकी उम्मीद नहीं थी। बच्चों व प्रशासन के बीच अच्छा समन्वय रहा। उन्होंने कहा कि सीईटी का परिणाम जारी होने में 30 दिन तक लग सकते हैं, क्योंकि करेक्शन पोर्टल ओपन होना है।
पत्रकारों से बातचीत में रविवार को सीईटी के संबंध में उन्होंने कहा कि जो सरल पर सर्टिफिकेट नहीं बन सके थे, उनके लिए पोर्टल ओपन होगा। इसमें 10 से 15 दिन का समय बच्चों को देना पड़ेगा। काफी संख्या में अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी न होने के बारे में उन्होंने कहा कि यह हमेशा से ही होता है। ये वो बच्चे हैं, जिन्होंने आवेदन पर हस्ताक्षर ही नहीं किए, तो उन आवेदनों को कैसे स्वीकार किया जा सकता है। इनमें वो बच्चे हैं, जिनका फार्म उन्होंने खुद नहीं भरा। इनमें 80 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनका फार्म कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसी) वालों ने भरा। यहां बच्चों से गलतियां हुई हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया गया। इसमें कानूनी पेच हैं।
परीक्षा के विश्लेषण पर रोक लगाने के बारे में उन्होंने कहा कि अन्य रिक्रूटमेंट एजेंसियों में भी ऐसा होता है। इसमें बच्चों में ऐसी भावना आती है कि पहले सेशन वाले को कोई फायदा नहीं मिला, जबकि चौथे सेशन वालों को यह फायदा मिला कि उसे यह पता चल जाता है कि कैसे प्रश्न आ रहे हैं। ये बच्चों का ही एक सुझाव था, जिसे हमने मान लिया।
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नौकरियों की भर्ती को लेकर उन्होंने कहा कि जैसे ही मेरे पास सरकार की तरफ से मांग आएगी, वैसे ही भर्तियां शुरू कर दी जाएंगी। मुझे लगता है कि सरकार की तरफ से जल्द ही यह मांग आएगी और हमारी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हम जल्द ही एक ऐसी योजना तैयार कर रहे हैं, जैसे पुलिस में एक वार्षिक प्लान बने और उसके आधार पर भर्तियां की जा सके। जितने पद होंगे, उनके 10 गुणा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल किए जाएंगे।
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पत्रकारों से बातचीत में रविवार को सीईटी के संबंध में उन्होंने कहा कि जो सरल पर सर्टिफिकेट नहीं बन सके थे, उनके लिए पोर्टल ओपन होगा। इसमें 10 से 15 दिन का समय बच्चों को देना पड़ेगा। काफी संख्या में अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी न होने के बारे में उन्होंने कहा कि यह हमेशा से ही होता है। ये वो बच्चे हैं, जिन्होंने आवेदन पर हस्ताक्षर ही नहीं किए, तो उन आवेदनों को कैसे स्वीकार किया जा सकता है। इनमें वो बच्चे हैं, जिनका फार्म उन्होंने खुद नहीं भरा। इनमें 80 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनका फार्म कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसी) वालों ने भरा। यहां बच्चों से गलतियां हुई हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया गया। इसमें कानूनी पेच हैं।
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परीक्षा के विश्लेषण पर रोक लगाने के बारे में उन्होंने कहा कि अन्य रिक्रूटमेंट एजेंसियों में भी ऐसा होता है। इसमें बच्चों में ऐसी भावना आती है कि पहले सेशन वाले को कोई फायदा नहीं मिला, जबकि चौथे सेशन वालों को यह फायदा मिला कि उसे यह पता चल जाता है कि कैसे प्रश्न आ रहे हैं। ये बच्चों का ही एक सुझाव था, जिसे हमने मान लिया।
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नौकरियों की भर्ती को लेकर उन्होंने कहा कि जैसे ही मेरे पास सरकार की तरफ से मांग आएगी, वैसे ही भर्तियां शुरू कर दी जाएंगी। मुझे लगता है कि सरकार की तरफ से जल्द ही यह मांग आएगी और हमारी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हम जल्द ही एक ऐसी योजना तैयार कर रहे हैं, जैसे पुलिस में एक वार्षिक प्लान बने और उसके आधार पर भर्तियां की जा सके। जितने पद होंगे, उनके 10 गुणा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल किए जाएंगे।