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Hisar News: अतिरिक्त निगमायुक्त को सौंपी जांच, आवेदक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने का आदेश
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हिसार। नगर निगम में पकड़े गए फर्जी रेगुलराइजेशन (नियमितीकरण) सर्टिफिकेट मामले में निगम प्रशासन ने प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड में किए गए बदलाव को रद्द कर यथासिथति बना दी है। वहीं मामले की जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त निगमायुक्त विरेंद्र सहारण को सौंपी गई है। इसके अलावा अधिकारियों को आवेदनकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश दिए गए हैं। उधर निगम ने आवेदनकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए सोमवार को निगम कार्यालय में बुलाया है।
नगर निगम में एक व्यक्ति ने टीपी स्कीम की एक प्रॉपर्टी को रेगुलराइजेश करवाने के लिए आवेदन किया था। यह प्रॉपर्टी 250 गज की है, जिसे 125-125 गज के दो प्रॉपर्टी में बदलना जाना है। इसके लिए निगम के एनडीसी पोर्टल पर रेगुलाइजेशन सर्टिफिकेट अपलोड किया गया। जब यह फाइल टैक्स ब्रांच में पहुंची तो उनकी तरफ से इसे क्रॉस चेक करवाने के लिए टीपी स्कीम रेगुलराइज करने वाली ब्रांच में भेजा गया। यहां ब्रांच ने इस सर्टिफिकेट को फर्जी बताया और इसकी शिकायत अतिरिक्त आयुक्त से की।
ऐसे पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
जब रेगुलराइजेशन सर्टिफिकेट की जांच की गई तो यह निगम का रजिस्ट्रेशन नंबर मैच नहीं किया। यही नहीं इस सर्टिफिकेट पर निगम के एक अधिकारी व महिला कर्मचारी के हस्ताक्षर भी फर्जी मिले। इसमें आर्किटेक्ट का कहना है कि उसने सीएससी से आवेदन करवाया था और निगम में निर्धारित फीस भी जमा करवाई थी। आवेदन का कहना है कि आर्किटेक्ट को उसने निर्धारित फीस दी। फिर उसने क्या और कैसे किया, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
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हमने उक्त प्रॉपर्टी की यथास्थिति कर दी है। आवेदनकर्ता के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी। रसीद असली है या नकली, इसकी जांच अब पुलिस करेगी।
- नीरज, निगमायुक्त।
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नगर निगम में एक व्यक्ति ने टीपी स्कीम की एक प्रॉपर्टी को रेगुलराइजेश करवाने के लिए आवेदन किया था। यह प्रॉपर्टी 250 गज की है, जिसे 125-125 गज के दो प्रॉपर्टी में बदलना जाना है। इसके लिए निगम के एनडीसी पोर्टल पर रेगुलाइजेशन सर्टिफिकेट अपलोड किया गया। जब यह फाइल टैक्स ब्रांच में पहुंची तो उनकी तरफ से इसे क्रॉस चेक करवाने के लिए टीपी स्कीम रेगुलराइज करने वाली ब्रांच में भेजा गया। यहां ब्रांच ने इस सर्टिफिकेट को फर्जी बताया और इसकी शिकायत अतिरिक्त आयुक्त से की।
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ऐसे पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
जब रेगुलराइजेशन सर्टिफिकेट की जांच की गई तो यह निगम का रजिस्ट्रेशन नंबर मैच नहीं किया। यही नहीं इस सर्टिफिकेट पर निगम के एक अधिकारी व महिला कर्मचारी के हस्ताक्षर भी फर्जी मिले। इसमें आर्किटेक्ट का कहना है कि उसने सीएससी से आवेदन करवाया था और निगम में निर्धारित फीस भी जमा करवाई थी। आवेदन का कहना है कि आर्किटेक्ट को उसने निर्धारित फीस दी। फिर उसने क्या और कैसे किया, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
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हमने उक्त प्रॉपर्टी की यथास्थिति कर दी है। आवेदनकर्ता के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी। रसीद असली है या नकली, इसकी जांच अब पुलिस करेगी।
- नीरज, निगमायुक्त।